फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Memories of all Shejin glaucous

सबने सहेजीं नीलाभ की यादें

Mon, 25 Jul 2016 12:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Mon, 25 Jul 2016 12:57 AM IST
विज्ञापन
Memories of all Shejin glaucous
नीलाभ
कवि, नाटककार तथा वाम सांस्कृतिक आंदोलन के अगुआ साथी नीलाभ  की याद में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विवि के क्षेत्रीय केंद्र में रविवार को स्मृति सभा का आयोजन किया गया। इसमें साहित्यकारों ने नीलाभ के साथ बिताए वक्त को याद किया। सभी ने उनकी जिंदगी के तमाम पहलुओं को रेखांकित किया।
विज्ञापन


जसम, जलेस, प्रलेस, समानांतर, दस्तक, आरोही आदि संगठनों की ओर से आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार दूधनाथ सिंह ने कहा, अमृत राय के बाद अगर कोई श्रेष्ठ अनुवादक है तो वह नीलाभ हैं। उनका जाना हिंदी साहित्य के लिए अप्रत्याशित क्षति है। समकालीन जनमत के संपादक रामजी राय ने नीलाभ के साथ तीन दशक के अपने साथ को समेटते हुए गालिब का मिसरा ‘वो काफिर जो खुदा को भी सौंपा न जाए’ पढ़ा। साहित्यकार प्रो. अनीता गोपेश ने कहा, नीलाभ ने हमेशा वही किया जो वो चाहते थे। उन्होंने उनकी रचना ‘शक’ और ‘हलफनामा’ का पाठ करके श्रद्धांजलि दी। डॉ. आशीष मित्तल ने कहा, नीलाभ ने वामपंथी आंदोलनों के ठहराव के दिनों में भी मूल्यों से मुंह नहीं मोड़ा।
विज्ञापन


प्रो. अली अहमद फातमी ने कहा, उन्होंने उपेंद्र नाथ अश्क के जरिए उनके बेटे नीलाभ को जाना। हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी और पंजाबी भाषा में माहिर थे। नीलाभ को शायद यह लगता था कि इलाहाबाद ने उन्हें उस तरह से स्वीकार नहीं किया, जैसे दूसरों कवियों को किया। वह दिल्ली जाने के बाद भी वापस इलाहाबाद आना चाहते थे। 
विज्ञापन
विज्ञापन


रंगकर्मी  और निदेशक अनिल रंजन भौमिक ने नीलाभ को बेबाक, निर्भीक और अपनी ही धुन का पक्का बताया। नीलाभ प्रकाशन में बिताए गए दिनों  को भी याद किया। अजामिल ने कहा, नीलाभ ने जिंदगी में बहुत संघर्ष किया। युवा रचनाकारों को वह हमेशा प्रोत्साहित करते थे। सुधांशु मालवीय ने कहा, नीलाभ का व्यक्तित्व विविधतापूर्ण था। केके पांडेय ने 1975  के बाद से एक दशक तक जन संस्कृति मंच में उनकी सक्रियता को याद किया। संध्या नवोदिता ने कहा कि नीलाभ तार्किक रूप से बेहद मजबूत थे। हरिश्चंद्र शर्मा ने कहा, नीलाभ मित्रों के मित्र थे। अशफाक हुसैन ने उनके साथ अपनी यादों को साझा किया। सीमा आजाद ने बताया किस तरह से मुश्किल वक्त में नीलाभ ने उनका साथ दिया था। असरार गांधी आदि ने सांप्रदायिकता के विरोध में उनकी अग्रणी भूमिका की चर्चा की। संचालन डॉ. प्रणय कृष्ण और आभार ज्ञापन डॉ. संतोष चतुर्वेदी ने दिया।

स्मृति सभा जलेस और जसम की ओर से शोक पत्र भी पढ़े गए। जलेस के शोक प्रस्ताव को वरिष्ठ साहित्यकार दूधनाथ सिंह और जसम  की ओर से केके पांडेय ने शोक पत्र पढ़ा।


नीलाभ का अस्थि कलश सोमवार को संगम में प्रवाहित किया जाएगा। अस्थि कलश को नीलाभ की पत्नी भूमिका और भतीजा श्वेताभ  दिल्ली  से लेकर आएंगे। शाम को पांच बजे खुशरोबाग के पीछे स्थित उनके पैतृक आवास पर आर्य समाज विधि से हवन होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed