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विज्ञापन पढ़ने में की गलती और गंवा बैठे नौकरी

Sun, 03 Sep 2017 12:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sun, 03 Sep 2017 12:39 AM IST
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Mistake in reading advertisements and job loss
यूपीएसएसएससी - फोटो : amar ujala
अगर आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं तो फॉर्म भरने से पहले भर्ती से संबंधित विज्ञापन ध्यान से जरूर पढ़ें। अगर गलती की तो हो सकता है कि परीक्षा में सफलता के बाद भी आपको को नौकरी से हाथ धोना पड़ जाए। समीक्षा अधिकारी (आरओ)/सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) (सामान्य/विशेष चयन) परीक्षा, 2014 इस बात का जीता-जागता उदाहरण है। 22 अभ्यर्थियों ने इसी तरह की गलती की और नौकरी उनके हाथ से फिसल गई।
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने गत 19 अगस्त को आरओ-एआरओ परीक्षा-2014 से संबंधित सभी अभ्यर्थियों के प्राप्तांक और अंतिम रूप से चयनित अभ्यर्थियों के श्रेणीवार कटऑफ आयोग की वेबसाइट पर जारी किए थे। उस वक्त आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि पूर्व में जारी आरओ-एआरओ परीक्षा-2014 के परिणाम में संशोधन भी हुआ था। बताया गया कि समीक्षा अधिकारी लेखा (उत्तर प्रदेश सचिवालय) पद के लिए पूर्व में जारी विज्ञप्ति में अनारक्षित श्रेणी का न्यूनतम कटऑफ 260 अंक, अनुसूचित जाति का 218, अन्य पिछड़ा वर्ग को 176 और महिला का 254 अंक निर्धारित किया गया था। इन अभ्यर्थियों के शैक्षिक अनिवार्यता अर्हता का परीक्षण किया गया। परीक्षण के बाद केवल एक अनारक्षित अभ्यर्थी अर्ह पाया गया, जिसका कटऑफ 262 है। बाकी 22 अनर्ह अभ्यर्थियों के अभ्यर्थन निरस्त कर दिए गए।
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जिनका अभ्यर्थन निरस्त किया गया, उन्होंने आयोग के सचिव जगदीश से मामले की शिकायत की। इस पर सचिव ने खुद पूरे मामले की जांच की और पाया कि इसमें अभ्यर्थियों की ही गलती थी। आरओ-एआरओ परीक्षा-2014 के तहत दो तरह के पदों पर भर्तियां होनी थीं। इनमें एक सहायक समीक्षा अधिकारी और दूसरा समीक्षा अधिकारी लेखा (उत्तर प्रदेश सचिवालय) का पद था। सहायक समीक्षा अधिकारी के लिए जो अर्हता मांगी थी, उसके अनुसार अभ्यर्थी के पास कंप्यूटर में ‘ओ’ लेवल सर्टिफिकेट या उसके समकक्ष सर्टिफिकेट होना चाहिए था और समीक्षा अधिकारी लेखा (उत्तर प्रदेश सचिवालय) के लिए केवल ‘ओ’ लेवल सर्टिफिकेट मांगा गया था। समीक्षा अधिकारी लेखा के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों ने ठीक से विज्ञापन नहीं पढ़ा। उन्होंने ‘ओ’ लेवल सर्टिफिकेट के समकक्ष को दूसरा प्रमाणपत्र लगा दिया जो विज्ञापन के अनुसार मान्य नहीं था। 23 में केवल एक अभ्यर्थी ने ‘ओ’ लेवल सर्टिफिकेट दिया था। ऐसे में बाकी 22 अभ्यर्थी जिन्होंने इसके समकक्ष कोई दूसरी शैक्षिक अर्हता का सर्टिफिकेट लगाया था, उनका अभ्यर्थन निरस्त कर दिया और परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद भी उन्हें नौकरी गंवानी पड़ी।
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