{"_id":"3cf94a25058b95d31ecd83c96586a6e6","slug":"money-will-not-bother-dependent-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पैसे के लिए परेशान नहीं होंगे आश्रित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पैसे के लिए परेशान नहीं होंगे आश्रित
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Sat, 20 Dec 2014 12:10 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केंद्रीय कर्मचारियों के अव्यस्क आश्रितों के लिए राहत वाली खबर है। विपरीत परिस्थितियों में अब उन्हें आर्थिक रूप से किसी का मोहताज नहीं होना पड़ेगा। किसी कर्मचारी की अचानक मौत हो जाती है और उसका आश्रित अव्यस्क है तो फौरी तौर पर राहत के लिए उसे ग्रेच्युटी से तत्काल डेढ़ लाख रुपये की मदद उपलब्ध कराई जाएगी। पहले यह मदद महज दस हजार रुपये तक ही सीमित थी। नई व्यवस्था लागू करने के लिए केंद्रीय पेंशन एवं पेंशनर्स कल्याण विभाग ने आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
नियम है कि किसी कर्मचारी के निधन पर उसकी ग्रेच्युटी का भुगतान आश्रित को दिया जाए। अगर आश्रित अव्यस्क है तो उसे पूरी ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं किया जाता। पुरानी व्यवस्था के तहत आश्रित को तमाम औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ग्रेच्युटी में से महज 10 हजार रुपये फौरी तौर पर राहत के लिए दिए जाते थे लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। दस हजार रुपये काफी कम होते हैं। तमाम आपत्तियां आने के बाद सरकार को अपने पुराने आदेश में संशोधन करना पड़ा और भुगतान की रकम बढ़ाने का आदेश जारी करना पड़ा। नई व्यवस्था के तहत अव्यस्क आश्रित को अब ग्रेच्युटी में से डेढ़ लाख रुपये या ग्रेच्युटी की 20 फीसदी रकम (दोनों में से जो कम हो) का राहत के तौर पर तत्काल भुगतान किया जाएगा। हालांकि भुगतान की रकम अव्यस्क आश्रित के गार्जियन को दी जाएगी लेकिन भुगतान गार्जियनशिप सर्टिफिकेट देखने के बाद ही होगा। साथ ही इस बात की भी तस्दीक की जाएगी कि अव्यस्क आश्रित वास्तविक तौर पर संबंधित गार्जियन की कस्टडी और देखरेख में है या नहीं। अगर अव्यस्क आश्रित के नाम पर कोई संपत्ति है तो देखा जाएगा कि गार्जियन अधिकृत रूप से संपत्ति की देखरेख कर रहा है या नहीं। सिविल एकाउंट् ब्रदरहुड के पूर्व अध्यक्ष हरिशंकर तिवारी ने इस आदेश का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे अव्यस्क आश्रितों को काफी राहत मिलेगी।
विज्ञापन
नियम है कि किसी कर्मचारी के निधन पर उसकी ग्रेच्युटी का भुगतान आश्रित को दिया जाए। अगर आश्रित अव्यस्क है तो उसे पूरी ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं किया जाता। पुरानी व्यवस्था के तहत आश्रित को तमाम औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ग्रेच्युटी में से महज 10 हजार रुपये फौरी तौर पर राहत के लिए दिए जाते थे लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। दस हजार रुपये काफी कम होते हैं। तमाम आपत्तियां आने के बाद सरकार को अपने पुराने आदेश में संशोधन करना पड़ा और भुगतान की रकम बढ़ाने का आदेश जारी करना पड़ा। नई व्यवस्था के तहत अव्यस्क आश्रित को अब ग्रेच्युटी में से डेढ़ लाख रुपये या ग्रेच्युटी की 20 फीसदी रकम (दोनों में से जो कम हो) का राहत के तौर पर तत्काल भुगतान किया जाएगा। हालांकि भुगतान की रकम अव्यस्क आश्रित के गार्जियन को दी जाएगी लेकिन भुगतान गार्जियनशिप सर्टिफिकेट देखने के बाद ही होगा। साथ ही इस बात की भी तस्दीक की जाएगी कि अव्यस्क आश्रित वास्तविक तौर पर संबंधित गार्जियन की कस्टडी और देखरेख में है या नहीं। अगर अव्यस्क आश्रित के नाम पर कोई संपत्ति है तो देखा जाएगा कि गार्जियन अधिकृत रूप से संपत्ति की देखरेख कर रहा है या नहीं। सिविल एकाउंट् ब्रदरहुड के पूर्व अध्यक्ष हरिशंकर तिवारी ने इस आदेश का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे अव्यस्क आश्रितों को काफी राहत मिलेगी।
विज्ञापन