मंत्रालय के पास नहीं शिक्षकों के सवालों का जवाब, आरटीआई में सुनवाई भी रही बेनतीजा
जिन सवालों का जवाब जानने के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) और संघटक महाविद्यालयों के शिक्षक डेढ़ साल से केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के चक्कर काट रहे हैं, उनका जवाब मंत्रालय के पास नहीं है।
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जिन सवालों का जवाब जानने के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) और संघटक महाविद्यालयों के शिक्षक डेढ़ साल से केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के चक्कर काट रहे हैं, उनका जवाब मंत्रालय के पास नहीं है। केंद्रीय सूचना आयोग में 27 दिसंबर को हुई सुनवाई में शिक्षकों के वेतन एवं एरियर से संबंधित सवालों का जवाब देने से मंत्रालय ने अपना पल्ला झाड़ लिया।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय संघटक महाविद्यालय शिक्षक संघ (ऑक्टा) ने शिक्षा मंत्रालय को पत्र लिखकर जानकारी मांगी थी कि अर्हता तिथि से देय वेतनमान के मामले में सीएजी की ऑडिट आपत्ति पर यूजीसी की ओर से उच्च शिक्षा विभाग को दिए गए स्पष्टीकरण के बाद विभाग ने क्या कार्यवाही की? प्रोन्नत शिक्षकों को देय एरियर के मामले में उच्च शिक्षा विभाग ने क्या कार्यवाही की?
कॅरियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत शिक्षकों के प्रमोशन से संबंधित वर्षों से लंबित एरियर शिक्षा मंत्रालय देगा या नहीं? मंत्रालय की ओर से चार अक्तूबर 2018 एवं 26 मार्च 2016 को जारी पत्र के माध्यम से मांगे स्पष्टीकरण पर इविवि की ओर से क्रमश: 25 अक्तूबर 2018 एवं चार अप्रैल 2019 को दिए गए जवाब पर शिक्षा मंत्रालय ने क्या प्रक्रिया अपनाई?
केंद्रीय सूचना आयोग की सुनवाई में शामिल हुए ऑक्टा अध्यक्ष डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि उन्होंने उच्च शिक्षा सचिव से सूचनाएं मांगीं थीं, लेकिन जवाब अनु सचिव ने दिया और किसी भी मामले में उन्होंने कोई सीधा जवाब नहीं दिया। उनका जवाब था कि एरियर भुगतान का दायित्व विश्वविद्यालय का है, जबकि सभी यह जानते हैं कि विश्वविद्यालय केंद्रपोषित संस्था है और वेतन एवं एरियर का भुगतान शिक्षा मंत्रालय यूजीसी के माध्यम से करता है।
साथ ही उन्होंने इविवि की आधिकारिक मेल से भेजे गए स्पष्टीकरण के पत्रों को भी नकारा दिया और कहा कि उनको ऐसे कोई पत्र प्राप्त नहीं हुए हैं। ऑडिट आपत्ति के बारे में भी गोलमोल जवाब दिया। ऑक्टा अध्यक्ष के अनुसार कि उन्होंने सुनवाई में केंद्रीय सूचना आयोग से कहा है कि ये सभी जवाब उन्हें लिखित रूप से दिए जाएं। शिक्षक अपने अधिकार की लड़ाई जारी रखेंगे।