{"_id":"82036353b223fea7a092ca18680be327","slug":"millions-have-eaten-without-disease-medications-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिना बीमारी खा गए लाखों की दवाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिना बीमारी खा गए लाखों की दवाएं
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 08 Aug 2015 01:41 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इलाहाबाद। सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) में मुफ्त की दवाओं से लाखों रुपये कमाने का धंधा बरसों से चल रहा है। सीजीएचएस से रिटायर हो चुके कुछ कर्मचारी हर माह 20 से 22 हजार रुपये की दवाएं मुफ्त में ले रहे हैं। अगर मेडिकल बोर्ड से जांच कराई जाए तो उन्हें शायद कोई बीमारी न निकले। यह काम कुछ डॉक्टरों की मिलीभगत से हो रहा है। मुफ्त की दवाएं बाजार में बेची जा रही हैं और इससे मोटा मुनाफा कमाया जा रहा है।
इलाहाबाद में सीजीएचएस की सात डिस्पेंसरियां हैं। इससे एक लाख से अधिक केेंद्रीय कर्मचारी, पेंशनर्स और उनके आश्रित जुड़े हैं। कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके आश्रितों को सीजीएचएस से मुफ्त इलाज और दवाओं की सुविधा मिलती है। इसी सुविधा को कुछ लोगों ने धंधा बना लिया है। सूत्रों के मुताबिक सीजीएचएस से रिटायर हो चुके तकरीबन पांच कर्मचारी बिना किसी बीमारी के हर माह 20 से 25 हजार रुपये की दवाएं लेते हैं। इनमें से ज्यादातर कर्मचारी फार्मासिस्ट के पद से रिटायर हुए हैं। रिटायर कर्मचारी कभी खुद तो कभी अपने आश्रित के नाम पर महंगी ब्रांडेड दवाएं इंडेंट कराते हैं। यह काम डॉक्टर की मिलीभगत के बगैर नहीं हो सकता, क्योंकि दवाएं डॉक्टर को ही लिखनी हैं।
सूत्रों का कहना है कि इस खेल में कुछ डॉक्टर भी शामिल हैं। सीजीएचएस से पंजीकृत सप्लायर की जिम्मेदारी है कि वह इंडेंट की गई महंगी ब्रांडेंड दवाएं सीजीएचएस की डिस्पेंसरियों तक पहुंचाएं लेकिन इस घपले मेें रिटायर कर्मचारी सीधे सप्लायर के पास पहुंच जाते हैं। इसके बाद दवाएं लेने की जगह उनसे दवाओं की कीमत वसूलते हैं। अगर कोई सप्लायर नगद पैसा देने से मना करता है तो दवाएं लेकर बाजार में बेच दी जाती हैं। सूत्रों का कहना है कि सीजीएचएस से रिटायर इन पांचों कर्मचारियों के स्वास्थ्य का परीक्षण करा लिया जाए तो शायद उन्हें कोई बीमारी न हो। अगर बीमारी निकलती भी है तो ऐसी नहीं होगी कि इसके लिए वर्षों तक हर माह 20 से 22 हजार रुपये की दवाएं खानी पड़ें।
विज्ञापन
‘इस तरह का कोई मामला तो अब तक संज्ञान में नहीं आया है। इसके बावजूद इस प्रकरण में जांच कराई जाएगी। सीजीएचएस में किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं होने दी जाएगी।’
डॉ. यूके मैत्रा, अपर निदेशक, सीजीएचएस
विज्ञापन
इलाहाबाद में सीजीएचएस की सात डिस्पेंसरियां हैं। इससे एक लाख से अधिक केेंद्रीय कर्मचारी, पेंशनर्स और उनके आश्रित जुड़े हैं। कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके आश्रितों को सीजीएचएस से मुफ्त इलाज और दवाओं की सुविधा मिलती है। इसी सुविधा को कुछ लोगों ने धंधा बना लिया है। सूत्रों के मुताबिक सीजीएचएस से रिटायर हो चुके तकरीबन पांच कर्मचारी बिना किसी बीमारी के हर माह 20 से 25 हजार रुपये की दवाएं लेते हैं। इनमें से ज्यादातर कर्मचारी फार्मासिस्ट के पद से रिटायर हुए हैं। रिटायर कर्मचारी कभी खुद तो कभी अपने आश्रित के नाम पर महंगी ब्रांडेड दवाएं इंडेंट कराते हैं। यह काम डॉक्टर की मिलीभगत के बगैर नहीं हो सकता, क्योंकि दवाएं डॉक्टर को ही लिखनी हैं।
विज्ञापन
सूत्रों का कहना है कि इस खेल में कुछ डॉक्टर भी शामिल हैं। सीजीएचएस से पंजीकृत सप्लायर की जिम्मेदारी है कि वह इंडेंट की गई महंगी ब्रांडेंड दवाएं सीजीएचएस की डिस्पेंसरियों तक पहुंचाएं लेकिन इस घपले मेें रिटायर कर्मचारी सीधे सप्लायर के पास पहुंच जाते हैं। इसके बाद दवाएं लेने की जगह उनसे दवाओं की कीमत वसूलते हैं। अगर कोई सप्लायर नगद पैसा देने से मना करता है तो दवाएं लेकर बाजार में बेच दी जाती हैं। सूत्रों का कहना है कि सीजीएचएस से रिटायर इन पांचों कर्मचारियों के स्वास्थ्य का परीक्षण करा लिया जाए तो शायद उन्हें कोई बीमारी न हो। अगर बीमारी निकलती भी है तो ऐसी नहीं होगी कि इसके लिए वर्षों तक हर माह 20 से 22 हजार रुपये की दवाएं खानी पड़ें।
विज्ञापन
‘इस तरह का कोई मामला तो अब तक संज्ञान में नहीं आया है। इसके बावजूद इस प्रकरण में जांच कराई जाएगी। सीजीएचएस में किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं होने दी जाएगी।’
डॉ. यूके मैत्रा, अपर निदेशक, सीजीएचएस