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तब्लीगी जमात के सदस्य पर हत्या के प्रयास की धारा लगाना कानून का दुरुपयोग: हाईकोर्ट
Mon, 07 Dec 2020 08:40 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 07 Dec 2020 08:40 PM IST
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तब्लीगी जमात
- फोटो : social media
तब्लीगी जमात में शामिल व्यक्ति के वापस अपने घर मऊ आने पर उस पर हत्या के प्रयास की धारा में मुकदमा दर्ज किए जाने को हाईकोर्ट ने कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग करार दिया है। कोर्ट ने इस मामले में एसएसपी व क्षेत्राधिकारी मऊ से व्यक्तिगत जवाब मांगा। कोर्ट ने कहा कि पुलिस का यह कृत्य कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। हाईकोर्ट ने याची मोहम्मद साद के खिलाफ मऊ के जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में धारा 307 व 270 आईपीसी के तहत दाखिल आरोप पत्र में मुकदमा की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी है । कोर्ट इस केस की सुनवाई 15 दिसंबर को करेगी ।
मोहम्मद साद की ओर से पुलिस द्वारा पेश चार्जशीट को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका पर न्यायमूर्ति अजय भनोट सुनवाई कर रहे हैं । कोर्ट ने आपराधिक केस की सुनवाई पर अग्रिम आदेश तक के लिए रो लगा दी है । याची का कहना था कि पुलिस ने पहले इस मामले में आईपीसी की धारा 269 (संक्रमण फैलाने के लिए उपेक्षापूर्ण काम करना) और 270 (जीवन को खतरे में डालने वाली बीमारी फैलाना) के अन्तर्गत आरोप पत्र दाखिल किया था।
बाद में क्षेत्राधिकारी के कहने पर आरोप पत्र में संशोधन किया गया और 307 व 270 आईपीसी के तहत संशोधित आरोप पत्र दाखिल किया गया । कहा गया है कि प्राथमिकी में दर्ज आरोप को यदि सही भी मान लिया जाए तो याची के खिलाफ हत्या के प्रयास का आरोप लगाना सही नहीं ठहराया जा सकता है । कोर्ट ने इस मामले में प्रदेश के डीजीपी, एसएसपी मऊ, व क्षेत्राधिकारी को भी पक्षकार बनाने को कहा है ।
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मामले के अनुसार याची पर आरोप है कि वह दिल्ली मरकज की मीटिंग में शामिल होकर लौटा था। उसने यह जानते हुए भी कि तब्लीगी जमात में शामिल लोग कोरोना वायरस महामारी से संक्रमित पाए गए हैं, उसने दिल्ली से लौटने के बाद खुद को छिपाए रखा। अपना मेडिकल परीक्षण नहीं कराया । बाद में सूचना मिली कि दिल्ली से लौटे कुछ लोग क्वारेंटीन हैं । मेडिकल परीक्षण में याची की रिपोर्ट निगेटिव आई थी।
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मोहम्मद साद की ओर से पुलिस द्वारा पेश चार्जशीट को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका पर न्यायमूर्ति अजय भनोट सुनवाई कर रहे हैं । कोर्ट ने आपराधिक केस की सुनवाई पर अग्रिम आदेश तक के लिए रो लगा दी है । याची का कहना था कि पुलिस ने पहले इस मामले में आईपीसी की धारा 269 (संक्रमण फैलाने के लिए उपेक्षापूर्ण काम करना) और 270 (जीवन को खतरे में डालने वाली बीमारी फैलाना) के अन्तर्गत आरोप पत्र दाखिल किया था।
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बाद में क्षेत्राधिकारी के कहने पर आरोप पत्र में संशोधन किया गया और 307 व 270 आईपीसी के तहत संशोधित आरोप पत्र दाखिल किया गया । कहा गया है कि प्राथमिकी में दर्ज आरोप को यदि सही भी मान लिया जाए तो याची के खिलाफ हत्या के प्रयास का आरोप लगाना सही नहीं ठहराया जा सकता है । कोर्ट ने इस मामले में प्रदेश के डीजीपी, एसएसपी मऊ, व क्षेत्राधिकारी को भी पक्षकार बनाने को कहा है ।
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मामले के अनुसार याची पर आरोप है कि वह दिल्ली मरकज की मीटिंग में शामिल होकर लौटा था। उसने यह जानते हुए भी कि तब्लीगी जमात में शामिल लोग कोरोना वायरस महामारी से संक्रमित पाए गए हैं, उसने दिल्ली से लौटने के बाद खुद को छिपाए रखा। अपना मेडिकल परीक्षण नहीं कराया । बाद में सूचना मिली कि दिल्ली से लौटे कुछ लोग क्वारेंटीन हैं । मेडिकल परीक्षण में याची की रिपोर्ट निगेटिव आई थी।