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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Minor rape victim would prefer to suffer silently rather than falsely implicate someone

हाईकोर्ट : नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता किसी को झूठा फंसाने के बजाय चुपचाप सहना पसंद करेगी

Wed, 05 Feb 2025 05:54 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज)
अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज) Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 05 Feb 2025 05:54 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि हमारे देश में नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता किसी को झूठा फंसाने के बजाय चुपचाप सहना पसंद करेगी। दुष्कर्म पीड़िता का कोई भी बयान उसके लिए बेहद अपमानजनक अनुभव होता है।

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विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि हमारे देश में नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता किसी को झूठा फंसाने के बजाय चुपचाप सहना पसंद करेगी। दुष्कर्म पीड़िता का कोई भी बयान उसके लिए बेहद अपमानजनक अनुभव होता है। जब तक वह यौन अपराध की शिकार नहीं होती,वह असली अपराधी के अलावा किसी और को दोषी नहीं ठहराएगी। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह की पीठ ने नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को जमानत देने से इन्कार करते हुए की।

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प्रयागराज के कैंट थाने में सूरज कुमार पर नाबालिग से दुष्कर्म और पॉक्सो मामले में मुकदमा दर्ज कराया गया था। आरोप था कि उसने 5 सितंबर 2024 को नाबालिग के घर में घुसकर उसे अकेला पाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपी ने जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की।

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आरोपी के अधिवक्ता ने दलील दी कि पीड़िता ने अपने बयानों में दुष्कर्म होने की बात की पुष्टि नहीं हो रही है। ऐसे में आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म का मामला नहीं बनता है। मेडिकल रिपोर्ट में किसी भी तरह के बल प्रयोग का कोई संकेत नहीं है। ऐसे में अभियोजन पक्ष का मामला मेडिकल साक्ष्य से पुष्ट नहीं हुआ।

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वहीं शासकीय अधिवक्ता ने जमानत याचिका का विरोध किया। दलील दी कि पीड़िता के पिता घटना के प्रत्यक्षदर्शी हैं। घटना उनके अपने घर में हुई। पीड़िता ने अपने बयानों में अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन किया। पॉक्सो एक्ट की धारा 29 को देखते हुए न्यायालय को यह मान लेना चाहिए कि अभियुक्त ने अपराध किया, जब तक कि अपराधी इसके विपरीत साबित न कर दे।

न्यायालय ने पीड़िता के बयानों को सुनकर पाया कि उसके बयान समान थे और उनमें मामूली विसंगतियों ने अभियोजन पक्ष के मूल संस्करण को नहीं हिलाया, जिसमें आरोप लगाया गया कि पीड़िता के खिलाफ दुष्कर्म किया गया। न्यायालय ने कहा कि यदि यह मान भी लिया जाए कि दुष्कर्म नहीं हुआ था, तब भी आवेदक धारा 65(2) बीएनएस के तहत दंडित होने का पात्र है, क्योंकि पीड़िता की आयु 12 वर्ष से कम है। आरोपी का कथित कृत्य बीएनएस की धारा 63 के तहत प्रदान की गई बलात्कार की परिभाषा के अंतर्गत आता है। न्यायालय को आवेदक के झूठे आरोप को मानने और नाबालिग पीड़िता के बयानों पर अविश्वास करने के लिए रिकॉर्ड पर कोई सामग्री नहीं मिली। न्यायालय ने उसे जमानत देने से इनकार कर दिया।

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