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एमएनएनआईटी का दावा, 30 सेकेंड में कोरोना संक्रमण की जांच  

Sun, 13 Dec 2020 01:52 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 13 Dec 2020 01:52 AM IST
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MNNIT claims, investigation of corona infection in 30 seconds
prayagraj news : Covid - 19 - फोटो : prayagraj
मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के वैज्ञानिकों ने एक्स-रे के जरिए 30 सेकेंड में कोरोना संक्रमण का पता लगाने का दावा किया है। साथ ही विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) से वित्तीय सहायता मांगी है। जिससे जांच के लिए मशीनें तैयार कर की जा सके। 
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एमएनएनआईटी के निदेशक प्रो. राजीव त्रिपाठी ने बताया कि मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. मुकुल शुक्ला के नेतृत्व में हमारे वैज्ञानिकों ने यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। डिजिटल एक्स-रे एवं आर्टिफिशिल इंटेलीजेंस (एआई) के जरिए मात्र 30 सेकेंड में पता लगाया जा सकता है कि कोई व्यक्ति कोविड-19 से संक्रमित है या नहीं। इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए संस्थान की ओर से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग से वित्तीय सहायता मांगी गई है। डीएसटी की मदद से जांच के लिए मशीन तैयार की जाएगी, जिसको ग्रामीण इलाकों में ले जाकर कोविड-19 संक्रमण की जांच करने में आसानी होगी।
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एलेंजर कंपनी की मदद से तैयार होगी नई एक्स-रे मशीन

एमएनएनआईटी के निदेशक प्रो. राजीव त्रिपाठी ने बताया कि हमारे वैज्ञानिकों के काम को एलेंजर कंपनी ने मान्यता भी दे दी है। जल्द ही संस्थान के वैज्ञानिकों की सलाह पर सामान्य एक्स-रे मशीन में जरूरी  बदलाव कर जांच का काम नए सिरे से शुरू किया जा सकेगा। प्रोजेक्ट हेड मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. मुकुल शुक्ल ने बताया कि कोरोना संक्रमण की एक्स-रे जांच आर्टिफिसियल इंटेलीजेंस  के माध्यम से होगी। इसके लिए चीन, इटली और भारत में कोरोना संक्रमितों की एक्स-रे जांच की फिल्में आर्टिफिसियल इंटेलीजेंस की मदद से स्कैनर पर देखी गई हैं। बारीकी से इसका अध्ययन किया गया है कि संक्रमित व्यक्ति की एक्स-रे फिल्म पर किस प्रकार के स्पॉट मिले हैं। 
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रेडियोलॉजिस्ट डॉ. दीपक गुप्ता ने प्रोजेक्ट में की मदद 

प्रो. मुकुल शुक्ल ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में शहर के जाने-माने रेडियोलॉजिस्ट डॉ. दीपक गुप्ता की मदद ली गई है। डॉ. गुप्ता ने इस पूरी जांच प्रक्रिया को वैज्ञानिक बताया है। उन्होंने बताया कि इंदौर में इस तकनीक के आधार पर जांच शुरू हो गई है। प्रो. मुकुल के मुताबिक एमएनएनआईटी के मयंक मयूख, डॉ. समीर सरस्वती, डॉ. प्रदीप अग्रवाल भी प्रोजेक्ट से जुड़े हैं। यह भी बताया कि इससे पहले संस्थान के वैज्ञानिकों ने कोविड काल में आपदा को अवसर में बदलते हुए वाइरेलाइजर 1.0, वाइरोशील्ड, स्टरलाइजिंग बॉक्स, पावर बेस हैंड फ्री वॉश बेसिन, पेपर सेनेटाइज स्कैनर सहित कई उपकरण तैयार किए हैं। संस्थान की इन उपलब्धियों को देखकर 11 दिसंबर को एमएनएनआईटी के दौरे पर आए केंद्रीय शिक्षा, संचार एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री संजय धोत्रे ने इन उपलब्धियों की सराहना भी की है।
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