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मध्य वर्ग भी पा सकेगा सस्ता और सुलभ न्याय, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जारी की वेबसाइट

Thu, 17 Sep 2020 08:18 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 17 Sep 2020 08:18 PM IST
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Middle class will also be able to get cheap and accessible justice, Allahabad High Court released website
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
मध्यम वर्गीय आय वर्ग के लोग भी अब आसानी से सस्ता और सुलभ न्याय प्राप्त कर सकेंगे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खासकर मध्यमवर्गीय लोगों को ध्यान में रखकर एक वेबसाइट लांच की है।  इसका नाम रखा गया है ऽ इलाहाबाद हाईकोर्ट मिडिल इनकम ग्रुप लीगल एड सोसाइटी ऽ। हाईकोर्ट ने  सोसाइटी को सुप्रीम कोर्ट की योजना के तहत लांच किया है । अभी तक सिर्फ निम्न आयवर्ग के लोगों को सस्ता और सुलभ न्याय देने के लिए विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा निशुल्क सलाह और मदद की व्यवस्था थी ।  मगर इस विशेष योजना के माध्यम से अब मध्यमवर्गीय लोगों के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है।  
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छह से 12 लाख सालाना आय वालों को लाभ 

मिडिल इनकम ग्रुप सोसाइटी   मध्य आय वर्ग में आने वाले लोगों को निशुल्क या बेहद मामलू शुल्क पर विधिक सलाह, जानकारी और आवश्यकता पड़ने पर उनका मुकदमा लड़ने की व्यवस्था करेगा।  योजना के अनुसार छह से 12 लाख रुपये तक वार्षिक आय के लोगों को मध्य आय वर्ग में माना जाएगा। ऐसे लोगों को ही विधिक सहायता दी जाएगी। इस मिडिल इनकम ग्रुप लीगल एड सोसाइटी का काम होगा कि वह जरूरतमंदों  को विधिक सहायता,  उनकी काउंसिंलग, विधिक उपचार व आवश्यकता होने पर कोर्ट में उनका प्रतिनिधित्व करे । इसके अलावा मध्यस्थता एवं समझौता केंद्र  व आर्बिट्रेशन के मामलों में भी लाभ मिलेगा ।
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घर बैठे मिलेगी मदद

इस सेवा की विशेषता यह है कि इसका लाभ दूर दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोग भी घर बैठे ले सकेंगे। ई मेल, वीडियो कॉल, या सोशल मीडिया प्लेटफार्म के जरिए विधिक सहायता जरूरतमंद को उसके घर पर ही उपलब्ध करा दी जाएगी। उनको सहायता प्राप्त करने के लिए हाईकोर्ट तक चलकर आने की आवश्यकता नहीं होगी। और अनावश्यक यात्रा से बच सकेंगे।  इसका लाभ वृद्ध,  विकलांग  व यात्रा के अयोग्य अन्य  लोगों को भी मिलेगा । इस सुविधा का लाभ लेने या कानूनी सलाह  व राय मशविरा का कोई खर्च नहीं देना है । सुविधा निशुल्क प्रदान की जाएगी । केवल कोर्ट में केस का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक निर्धारित मामूली शुल्क देना होगा।  ज्यादा से ज्यादा लोग इसका लाभ ले सकें इसके लिए वेबसाइट को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में बनाया गया है। 
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वेबसाइट पर बतानी होगी समस्या

 इस सुविधा का लाभ पाने के लिए जरूरत व्यक्ति को अपनी बात व परेशानी विस्तार से वेबसाइट पर भेजनी होगी । वकीलों का एक पैनल इसका अध्ययन करेगा और भेजने के 15 दिन के भीतर उस अर्जी की स्वीकृति अथवा अस्वीकृति संबंधी आदेश याची को मिल जाएगा । यदि भेजी गई अर्जी खारिज होती है तो उस व्यक्ति को पैनल का नामित वकील खारिज होने के कारण से  अवगत कराएगा । और यदि अर्जी  स्वीकार होती है तो उस दशा में पैनल का  अधिवक्ता सूचित करेगा तथा उसके बाद अधिवक्ता  व वादकारी की इसके लिए निर्धारित समय पर मीटिंग होगी ।
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