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बसपा ने खेला दलित, मुस्लिम कार्ड

Sat, 18 Feb 2017 01:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sat, 18 Feb 2017 01:42 AM IST
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
बसपा चुनावी सभाओं में लगने वाले नारे ‘अब करो विजय की तैयारी, निश्चित है जीत हमारी’ को मूर्त रूप देने के लिए दलितों के साथ मुस्लिम समाज का हित साधने की जमकर वकालत रही है। पार्टी अध्यक्ष मायावती खुलकर मुस्लिम कार्ड भी खेल रहीं हैं। अल्पसंख्यकों की नीले झंडे के तले लाने के लिए खासकर मुस्लिमों से जुड़े हर छोटे-बड़े मुद्दे सलीके से उकेरे जा रहे हैं। मुस्लिमों को बताया जा रहा है कि भाजपा उनका हित साध नहीं सकती, सपा पारिवारिक कलह में उलझी है, ऐसे में बसपा उनके साथ खड़ी है। जरूरत है कि उनके वोट सही जगह पड़ें, यदि मुस्लिमों ने सपा को वोट दिया तो बेकार जाएगा और लाभ भाजपा को मिलेगा। बसपा के साथ वे आए तो प्रदेश में उनकी अपनी सरकार बनना तय है।
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सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय की बात करने वाली बसपा सुप्रीमो मायावती ने शुक्रवार को फतेहपुर और इलाहाबाद के सोरांव में हुई चुनावी सभा के भाषण में खुद को मुस्लिमों का हित रक्षक बताते हुए अल्पसंख्यकों के मामलों में केंद्र और प्रदेश सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि बसपा के दलित वोट एकजुट हैं, जरूरत अल्पसंख्यकों और उनमें खास मुस्लिमों के समर्थन की है। उन्होंने दमदारी से यह बात कही कि मुस्लिम समाज का समर्थन हासिल किए बिना कोई दल यूपी की सत्ता पर काबिज नहीं हो सकता। शायद यही कारण है कि मायावती ने कांग्रेस को अल्पसंख्यक समाज विरोधी पार्टी से गठबंधन का दोषी बताते हुए भाजपा पर आरएसएस का एजेंडा लागू करने का आरोप जड़ा।  
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पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि केंद्र में  पीएम नरेंद्र मोदी के रहते प्रदेश में सीएम अखिलेश यादव की सरकार में दलितों, आदिवासियों, पिछड़ी जाति के लोगों के साथ अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न किया गया। मुस्लिमों के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगा कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय व जामिया मीलिया विश्वविद्यालय का नाम बदल दिया गया। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और तीन तलाक मामले में केंद्र सरकार की दखलंदाजी चिंता की बात है। आतंकवाद के नाम पर मुस्लिम समाज को शक की निगाह से नहीं देखने की बात कही। बसपा अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र में भाजपा सरकार के रहते सच्चर आयोग की सिफारिशें लागू होना संभव नहीं है। मुस्लिम उत्पीड़न के कई मामले गिनाते हुए कहा किसी सर्वे से भ्रम में न पड़कर मुस्लिम अपनी ताकत पहचानें।
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