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उत्तराधिकार का विवाद खत्म : बलवीर गिरि को मिलेगी महंत नरेंद्र गिरि की मठ बाघंबरी गद्दी

Wed, 29 Sep 2021 05:31 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 29 Sep 2021 05:31 PM IST
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Mahant Balveer Giri will get the throne of Mahant Narendra Giri Decision taken in  Akhara Parishad meeting
prayagraj : महंत नरेंद्र गिरि और महंत बलवीर गिरि। फाइल फोटो। - फोटो : prayagraj

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और मठ बाघंबरी गद्दी के महंत नरेंद्र गिरि की मौत के बाद उपजे मठ के महंत के उत्तराधिकार के मुद्दे का पटाक्षेप हो गया है। पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के पंचों, श्रीमहंतों की बैठक में उपमहंत बलवीर गिरि के नाम पर सहमति बन चुकी है। बस, इसकी औपचारिक घोषणा होनी बाकी है।

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‘अमर उजाला’ से बातचीत में निरंजनी अखाड़े के सचिव और मनसा देवी ट्रस्ट अध्यक्ष श्री महंत रवींद्र पुरी ने स्पष्ट किया कि पंच की आम सहमति के बाद बलवीर गिरि को मठ बाघंबरी गद्दी का महंत बनाया जाना तय हो गया है। लेकिन, बृहस्पतिवार को हरिद्वार में निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि की अध्यक्षता में होने वाली अखाड़े के पंच परमेश्वर की बैठक में बलवीर गिरि के नाम की औपचारिक घोषणा की जाएगी।

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Mahant Balveer Giri will get the throne of Mahant Narendra Giri Decision taken in  Akhara Parishad meeting
Prayagraj News : मठ बाघंबरी गद्दी। - फोटो : प्रयागराज
                                                                                                                                 
                                                

                                                                                                                                 
                                                महंत नरेंद्र गिरि ने भी अपने सुसाइड नोट में बलवीर गिरि को ही मठ का उत्तराधिकारी बनाते हुए उन्हें अपने क मरे की चाबी सौंपने की इच्छा व्यक्त की थी। लेकिन, उनकी मौत के बाद सुसाइड नोट पर ही सवाल उठने पर यह मामला लंबित हो गया था। 
                                                                                                                                 
                                                

                                                                                                                                 
                                                
                                                                                                                                 
                                                

                                                                                                                                 
                                                अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि, सचिव श्री महंत रवींद्र पुरी के अतिरिक्त अखाड़ा परिषद के महामंत्री और जूना अखाड़े के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत हरि गिरि ने भी सुसाइड नोट को फर्जी बताते हुए अस्वीकार कर दिया था।
                                                                                                                                 
                                                

                                                                                                                                 
                                                
                                                                                                                                 
                                                

                                                                                                                                 
                                                सुसाइड नोट पर सवाल उठने के बाद निरंजनी अखाड़े के उप महंत बलबीर गिरि ने भी स्वयं को उत्तराधिकार के मुद्दे से यह कहते हुए अलग कर लिया था कि मैं अभी मठ का उत्तराधिकारी नहीं हूं। अखाड़े के पंच परमेश्वर जिसे यह दायित्व सौपेंगे, वह मठ के महंत की जिम्मेदारी का निर्वाह करेगा।
                                                                                                                                 
                                                

                                                                                                                                 
                                                

Mahant Balveer Giri will get the throne of Mahant Narendra Giri Decision taken in  Akhara Parishad meeting
prayagraj : महंत बलवीर गिरि। - फोटो : prayagraj

वसीयत में दो बार लिखा था बलवीर का नाम
महंत नरेंद्र गिरि ने अपनी वसीयत में  बलवीर गिरि का दो बार जिक्र किया था। अपने उत्तराधिकारी को लेकर उन्होंने तीन बार वसीयतें बनवाईं। पहली बार 2010 में उत्तराधिकार को लेकर की गई वसीयत में शिष्य बलवीर गिरि को अपना उत्तराधिकारी बनाया था। लेकिन बलवीर गिरि के हरिद्वार में ही व्यस्त रहने के कारण उन्होंने 29 अगस्त वर्ष 2011 में दूसरी बार जब वसीयत तैयार कराई तो अपने शिष्य स्वामी आनंद गिरि को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया।

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Mahant Balveer Giri will get the throne of Mahant Narendra Giri Decision taken in  Akhara Parishad meeting
बाघंबरी मठ में अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी को श्रद्धांजलि देने के बाद संतों से चर्चा करते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : सोशल मीडिया

लेकिन, आनंद गिरि से दूरियां बढ़ने लगीं तो महंत नरेंद्र गिरि ने चार जून 2020 को अपनी पूर्व में तैयार कराई गई दोनों वसीयतों को निरस्त करते हुए तीसरी वसीयत तैयार कराई। इस तीसरी रजिस्टर्ड वसीयत में उन्होंने एक बार फिर यानी दोबारा बलवीर गिरि को ही मठ बाघंबरी का उत्तराधिकारी घोषित किया था। इस विवाद के बाद पंच परमेश्वर की बैठक भी स्थगित कर दी गई।

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Prayagraj News : मठ बाघंबरी गद्दी। - फोटो : प्रयागराज
वर्ष 2005 में ली थी संन्यास की दीक्षा
निरंजनी के उपमहंत बलबीर पुरी ने वर्ष 2005 में संन्यास की दीक्षा ली थी। इससे पहले उन्हें हरिद्वार में विल्केश्वर मंदिर की देखरेख की जिम्मेदारी दी गई थी। इस बीच कुंभ-2019 में महंत नरेंद्र गिरि ने बलवीर गिरि को हरिद्वार स्थित बिल्केश्वर मंदिर से प्रयागराज के मठ बाघंबरी बुला लिया गया था। वह बीते तीन वर्षों से महंत नरेंद्र गिरि के साथ मठ बाघंबरी गद्दी में ही रह रहे थे।
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