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मेडिकल कॉलेजोें के पीजी कोर्स में नए सिरे से काउंसलिंग कराने का आदेश

Tue, 30 May 2017 01:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Tue, 30 May 2017 01:59 AM IST
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Medical colleges to get fresh counsel in PG course
अदालत
हाईकोर्ट ने प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों के पीजी कोर्स में राज्य कोटे की सीटों पर नीट की मेरिट के आधार पर नए सिरे से काउंसलिंग कराकर प्रवेश सूची जारी करने का आदेश दिया है। पूर्व में कराई गई काउंसलिंग में अनियमितता की शिकायत को लेकर हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई थीं। कोर्ट ने इन शिकायतों को सही पाते हुए प्रदेश सरकार द्वारा दाखिलों के लेकर जारी सभी परिपत्र रद्द कर दिए हैं। राज्य कोटे की पचास प्रतिशत सीटों पर 30 और 31 मई को काउंसलिंग कराने के लिए मुख्य सचिव को परिपत्र जारी करने का निर्देश दिया है। कोर्ट के इस आदेश से पूर्व में कराई गई काउंसलिंग रद्द हो जाएगी।
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कोर्ट ने यह भी कहा है कि जिन छात्रों ने दाखिले ले लिए हैं, वह यदि दुबारा काउंसलिंग की मेरिट में आते हैं तो उनकी फीस समायोजित कर ली जाए। कोर्ट ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय द्वारा अलग कोटा बनाकर अपने ही एमबीबीएस छात्रों का पीजी कोर्स में दाखिला लेने की छूट संबंधी आदेश भी रद्द कर दिया है। दोनों कॉलेजों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
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नमिता निरंजन सहित दर्जनों अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति पीसी त्रिपाठी की पीठ सुनवाई कर रही है। याची के अधिवक्ता सुधीर कुमार चंद्रौल का कहना था कि नीट के जरिए मेडिकल कॉलेजों में पीजी कोर्स में दाखिले के लिए राज्यों को अपने यहां उपलब्ध कुल सीटों (राजकीय कालेजों और प्राइवेट को मिलाकर) की 50 प्रतिशत सीटों पर अपने राज्य के छात्रों का दाखिला लेने की छूट दी गई है।
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शेष 50 प्रतिशत दाखिले केंद्र द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची पर लिए जाएंगे। राज्य सरकार ने अपने कोटे की सीटों पर दाखिले के लिए आयोजित काउंसलिंग में काफी गड़बड़ी और भेदभाव किया है। कॉमन मेरिट के आधार पर काउसंलिग के जरिए सीटों को भरने के बजाए बीएचयू और एएमयू जैसे संस्थानों को आंतरिक कोटा बनाकर अपने ही छात्रों का दाखिला लेने की छूट दे दी गई जोकि भेदभाव पूर्ण है। कोर्ट ने इस मामले में मुख्य सचिव से हलफनामा मांगा था। मुख्य सचिव ने हलफनामा दाखिल कर बताया कि प्रवेश में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाएगा।
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