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मंत्री गिरीश चंद्र यादव पर चलेगा धोखाधड़ी का केस
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Minister Girish Chandra Yadav will run a case of fraud
प्रयागराज। धोखाधड़ी के एक लंबित मुकदमे में प्रदेश सरकार के मंत्री गिरीश चंद्र यादव की ओर से पेश उन्मोचन अर्जी को स्पेशल कोर्ट एमपीएमएलए ने खारिज कर दी है। मंत्री सहित तीन अन्य पर झूठा शपथपत्र पेश कर आदेश प्राप्त करने का आरोप है। प्रकरण में आरोप तय किए जाने के लिए कोर्ट ने 21 सितंबर की तारीख नियत की है। यह आदेश स्पेशल कोर्ट के जज पवन कुमार तिवारी ने परिवादी के अधिवक्ता और एसपीओ हरिओंकार सिंह, राधा कृृष्ण मिश्र और एडीजीसी राजेश गुप्ता को सुनकर दिया है।
प्रकरण जौनपुर के लाइन बाजार थाने का है। परिवादी प्यारे लाल ने गिरीश चंद्र यादव, दूधनाथ और श्रीनाथ यादव के खिलाफ परिवाद दाखिल किया था। अभियुक्त पर आरोप है कि उन्होंने प्यारेलाल को किराये के मकान से बेदखल करने के लिए एडीएम रेंट कंट्रोल जौनपुर को अर्जी देकर अपने पक्ष में आदेश प्राप्त कर लिया था। प्यारेलाल का यह भी कहना है कि मकान से संबंधित एक मुकदमा दीवानी न्यायालय में लंबित चल रहा था।
इस बात को अभियुक्त ने एडीएम रेंट कंट्रोल को दिए शपथपत्र छिपा लिया। कोर्ट ने मामले में संज्ञान लेते हुए 31 जुलाई 2014 को सुनवाई के लिए अभियुक्तगणों को धोखाधड़ी की धाराओं में तलब किया था। स्पेशल कोर्ट में गिरीश चंद्र यादव की ओर से परिवाद से उन्मोचित किए जाने की अर्जी देकर कहा गया कि उनके द्वारा दिया गया शपथपत्र गलत नहीं था। कोर्ट ने प्रकरण में आरोप तय किए जाने का आधार पाते हुए अभियुक्तगण की अर्जी को खारिज कर दिया है।
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प्रकरण जौनपुर के लाइन बाजार थाने का है। परिवादी प्यारे लाल ने गिरीश चंद्र यादव, दूधनाथ और श्रीनाथ यादव के खिलाफ परिवाद दाखिल किया था। अभियुक्त पर आरोप है कि उन्होंने प्यारेलाल को किराये के मकान से बेदखल करने के लिए एडीएम रेंट कंट्रोल जौनपुर को अर्जी देकर अपने पक्ष में आदेश प्राप्त कर लिया था। प्यारेलाल का यह भी कहना है कि मकान से संबंधित एक मुकदमा दीवानी न्यायालय में लंबित चल रहा था।
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इस बात को अभियुक्त ने एडीएम रेंट कंट्रोल को दिए शपथपत्र छिपा लिया। कोर्ट ने मामले में संज्ञान लेते हुए 31 जुलाई 2014 को सुनवाई के लिए अभियुक्तगणों को धोखाधड़ी की धाराओं में तलब किया था। स्पेशल कोर्ट में गिरीश चंद्र यादव की ओर से परिवाद से उन्मोचित किए जाने की अर्जी देकर कहा गया कि उनके द्वारा दिया गया शपथपत्र गलत नहीं था। कोर्ट ने प्रकरण में आरोप तय किए जाने का आधार पाते हुए अभियुक्तगण की अर्जी को खारिज कर दिया है।
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