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Prayagraj News: खेतों में नमी, 15 दिन पिछड़ेगी रबी की बुवाई
Sat, 31 Oct 2026 02:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Sat, 31 Oct 2026 02:13 AM IST
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बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मौसम के बिगड़े मिजाज से जहां ठंड बढ़ गई है, वहीं खेतों में जलभराव और अधिक नमी के चलते आलू, सरसों समेत अन्य दलहनी और तिलहनी फसलों की बुवाई पर ब्रेक लग गया है।
किसानों का कहना है कि बारिश के कारण खेतों को दोबारा तैयार करने में समय लगेगा। ऐसे में रबी की फसलों की बुवाई कम से कम 15 दिन से अधिक पिछड़ सकती है। निचले इलाकों में गेहूं की बुवाई भी प्रभावित होने की आशंका है।
फूलपुर के भरौटी गांव के किसान शिवश्याम पटेल, हैबतपुर के पंधारी यादव और कोडापुर के फूलचंद का कहना है कि पिछले वर्ष इस समय तक क्षेत्र में 30 फीसदी से अधिक किसान आलू की बुवाई कर चुके थे, जबकि करीब 20 फीसदी खेतों में सरसों की बुवाई हो गई थी।
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इस बार बारिश ने खेती का पूरा गणित बिगाड़ दिया है। धान की फसल में पहले ही नुकसान झेल चुके किसानों के सामने अब रबी की फसल को लेकर भी चिंता खड़ी हो गई है।
किसान समर बहादुर, हरिश्चंद्र और संतलाल यादव ने बताया कि बुवाई में देरी का असर फसल की पैदावार पर भी पड़ सकता है। देर से बोई गई आलू और दलहनी फसलों में कीटों का प्रकोप और रोग लगने की आशंका बढ़ जाती है। इससे फसल की बढ़वार प्रभावित होती है और उत्पादन में गिरावट आ सकती है। खेतों में अधिक नमी रहने से जोताई और बुवाई के लिए जमीन तैयार करना भी मुश्किल हो रहा है।
फूलपुर तहसील क्षेत्र के 54,614 हेक्टेयर में होती है खेती
फूलपुर तहसील क्षेत्र में कुल 54,614 हेक्टेयर भूमि पर खेती होती है। इसमें 38,523 हेक्टेयर भूमि सिंचाई योग्य है। आंकड़ों के मुताबिक, करीब 13,091 हेक्टेयर क्षेत्रफल में सरसों और अन्य दलहनी फसलों की खेती होती है।
बारिश के कारण आलू और सरसों समेत अन्य तिलहनी फसलों की बुवाई पखवाड़े भर से अधिक समय तक प्रभावित हो सकती है। खेतों में पानी न रुकने दें। जहां जलभराव है, वहां मेड़ काटकर पानी बाहर निकाल दें। इससे खेत जल्दी सूखेंगे और बुवाई के लिए जमीन तैयार करने में सहूलियत मिलेगी।-मनीष अग्रहरि, सहायक विकास अधिकारी कृषि
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किसानों का कहना है कि बारिश के कारण खेतों को दोबारा तैयार करने में समय लगेगा। ऐसे में रबी की फसलों की बुवाई कम से कम 15 दिन से अधिक पिछड़ सकती है। निचले इलाकों में गेहूं की बुवाई भी प्रभावित होने की आशंका है।
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फूलपुर के भरौटी गांव के किसान शिवश्याम पटेल, हैबतपुर के पंधारी यादव और कोडापुर के फूलचंद का कहना है कि पिछले वर्ष इस समय तक क्षेत्र में 30 फीसदी से अधिक किसान आलू की बुवाई कर चुके थे, जबकि करीब 20 फीसदी खेतों में सरसों की बुवाई हो गई थी।
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इस बार बारिश ने खेती का पूरा गणित बिगाड़ दिया है। धान की फसल में पहले ही नुकसान झेल चुके किसानों के सामने अब रबी की फसल को लेकर भी चिंता खड़ी हो गई है।
किसान समर बहादुर, हरिश्चंद्र और संतलाल यादव ने बताया कि बुवाई में देरी का असर फसल की पैदावार पर भी पड़ सकता है। देर से बोई गई आलू और दलहनी फसलों में कीटों का प्रकोप और रोग लगने की आशंका बढ़ जाती है। इससे फसल की बढ़वार प्रभावित होती है और उत्पादन में गिरावट आ सकती है। खेतों में अधिक नमी रहने से जोताई और बुवाई के लिए जमीन तैयार करना भी मुश्किल हो रहा है।
फूलपुर तहसील क्षेत्र के 54,614 हेक्टेयर में होती है खेती
फूलपुर तहसील क्षेत्र में कुल 54,614 हेक्टेयर भूमि पर खेती होती है। इसमें 38,523 हेक्टेयर भूमि सिंचाई योग्य है। आंकड़ों के मुताबिक, करीब 13,091 हेक्टेयर क्षेत्रफल में सरसों और अन्य दलहनी फसलों की खेती होती है।
बारिश के कारण आलू और सरसों समेत अन्य तिलहनी फसलों की बुवाई पखवाड़े भर से अधिक समय तक प्रभावित हो सकती है। खेतों में पानी न रुकने दें। जहां जलभराव है, वहां मेड़ काटकर पानी बाहर निकाल दें। इससे खेत जल्दी सूखेंगे और बुवाई के लिए जमीन तैयार करने में सहूलियत मिलेगी।-मनीष अग्रहरि, सहायक विकास अधिकारी कृषि