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हाईकोर्ट : पुलिस जांच से असंतुष्टि भर से नहीं बनता कर्तव्य की उपेक्षा का अपराध, हाईकोर्ट ने खारिज की अपील
Thu, 15 Oct 2026 06:27 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 15 Oct 2026 06:27 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि पुलिस जांच से असंतुष्टि भर से एससी-एसटी एक्ट की धारा-4 के तहत कर्तव्य की उपेक्षा का अपराध नहीं बनता। इसके लिए लोक सेवक की जानबूझकर की गई चूक साबित करना जरूरी है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि पुलिस जांच से असंतुष्टि भर से एससी-एसटी एक्ट की धारा-4 के तहत कर्तव्य की उपेक्षा का अपराध नहीं बनता। इसके लिए लोक सेवक की जानबूझकर की गई चूक साबित करना जरूरी है। न्यायमूर्ति संतोष राय की एकल पीठ ने गाजियाबाद निवासी की अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।
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याची ने सात लोक सेवकों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की मांग की थी। विशेष अदालत ने अर्जी खारिज की दी तो याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। याची के अनुसार वर्ष 2020 में उसकी नाबालिग बेटी एक दंपती के घर घरेलू सहायिका थी। इसी दौरान वह लापता हो गई। बाद में उसके मिलने पर चिकित्सा परीक्षण में दुष्कर्म और गर्भावस्था की पुष्टि हुई। याची ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उचित कार्रवाई नहीं की। जांच अधिकारी ने पक्षपातपूर्ण जांच की। पीड़िता के बयानों के बावजूद एससी-एसटी एक्ट की धाराएं भी नहीं लगाईं।
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कोर्ट ने पाया कि याची की लिखित शिकायत पर सात फरवरी 2020 को आईपीसी की धारा-366 (अपहरण) के तहत एफआईआर दर्ज हुई थी। पुलिस ने पीड़िता और गवाहों के बयान दर्ज किए। एक आरोपी के खिलाफ आरोपपत्र भी दाखिल किया गया। कोर्ट ने कहा कि जांच में उचित धाराएं नहीं लगाने की शिकायत अपने आप में धारा-4 के तहत अपराध नहीं है। इसके लिए यह बताना जरूरी है कि संबंधित लोक सेवक पर कौनसा वैधानिक कर्तव्य था। उसने उसकी जानबूझकर उपेक्षा कैसे की।
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