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केशरी देवी और रेखी सिंह के बीच समझौता से साधे कई सियासी समीकरण

Thu, 13 Aug 2020 01:17 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 13 Aug 2020 01:17 AM IST
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Many political equations close to the agreement between Keshari Devi and Rekhi Singh
prayagraj news - फोटो : prayagraj

जिला पंचायत अध्यक्ष रेखा सिंह और सांसद केशरी देवी पटेल के बीच जारी शीतयुद्ध को फिलहाल खत्म कराके भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने कई सियासी समीकरणों को साधने की कोशिश की है। समझौते की इस पूरी कवायद को 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का हस्तक्षेप और फिर जिस तरह से केशरी देवी पटेल के आवास पर समझौते को अंतिम रूप दिया गया, उससे साफ जाहिर है कि पार्टी किसी भी सूरत में बगावत और गुटबाजी को पनपने नहीं देना चाहती। 

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Many political equations close to the agreement between Keshari Devi and Rekhi Singh
prayagraj news - फोटो : prayagraj

प्रदेश में सरकार बनने के बाद कई जिलों में पंचायत अध्यक्षों और ब्लाक प्रमुखों ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए भाजपा का दामन थाम लिया है। ऐसे में शीर्ष नेतृत्व को आशंका रही कि यदि रेखा सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित हो गया तो अन्य स्थानों पर भी इस तरह की गुटबाजी शुरू हो सकती है। इस तरह से दोनों पक्षों में समझौता कराके इन आशंकाओं को खत्म करने की कोशिश की गई है।

इसके अलावा लंबे समय तक यह बहस भी छिड़ी रही कि रेखा सिंह और उनके पति पार्टी में हैं या नहीं। इससे गुटबाजी को और हवा मिल रही थी। जबकि, अशोक सिंह और केशरी देवी पटेल दोनों ही नेताओं की यमुनापार की राजनीति में प्रभावी दखलंदाजी है। केशरी देवी के पुत्र दीपक करछना से विधायक रह चुके हैं तो पूर्व ब्लाक प्रमुख अशोक सिंह की मांडा के अलावा मेजा की सियासत में मजबूत दखल है।

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prayagraj news - फोटो : prayagraj
इसलिए क्षेत्र से सांसद डॉ. रीता बहुगुणा जोशी समेत अन्य नेताओं की पूरी कोशिश रही कि इन दोनों नेताओं को एक मंच पर लाकर यमुनापार में पार्टी को मजबूत करने के साथ जातीय समीकरण भी साधा जा सके। इसके अलावा भाजपा को जिले में ठाकुर चेहरे की लंबे समय से तलाश है। अशोक सिंह और रेखा सिंह की इंट्री को पार्टी के इसी रणनीति का हिस्सा के रूप में भी देखा जा रहा है। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि अब देखना होगा कि अशोक सिंह और रेखा सिंह ने जिस सहारे को पकड़कर पार्टी में प्रवेश किया है, वह कितना मजबूत होता है। 

भविष्य की सियासत पर असमंजस बरकरार

केशरी देवी और रेखा सिंह को एक साथ बैठाकर पार्टी ने फिलहाल तो गतिरोध दूर कर दिया है, लेकिन भविष्य को लेकर अब भी असमंजस बरकरार है। रेखा सिंह का कार्यकाल अब सिर्फ पांच महीने बचा है। यानी, पंचायत के अन्य पदों के साथ अध्यक्ष के लिए भी चुनाव जल्द ही संभावित है। इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर आरक्षण के अंतर्गत बदलाव भी संभावित है। इसलिए इस पद को लेकर सियासत का अंतिम तौर पर पटाक्षेप नहीं हुआ है।
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