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मोदी जी, कब मिलेगी गंगा को संजीवनी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 12 Jun 2016 02:29 AM IST
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गंगा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद गंगा स्वच्छता को लेकर बड़े-बड़े दावे, यहां तक कि 2018 तक गंगा को पूरी तरह अविरल-निर्मल करने का भरोसा दिलाया गया लेकिन जमीन हकीकत इससे इतर है। इलाहाबाद में गंगा जल की स्थिति बद से बदतर हो गई है। यहां गंगा का अस्तित्व नालों से आ रहे गंदे पानी से है, जिससे उठती दुर्गंध के बीच दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाते हैं। भाजपा कार्य समिति की दो दिवसीय बैठक और मोदी की मौजूदगी से नई उम्मीदें जगी हैं। शहरियों को उम्मीद है कि दो वर्ष बाद ही सही अब प्रधानमंत्री और केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा कायाकल्प मंत्री उमा भारती गंगा के उद्धार के लिए बड़ी घोषणा कर सकती हैं।
कानपुर से निकलकर इलाहाबाद तक पहुंचते-पहुंचते गंगा बेदम हो जा रही हैं। कानपुर की टेनरियों से निकलने वाला जहर लेकर इलाहाबाद पहुंचने के बाद यहां सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से बिना ट्रीटमेंट के छोड़े जा रहे पानी से गंगा की हालत दयनीय हो गई है। ऊपर से पानी न छोड़े जाने के कारण पहले ही कराह रही गंगा, संगम तक पहुंचते-पहुंचते कछार में गुम हो जाती हैं। बेहद कम जलस्तर से रसूलाबाद से दारागंज होकर संगम तक गंगा के तकरीबन 15 किलोमीटर के दायरे में बीच-बीच में टापू बन गए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी और उमा भारती अनेक जनसभाओं में गंगा की स्वच्छता का दावा कर चुकी हैं। भाजपा सरकार बनने के बाद उमा भारती चार बार इलाहाबाद आईं और हर बार गंगा स्वच्छता का दावा किया, लेकिन सच्चाई इसके पूरी तरह विपरीत है। गंगा सफाई के लिए ट्रैस स्कीमर मशीन आई, लेकिन जलस्तर कम होने से काम नहीं कर सकी। गंगा से गाद निकालने का काम अब तक शुरू ही नहीं हुआ। करोड़ों की लागत से बने मेंहदौरी, सलोरी, नुमायाडाही, पोंगहट एसटीपी पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहे हैं। इन एसटीपी से भारी मात्रा में सीवर का पानी बिना ट्रीटमेंट के गंगा में जा रहा है और मोदी एवं उमा भारती की ओर से गंगा को 2018 तक पूरी तरह स्वच्छ करने के दावे किए गए हैं। अब 12 एवं 13 जून को भाजपा कार्य समिति की बैठक और परेड मैदान की रैली में शहरियों को प्रधानमंत्री से गंगा को संजीवनी देने के लिए बड़ी घोषणा की आस है।
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कानपुर से निकलकर इलाहाबाद तक पहुंचते-पहुंचते गंगा बेदम हो जा रही हैं। कानपुर की टेनरियों से निकलने वाला जहर लेकर इलाहाबाद पहुंचने के बाद यहां सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से बिना ट्रीटमेंट के छोड़े जा रहे पानी से गंगा की हालत दयनीय हो गई है। ऊपर से पानी न छोड़े जाने के कारण पहले ही कराह रही गंगा, संगम तक पहुंचते-पहुंचते कछार में गुम हो जाती हैं। बेहद कम जलस्तर से रसूलाबाद से दारागंज होकर संगम तक गंगा के तकरीबन 15 किलोमीटर के दायरे में बीच-बीच में टापू बन गए हैं।
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प्रधानमंत्री मोदी और उमा भारती अनेक जनसभाओं में गंगा की स्वच्छता का दावा कर चुकी हैं। भाजपा सरकार बनने के बाद उमा भारती चार बार इलाहाबाद आईं और हर बार गंगा स्वच्छता का दावा किया, लेकिन सच्चाई इसके पूरी तरह विपरीत है। गंगा सफाई के लिए ट्रैस स्कीमर मशीन आई, लेकिन जलस्तर कम होने से काम नहीं कर सकी। गंगा से गाद निकालने का काम अब तक शुरू ही नहीं हुआ। करोड़ों की लागत से बने मेंहदौरी, सलोरी, नुमायाडाही, पोंगहट एसटीपी पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहे हैं। इन एसटीपी से भारी मात्रा में सीवर का पानी बिना ट्रीटमेंट के गंगा में जा रहा है और मोदी एवं उमा भारती की ओर से गंगा को 2018 तक पूरी तरह स्वच्छ करने के दावे किए गए हैं। अब 12 एवं 13 जून को भाजपा कार्य समिति की बैठक और परेड मैदान की रैली में शहरियों को प्रधानमंत्री से गंगा को संजीवनी देने के लिए बड़ी घोषणा की आस है।
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