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जमीन के लिए बरसा पैसा
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Fri, 10 Apr 2015 01:06 AM IST
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इलाहाबाद। वकीलों की हड़ताल के मार्च में रजिस्ट्री का काम लगभग ठप रहा और निबंधन विभाग को तकरीबन 18 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसके बावजूद विभाग पिछले वित्तीय वर्ष में लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रहा। साफ है कि शहर में जमीन की खरीद-फरोख्त में तेजी आई है और इसी वजह से निबंधन विभाग मार्च से पहले 11 महीनों में ही लक्ष्य तक पहुंच तकरीबन पहुंच गया। पिछले वित्तीय वर्ष में विभाग को रजिस्ट्री से लक्ष्य के मुकाबले 99.36 फीसदी राजस्व की प्राप्ति हुई।
अगर मार्च में वकीलों की हड़ताल न हुई होती तो विभाग लक्ष्य को पार कर गया होता। मार्च में ही नवरात्र का पर्व पड़ा था लेकिन हड़ताल के कारण इस पर्व पर भी रजिस्ट्री का काम बिल्कुल ठप रहा। इससे पहले फरवरी में ही विभाग लक्ष्य के करीब पहुंच चुका था। दरअसल, पिछले वित्तीय वर्ष में सर्किल रेट में 20 से 25 फीसदी तक की वृद्धि कर दी गई। शहर से सटे बाहरी इलाकों में तो 30 फीसदी तक सर्किल रेट बढ़ा दिया गया। इन्हीं इलाकों में जमीन की मांग भी सबसे अधिक है। सर्किल रेट बढ़ने के साथ ही इन इलाकों में जमीन का बाजार मूल्य भी बढ़ गया। शहर में जमीन बची नहीं है, सो बाहरी इलाकों में जमीन खरीदना लोगों की मजबूरी है।
ऐसे में लक्ष्य तक पहुंचने के लिए विभाग को अतिरिक्त मेहनत नहीं करनी पड़ी। जमीन की खरीद-फरोख्त तेज होने के कारण इतनी अधिक संख्या में रजिस्ट्री हुई कि फरवरी तक निबंधन विभाग लक्ष्य के बिल्कुल करीब पहुंच गया। रजिस्ट्रियों के लिए आवेदनों की अत्यधिक संख्या की वजह से तहसील सदर स्थित उप निबंधक कार्यालय जनवरी से फरवरी के बीच साप्ताहिक एवं सार्वजनिक अवकाशों में भी खोला गया। एआईजी स्टाम्प पीके सिंह का कहना है कि वकीलों की हड़ताल की वजह से मार्च में रजिस्ट्री काफी प्रभवित हुई, वरना विभाग को लक्ष्य से अधिक आय होती।
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अगर मार्च में वकीलों की हड़ताल न हुई होती तो विभाग लक्ष्य को पार कर गया होता। मार्च में ही नवरात्र का पर्व पड़ा था लेकिन हड़ताल के कारण इस पर्व पर भी रजिस्ट्री का काम बिल्कुल ठप रहा। इससे पहले फरवरी में ही विभाग लक्ष्य के करीब पहुंच चुका था। दरअसल, पिछले वित्तीय वर्ष में सर्किल रेट में 20 से 25 फीसदी तक की वृद्धि कर दी गई। शहर से सटे बाहरी इलाकों में तो 30 फीसदी तक सर्किल रेट बढ़ा दिया गया। इन्हीं इलाकों में जमीन की मांग भी सबसे अधिक है। सर्किल रेट बढ़ने के साथ ही इन इलाकों में जमीन का बाजार मूल्य भी बढ़ गया। शहर में जमीन बची नहीं है, सो बाहरी इलाकों में जमीन खरीदना लोगों की मजबूरी है।
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ऐसे में लक्ष्य तक पहुंचने के लिए विभाग को अतिरिक्त मेहनत नहीं करनी पड़ी। जमीन की खरीद-फरोख्त तेज होने के कारण इतनी अधिक संख्या में रजिस्ट्री हुई कि फरवरी तक निबंधन विभाग लक्ष्य के बिल्कुल करीब पहुंच गया। रजिस्ट्रियों के लिए आवेदनों की अत्यधिक संख्या की वजह से तहसील सदर स्थित उप निबंधक कार्यालय जनवरी से फरवरी के बीच साप्ताहिक एवं सार्वजनिक अवकाशों में भी खोला गया। एआईजी स्टाम्प पीके सिंह का कहना है कि वकीलों की हड़ताल की वजह से मार्च में रजिस्ट्री काफी प्रभवित हुई, वरना विभाग को लक्ष्य से अधिक आय होती।
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