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Prayagraj : एमएनएनआईटी के छात्रों ने तैयार की क्यूआर कोड आधारित लॉकिंग सिस्टम से लैस ई-साइकिल
Fri, 02 Jan 2026 08:31 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 02 Jan 2026 08:31 PM IST
सार
मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) के मैकेनिकल इंजीनियरिंग के द्वितिय वर्ष के छात्रों ने एक इलेक्ट्रिक साइकिल तैयार की है।
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लॉकिंग साइकिल।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) के मैकेनिकल इंजीनियरिंग के द्वितिय वर्ष के छात्रों ने एक इलेक्ट्रिक साइकिल तैयार की है। रिचार्जेबल लिथियम-आयन बैटरी पर आधारित यह ई-साइकिल ध्वनिरहित संचालन, ऊर्जा की स्मार्ट प्रबंध प्रणाली और उन्नत सुरक्षा विशेषताओं के कारण पारंपरिक साइकिलों की तुलना में अधिक सुरक्षित व सस्ती है।
प्रो. केएन पांडेय और डॉ जितेंद्र एन गंगवार ने बताया कि चेसिस में कार्बन स्टील का उपयोग किया गया है जिस पर ऐंसिस सॉफ्टवेयर के माध्यम से परिमित तत्व विश्लेषण कर साइकिल की मजबूती और सुरक्षा मापी गई। इसकी अधिकतम स्पीड 35 किमी प्रति घंटा है। साथ ही सस्पेंशन सिस्टम में आगे टेलीस्कोपिक फोर्क और पीछे मोनोशॉक एब्जॉर्बर का उपयोग किया गया है।
ई-साइकिल में 36 वोल्ट, 15 एएच की लिथियम-आयन बैटरी और 350 वॉट का बीएलडीसी हब मोटर का इस्तेमाल किया गया है। साथ ही फोल्डेबल कैरियर और क्यूआर कोड आधारित लॉकिंग सिस्टम से लैस है। भविष्य में इसे सेल्फ-बैलेंसिंग इलेक्ट्रिक साइकिल के रूप में विकसित करने की योजना है, जिसमें जायरोस्कोपिक सेंसर और एआई आधारित एल्गोरिदम का उपयोग किया जाएगा।
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साइकिल को यासिर खान, सुमित त्रिपाठी, अखिलेश द्विवेदी, सूर्यांश कुमार, कृष्णेंदु नायक, एकलव्य गुप्ता, अनुराग कुमार, अभिषेक धाकड़, शिवांशु आजाद, गौरव भकत, पंकज कुमार की टीम ने बनाया है।
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प्रो. केएन पांडेय और डॉ जितेंद्र एन गंगवार ने बताया कि चेसिस में कार्बन स्टील का उपयोग किया गया है जिस पर ऐंसिस सॉफ्टवेयर के माध्यम से परिमित तत्व विश्लेषण कर साइकिल की मजबूती और सुरक्षा मापी गई। इसकी अधिकतम स्पीड 35 किमी प्रति घंटा है। साथ ही सस्पेंशन सिस्टम में आगे टेलीस्कोपिक फोर्क और पीछे मोनोशॉक एब्जॉर्बर का उपयोग किया गया है।
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ई-साइकिल में 36 वोल्ट, 15 एएच की लिथियम-आयन बैटरी और 350 वॉट का बीएलडीसी हब मोटर का इस्तेमाल किया गया है। साथ ही फोल्डेबल कैरियर और क्यूआर कोड आधारित लॉकिंग सिस्टम से लैस है। भविष्य में इसे सेल्फ-बैलेंसिंग इलेक्ट्रिक साइकिल के रूप में विकसित करने की योजना है, जिसमें जायरोस्कोपिक सेंसर और एआई आधारित एल्गोरिदम का उपयोग किया जाएगा।
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साइकिल को यासिर खान, सुमित त्रिपाठी, अखिलेश द्विवेदी, सूर्यांश कुमार, कृष्णेंदु नायक, एकलव्य गुप्ता, अनुराग कुमार, अभिषेक धाकड़, शिवांशु आजाद, गौरव भकत, पंकज कुमार की टीम ने बनाया है।