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साधारण की बजाय एसी बसों में ज्यादा रही आधी दुनिया की भीड़
अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Tue, 08 Aug 2017 02:00 AM IST
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रक्षाबंधन के मौके पर प्रदेश सरकार ने रोडवेज की सभी बसों में महिलाओं के मुफ्त सफर कराने की घोषणा की थी। इसका सोमवार को सिविल लाइंस और जीरोरोड बस स्टेशन पर कुछ ज्यादा ही असर दिखा। बसों में फ्री सफर करने का मौका मिला तो अधिकांश ने एसी बसों में ही सफर करना पसंद किया। यूं तो बस स्टेशन पर फ्री सफर के बैनर आदि लगे थे, फिर भी बस में बैठने के पूर्व महिलाओं ने कंडक्टर से ये जरूर पूछा कि ‘किराया तो नहीं लगेगा’। नहीं में जवाब मिलने के बाद ही अधिकांश महिलाएं बस में सवार हुईं।
इलाहाबाद से सोमवार को सर्वाधिक भीड़ लखनऊ रूट पर जाने वाली बसों में रही। सुबह दस बजे के आसपास सिविल लाइंस बस स्टेशन पर लखनऊ से एक एसी बस आई तो उसमें ज्यादातर महिला यात्री ही रहीं। रायबरेली से आई पूनम द्विवेदी नाम की महिला यात्री ने फ्री में सफर के लिए सीएम को धन्यवाद दिया। इसी बस में राजरूपपुर की संध्या श्रीवास्तव भी अपने बेटे देव के साथ उतरी। उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ बच्चों का भी सफर फ्री करना चाहिए।
शाम को सिविल लाइंस बस स्टेशन पर वाराणसी जाने वाली एसी जनरथ बस में सवार लूकरगंज की रितका ने कहा कि रक्षा बंधन की तर्ज पर सभी महत्वपूर्ण त्योहारों पर भी सरकार को महिलाओं के फ्री सफर की व्यवस्था करनी चाहिए। रोडवेज इलाहाबाद परिक्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंधक डा. हरिशचंद्र यादव ने कहा कि साधरण बसों के मुकाबले एसी बस में सफर करने वाली महिलाओं की संख्या ज्यादा रही। उनके मुताबिक एसी बसों में तकरीबन 50 फीसदी महिलाओं ने सफर किया, जबकि सामान्य बसों में यह आंकड़ा 20 से 25 फीसदी के आसपास रहा होगा। एक अनुमान के मुताबिक पूरे परिक्षेत्र में तकरीबन 15 लाख रुपये के किराये की छूट महिलाओं को मिली होगी। इस दौरान लखनऊ, जौनपुर और वाराणसी रूट पर महिलाओं की ज्यादा भीड़ रही।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा महिलाओं के लिए बसों में फ्री सफर की घोषणा करने के बाद सोमवार को रोडवेज की तमाम बसों में महिलाओं की कंडक्टरों के साथ खूब किचकिच हुई। दरअसल बहुत सी महिलाएं अपने बच्चों के साथ बसों में बैठ गई। सरकार की घोषणा थी कि सिर्फ महिलाओं को ही रक्षा बंधन पर फ्री में सफर करने की छूट रहेगी, लेकिन महिलाओं का कहना था कि अगर उनके बच्चों का किराया न लिया जाए। परिचालकों ने भी बच्चों के फ्री सफर में असमर्थता जताई। तर्क दिया कि सिर्फ बेटियों को ही किराये में पूरी छूट है। बेटों का किराया देना ही पड़ेगा।
रोडवेज की एसी बसों में सोमवार को तमाम महिलाएं लखनऊ, रायबरेली जाने की बात कहकर बैठ तो गई लेकिन बीच रास्ते ही उन्होंने नवाबगंज, कौड़िहार, कुंडा आदि इलाकों में कंडक्टर को बस रोकने को कह दिया। दरअसल इलाहाबाद से लखनऊ जाने वाली एसी बसें सिर्फ रायबरेली ही रुकती है। कुछ का ठहराव ऊंचाहार में भी है। लेकिन फ्री में एसी बस में सफर करने को लेकर कुछ उत्साही महिलाएं उसमें बैठ तो गई लेकिन बीच रास्ते पड़ने वाले छोटे कस्बों में उतरने के लिए उन्होंने बस को रुकवा भी दिया। वाराणसी रूट पर भी छोटे कस्बों में महिलाओं द्वारा बसों को रुकवाने की बात सामने आई है। इस वजह से ड्राइवर और कंडक्टर दोनों को परेशानी हुई।
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इलाहाबाद से सोमवार को सर्वाधिक भीड़ लखनऊ रूट पर जाने वाली बसों में रही। सुबह दस बजे के आसपास सिविल लाइंस बस स्टेशन पर लखनऊ से एक एसी बस आई तो उसमें ज्यादातर महिला यात्री ही रहीं। रायबरेली से आई पूनम द्विवेदी नाम की महिला यात्री ने फ्री में सफर के लिए सीएम को धन्यवाद दिया। इसी बस में राजरूपपुर की संध्या श्रीवास्तव भी अपने बेटे देव के साथ उतरी। उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ बच्चों का भी सफर फ्री करना चाहिए।
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शाम को सिविल लाइंस बस स्टेशन पर वाराणसी जाने वाली एसी जनरथ बस में सवार लूकरगंज की रितका ने कहा कि रक्षा बंधन की तर्ज पर सभी महत्वपूर्ण त्योहारों पर भी सरकार को महिलाओं के फ्री सफर की व्यवस्था करनी चाहिए। रोडवेज इलाहाबाद परिक्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंधक डा. हरिशचंद्र यादव ने कहा कि साधरण बसों के मुकाबले एसी बस में सफर करने वाली महिलाओं की संख्या ज्यादा रही। उनके मुताबिक एसी बसों में तकरीबन 50 फीसदी महिलाओं ने सफर किया, जबकि सामान्य बसों में यह आंकड़ा 20 से 25 फीसदी के आसपास रहा होगा। एक अनुमान के मुताबिक पूरे परिक्षेत्र में तकरीबन 15 लाख रुपये के किराये की छूट महिलाओं को मिली होगी। इस दौरान लखनऊ, जौनपुर और वाराणसी रूट पर महिलाओं की ज्यादा भीड़ रही।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा महिलाओं के लिए बसों में फ्री सफर की घोषणा करने के बाद सोमवार को रोडवेज की तमाम बसों में महिलाओं की कंडक्टरों के साथ खूब किचकिच हुई। दरअसल बहुत सी महिलाएं अपने बच्चों के साथ बसों में बैठ गई। सरकार की घोषणा थी कि सिर्फ महिलाओं को ही रक्षा बंधन पर फ्री में सफर करने की छूट रहेगी, लेकिन महिलाओं का कहना था कि अगर उनके बच्चों का किराया न लिया जाए। परिचालकों ने भी बच्चों के फ्री सफर में असमर्थता जताई। तर्क दिया कि सिर्फ बेटियों को ही किराये में पूरी छूट है। बेटों का किराया देना ही पड़ेगा।
रोडवेज की एसी बसों में सोमवार को तमाम महिलाएं लखनऊ, रायबरेली जाने की बात कहकर बैठ तो गई लेकिन बीच रास्ते ही उन्होंने नवाबगंज, कौड़िहार, कुंडा आदि इलाकों में कंडक्टर को बस रोकने को कह दिया। दरअसल इलाहाबाद से लखनऊ जाने वाली एसी बसें सिर्फ रायबरेली ही रुकती है। कुछ का ठहराव ऊंचाहार में भी है। लेकिन फ्री में एसी बस में सफर करने को लेकर कुछ उत्साही महिलाएं उसमें बैठ तो गई लेकिन बीच रास्ते पड़ने वाले छोटे कस्बों में उतरने के लिए उन्होंने बस को रुकवा भी दिया। वाराणसी रूट पर भी छोटे कस्बों में महिलाओं द्वारा बसों को रुकवाने की बात सामने आई है। इस वजह से ड्राइवर और कंडक्टर दोनों को परेशानी हुई।