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मांगा आम मिला आंवला का पौधा
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Mangla plant found mango
कीर्तिमान स्थापित करने को बच्चों में दिखा जोश
0 परेड मैदान में सुबह से ही स्कूल ड्रेस में कतारबद्ध रहे विद्यार्थी
प्रयागराज। परेड मैदान में विश्व कीर्तिमान का हिस्सा बनने के लिए पहुंचे स्कूली बच्चों में खासा जोश दिखा। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सुबह छह बजे से ही बच्चे स्कूली ड्रेस में परेड मैदान में पहुंचने लगे थे। जैसे-जैसे वक्त बीता, भीड़ बढ़ती गई। और इसके साथ ही बच्चों का उत्साह भी। आठ बजे के बाद शहरियों ने भी परेड मैदान का रुख किया।
परेड मैदान पर शहर ही नहीं गांव देहात के बच्चे भी पहुंचे थे। विश्व कीर्तिमान में अपनी हिस्सेदारी को लेकर सभी में ललक दिखी। आठ बजे के बाद जब पौध वितरण का कार्यक्रम शुरू हुआ तो बच्चों में अपनी पसंद के पौधे लेने की होड़ लग गई। बच्चों के साथ शहरियों में जबरदस्त उत्साह रहा। परेड की ओर जाने वाले रास्तों पर बिना मेला के भीड़ दिन भर बनी रही। ऐसे बच्चों की संख्या हजारों में रही जो अपनी-अपनी साइकिल से कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे। उन्होंने पहले लाइन लगाकर पौधे लिए फिर किताब-कांपियों के साथ पौधों को रखा और पीठ की तरफ पिट्ठू बैग टांगकर घर की ओर चल दिए।
सुबह आठ बजे से शुरू होने वाला कार्यक्रम गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड टीम के न आने से करीब बीस मिनट देर से शुरू हुआ। यहां पहला पौधा कमिश्नर डॉ. आशीष गोयल ने पत्नी सलोनी गोयल के साथ प्राप्त किया। जिलाधिकारी भानुचंद्र गोस्वामी के साथ जिले के अन्य अफसर पौधा लेकर इस पौध वितरण कार्यक्रम के साक्षी बने। इस मौके पर पर्यटन विभाग के अफसरों संग वन विभाग के प्रमुख संरक्षक पवन कुमार, पीके शर्मा के साथ मुकेश कुमार, मिशन निदेशक विभाष रंजन, डीएफओ वाईके शुक्ला आदि मौजूद रहे।
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अनुशासन की बने मिसाल
पॉर्किंग पर बसों के रुकते ही शिक्षकों के निर्देश पर कतारबद्ध होकर पौध वितरण स्थल तक पहुंचे। देखने वाले भी चकित थे कि स्कूलों में हुड़दंग करने वाले अनुशासन की मिसाल बने थे। पौधे लेकर फिर एक सीध में लाइन बनाकर बसों की तरफ जाते बच्चे पौधों को रोपने और उनकी देखरेख करने की बात करते सुने गए।
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मांगा आम, मिला आंवला का पौधा
0 स्कूली बच्चों में दिखा उत्साह, फूल के पौधे थे हर दूसरे बच्चे की मांग
प्रयागराज। विश्व कीर्तिमान का हिस्सा बनने गए हजारों बच्चों में अधिकांश मनपसंद के पौधे मांगते दिखे। शहरी बच्चों की पहली पसंद फूल के पौधे रहे, लेकिन उनके वितरण की व्यवस्था ही नहीं थी। वहीं जिले भर के ग्रामीण इलाकों से आए बच्चों में फलों के पौधे लेने की उत्सुकता रही।
कार्यक्रम स्थल पर किसी ने आम का पौधा मांगा तो उसे आंवला मिला। किसी ने नीबू या इमली का पौधा मांगा तो उसे शीशम और सागौन का पौधा दिया गया। ऐसे बच्चों की संख्या कम रही, जिन्हें पसंद के पौधे मिले हो, बावजूद इसके उनके उत्साह में कमी नहीं आई। कुछ बच्चे आपस में बात करते रहे कि घर में क्यारी या बागीचा है नहीं, हम ऐसे स्थान पर पौधा रोपेंगे, जहां उनकी देखभाल कर सकें।
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14 काउंटरों पर लगी थीं 28 कतारें
पौध वितरण स्थल पर विश्व कीर्तिमान के लिए घोषित मानकों के मुताबिक हर स्तर पर लिखापढ़ी की जा रही थी। इसके लिए कुल 14 काउंटर बनाए गए थे। जहां 28 लाइनों में लगे स्कूली बच्चे और शहरियों संग आम लोग अपनी बारी आने की प्रतिक्षा करते रहे। मौके पर हर पौधे में टैगिंग की गई थी। पौधा लेने वाले को बार कोड दिया जा रहा था। पावती वहां रखे गए डिब्बों (मतदान पेटी) में डालना जरूरी था। इसी प्रक्रिया के तहत पौध वितरण की गणना की गई थी।
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0 परेड मैदान में सुबह से ही स्कूल ड्रेस में कतारबद्ध रहे विद्यार्थी
प्रयागराज। परेड मैदान में विश्व कीर्तिमान का हिस्सा बनने के लिए पहुंचे स्कूली बच्चों में खासा जोश दिखा। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सुबह छह बजे से ही बच्चे स्कूली ड्रेस में परेड मैदान में पहुंचने लगे थे। जैसे-जैसे वक्त बीता, भीड़ बढ़ती गई। और इसके साथ ही बच्चों का उत्साह भी। आठ बजे के बाद शहरियों ने भी परेड मैदान का रुख किया।
परेड मैदान पर शहर ही नहीं गांव देहात के बच्चे भी पहुंचे थे। विश्व कीर्तिमान में अपनी हिस्सेदारी को लेकर सभी में ललक दिखी। आठ बजे के बाद जब पौध वितरण का कार्यक्रम शुरू हुआ तो बच्चों में अपनी पसंद के पौधे लेने की होड़ लग गई। बच्चों के साथ शहरियों में जबरदस्त उत्साह रहा। परेड की ओर जाने वाले रास्तों पर बिना मेला के भीड़ दिन भर बनी रही। ऐसे बच्चों की संख्या हजारों में रही जो अपनी-अपनी साइकिल से कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे। उन्होंने पहले लाइन लगाकर पौधे लिए फिर किताब-कांपियों के साथ पौधों को रखा और पीठ की तरफ पिट्ठू बैग टांगकर घर की ओर चल दिए।
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सुबह आठ बजे से शुरू होने वाला कार्यक्रम गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड टीम के न आने से करीब बीस मिनट देर से शुरू हुआ। यहां पहला पौधा कमिश्नर डॉ. आशीष गोयल ने पत्नी सलोनी गोयल के साथ प्राप्त किया। जिलाधिकारी भानुचंद्र गोस्वामी के साथ जिले के अन्य अफसर पौधा लेकर इस पौध वितरण कार्यक्रम के साक्षी बने। इस मौके पर पर्यटन विभाग के अफसरों संग वन विभाग के प्रमुख संरक्षक पवन कुमार, पीके शर्मा के साथ मुकेश कुमार, मिशन निदेशक विभाष रंजन, डीएफओ वाईके शुक्ला आदि मौजूद रहे।
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अनुशासन की बने मिसाल
पॉर्किंग पर बसों के रुकते ही शिक्षकों के निर्देश पर कतारबद्ध होकर पौध वितरण स्थल तक पहुंचे। देखने वाले भी चकित थे कि स्कूलों में हुड़दंग करने वाले अनुशासन की मिसाल बने थे। पौधे लेकर फिर एक सीध में लाइन बनाकर बसों की तरफ जाते बच्चे पौधों को रोपने और उनकी देखरेख करने की बात करते सुने गए।
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मांगा आम, मिला आंवला का पौधा
0 स्कूली बच्चों में दिखा उत्साह, फूल के पौधे थे हर दूसरे बच्चे की मांग
प्रयागराज। विश्व कीर्तिमान का हिस्सा बनने गए हजारों बच्चों में अधिकांश मनपसंद के पौधे मांगते दिखे। शहरी बच्चों की पहली पसंद फूल के पौधे रहे, लेकिन उनके वितरण की व्यवस्था ही नहीं थी। वहीं जिले भर के ग्रामीण इलाकों से आए बच्चों में फलों के पौधे लेने की उत्सुकता रही।
कार्यक्रम स्थल पर किसी ने आम का पौधा मांगा तो उसे आंवला मिला। किसी ने नीबू या इमली का पौधा मांगा तो उसे शीशम और सागौन का पौधा दिया गया। ऐसे बच्चों की संख्या कम रही, जिन्हें पसंद के पौधे मिले हो, बावजूद इसके उनके उत्साह में कमी नहीं आई। कुछ बच्चे आपस में बात करते रहे कि घर में क्यारी या बागीचा है नहीं, हम ऐसे स्थान पर पौधा रोपेंगे, जहां उनकी देखभाल कर सकें।
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14 काउंटरों पर लगी थीं 28 कतारें
पौध वितरण स्थल पर विश्व कीर्तिमान के लिए घोषित मानकों के मुताबिक हर स्तर पर लिखापढ़ी की जा रही थी। इसके लिए कुल 14 काउंटर बनाए गए थे। जहां 28 लाइनों में लगे स्कूली बच्चे और शहरियों संग आम लोग अपनी बारी आने की प्रतिक्षा करते रहे। मौके पर हर पौधे में टैगिंग की गई थी। पौधा लेने वाले को बार कोड दिया जा रहा था। पावती वहां रखे गए डिब्बों (मतदान पेटी) में डालना जरूरी था। इसी प्रक्रिया के तहत पौध वितरण की गणना की गई थी।