यूपी: उज्जैन की बैठक में महंत नरेंद्र गिरि बने थे अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष, इनकी देखरेख में ही कराया गया था 2019 का महाकुंभ

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 21 Sep 2021 04:32 AM IST

सार

सुसाइड नोट में लिखी बातें सामने आने के बाद कई सवाल उठ रहे हैं जिनका जवाब किसी के पास नहीं है। इन सवालों से सबसे ज्यादा घेरे में आनंद गिरि, बड़े हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या तिवारी व उनके बेटे संदीप तिवारी की भूमिका है। 
कुंभ में स्नान करते महंत नरेंद्र गिरि
कुंभ में स्नान करते महंत नरेंद्र गिरि - फोटो : amar ujala
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विस्तार

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और मठ बाघंबरी गद्दी के महंत नरेंद्र गिरि के नेतृत्व वाली अखाड़ा परिषद की देखरेख में ही वर्ष 2019 का प्रयागराज का महाकुंभ कराया गया था जिसमें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर श्रद्धालुओं का जमावड़ा हुआ था। दरअसल हरिद्वार कुंभ के बाद अखाड़ा परिषद को भंग मानते हुए बाघंबरी गद्दी में ही सात अखाड़ों की मौजूदगी में परिषद का चुनाव कराया गया था जिसमें निर्मल अखाड़े के सचिव श्रीमहंत बलवंत सिंह को अध्यक्ष और आनंद अखाड़े के श्रीमहंत शंकरानंद सरस्वती को महामंत्री चुना गया था। लेकिन, हरिद्वार कुंभ में परिषद के अध्यक्ष रहे श्रीमहंत ज्ञानदास और महामंत्री हरिगिरि इस चुनाव को लगातार अवैध मानते रहे। वहीं महंत बलवंत सिंह की अध्यक्षता वाली परिषद तेरह में से सात अखाड़ों की मौजूदगी के कारण अपने को वैध होने का दावा करती रही।
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नवंबर 2010 में मठ बाघंबरी गद्दी में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के चुनाव जुटे सभी तेरह अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की नई कार्यकारिणी का गठन किया। सर्वसम्मति से महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रवींद्र पुरी को अध्यक्ष और पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के सचिव महंत मोहनदास को महामंत्री चुना गया। प्रत्येक पदाधिकारी के नाम के प्रस्ताव को शेष बारह अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने अनुमोदित किया। लेकिन, कई प्रयासों के बावजूद वर्ष 2013 के प्रयाग महाकुंभ में भी इस पर आम सहमति नहीं बन सकी थी।


तकरीबन पांच वर्षों की लंबी कवायद के बाद अंतत: 14 मार्च 2015 को बड़ा उदासीन अखाड़े के उज्जैन स्थित आश्रम में हुई परिषद की बैठक में पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के सचिव और मठ बाघंबरी गद्दी के महंत नरेंद्र गिरि को सर्वसम्मति से अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष चुना गया। बड़ा उदासीन अखाड़े के श्रीमहंत रघुमुनि ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा जिसका महानिर्वाणी अखाड़े के श्रीमहंत प्रकाश पुरी ने समर्थन किया था। वहीं जूना अखाड़े के महंत हरिगिरि को दोबारा परिषद का महामंत्री चुना गया।

परिषद की बैठक में जूना अखाड़े के सचिव महंत नारायण गिरि, महंत उमाशंकर भारती, निरंजनी अखाड़े के महंत रामानंद पुरी, महंत आशीष गिरि, महानिर्वाणी के महंत प्रकाश पुरी, बड़ा उदासीन के श्रीमहंत महेश्वर दास, नया के महंत सर्वेश्वर मुनि, आनंद अखाड़े के महंत शंकरानंद सरस्वती, महंत सागरानंद सरस्वती, अटल अखाड़े के महंत उदय गिरि, आवाहन अखाड़े के महंत समुद्रगिरि, अग्नि अखाड़े के श्रीमहंत गोविंदानंद ब्रह्मचारी, निर्मल अखाड़े के महंत गोपालसिंह कोठारी और निर्मोही अनी के श्रीमहंत मदनमोहन दास ने अपना समर्थन व्यक्त किया। वहीं बैठक में शामिल न हो पाने की स्थिति में निर्वाणी अनी के श्रीमहंत धर्मदास और दिगंबर अनी के श्रीमहंत रामकृपाल दास ने फोन से अपना समर्थन जताया था।

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