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Mahakumbh: चमत्कारिक विद्या नहीं, मैं तो लोगों से क्रियाएं कराता हूं; खास बातचीत में बोले मठाधिपति करौली शंकर
Thu, 16 Jan 2025 11:53 AM IST
शाहरुख खान
नीरज मिश्रा, अमर उजाला, प्रयागराज
नीरज मिश्रा, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 16 Jan 2025 11:53 AM IST
सार
महाकुंभ नगर में मिश्री मठ के मठाधिपति करौली शंकर से अमर उजाला ने खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि चमत्कारिक विद्या नहीं, मैं तो लोगों से क्रियाएं कराता हूं।
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करौली शंकर, मठाधिपति, मिश्री मठ हरिद्वार
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
रोगमुक्त मानव, शोकमुक्त मानव, नशामुक्त मानव, भयमुक्त मानव और ऋण मुक्त मानव। इन्हीं संकल्पों के साथ मिश्री मठ हरिद्वार के मठाधिपति करौली शंकर लोगों की जिंदगी बैलेंस कर रहे हैं।
करौली शंकर के देश- विदेश में लाखों भक्त हैं। महाकुंभ के संगम लोअर मार्ग सेक्टर 12 में उनका शिविर लगा है। यहां हर दिन संकल्प के साथ 15 घंटे अनुष्ठान चलता है। दूर-दूर से भक्त यहां अनुष्ठान कराने पहुंच रहे हैं। करौली शंकर ने बुधवार को अमर उजाला से विशेष बातचीत की।
• आपके जो दावे हैं, वह चमत्कार जैसे लगते हैं?
हमारे पास कोई चमत्कारिक विद्या नहीं है। हम सूक्ष्म और स्थूल की बात करते हैं। स्थूल को हम देख सकते हैं और सूक्ष्म को महसूस कर सकते हैं। इन्हीं सूक्ष्म तत्वों के जरिये हम लोगों की क्रिया कराते हैं। हमारे यहां ब्राह्मणों के द्वारा संकल्प और अनुष्ठान कराया जाता है।
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• आप अक्सर ओम शिव और बैलेंस कहते हैं, क्या है यह ?
ओम और शिव तो हर कोई जानता है। बिना शिव और बैलेंस के कुछ नहीं हो सकता है। अगर हाथ की उंगुलियों का संतुलन (बैलेंस) बिगड़ जाए तो आप परेशानी और दर्द में आ जाएंगे। इन्हें संतुलित रखने को ही बैलेंस कहते हैं। हम जब सूक्ष्म तत्वों से कोई चीज सही करते हैं, तो इनका संतुलन बनाने के लिए ऐसे शब्द बोलते हैं।
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करौली शंकर के देश- विदेश में लाखों भक्त हैं। महाकुंभ के संगम लोअर मार्ग सेक्टर 12 में उनका शिविर लगा है। यहां हर दिन संकल्प के साथ 15 घंटे अनुष्ठान चलता है। दूर-दूर से भक्त यहां अनुष्ठान कराने पहुंच रहे हैं। करौली शंकर ने बुधवार को अमर उजाला से विशेष बातचीत की।
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• आपके जो दावे हैं, वह चमत्कार जैसे लगते हैं?
हमारे पास कोई चमत्कारिक विद्या नहीं है। हम सूक्ष्म और स्थूल की बात करते हैं। स्थूल को हम देख सकते हैं और सूक्ष्म को महसूस कर सकते हैं। इन्हीं सूक्ष्म तत्वों के जरिये हम लोगों की क्रिया कराते हैं। हमारे यहां ब्राह्मणों के द्वारा संकल्प और अनुष्ठान कराया जाता है।
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• आप अक्सर ओम शिव और बैलेंस कहते हैं, क्या है यह ?
ओम और शिव तो हर कोई जानता है। बिना शिव और बैलेंस के कुछ नहीं हो सकता है। अगर हाथ की उंगुलियों का संतुलन (बैलेंस) बिगड़ जाए तो आप परेशानी और दर्द में आ जाएंगे। इन्हें संतुलित रखने को ही बैलेंस कहते हैं। हम जब सूक्ष्म तत्वों से कोई चीज सही करते हैं, तो इनका संतुलन बनाने के लिए ऐसे शब्द बोलते हैं।
• डीएनए कैसे तय करते हैं?
दरअसल, हम किसी व्यक्ति के कुल को डीएनए कहते हैं। व्यक्ति के कुल में अनेक व्यक्ति हो सकते हैं। इनके पुण्य और पाप एक दूसरे में स्थानांतरित होते रहते हैं। जिसके कारण अनेक परेशानियां आती हैं। हम संकल्प और अनुष्ठान के जरिये इसे सीमित करते हैं, ताकि दूसरे के मर्मों का फल किसी अन्य को न मिले।
दरअसल, हम किसी व्यक्ति के कुल को डीएनए कहते हैं। व्यक्ति के कुल में अनेक व्यक्ति हो सकते हैं। इनके पुण्य और पाप एक दूसरे में स्थानांतरित होते रहते हैं। जिसके कारण अनेक परेशानियां आती हैं। हम संकल्प और अनुष्ठान के जरिये इसे सीमित करते हैं, ताकि दूसरे के मर्मों का फल किसी अन्य को न मिले।
• क्या किसी की स्मृतियां नष्ट हो सकती हैं, मेडिकल साइंस तो ऐसा नहीं मानता ?
देखिए, स्मृतियां नष्ट हो सकती हैं। अगर व्यक्ति अच्छा सोचने लगे, तो उसके विचार बदल जाएंगे और स्मृतियां नष्ट हो जाएंगी। मेडिकल साइंस पूर्ण तो है नहीं। अच्छा आप बताइए, आयुर्वेद की कोई ऐसी दवा का नाम जानते हैं, जो बंद करनी पड़ी हो या कहा गया हो कि इसका जनरेशन बदल गया है। नहीं, न। एलोपैथी में आए दिन ऐसा हो रहा है। कोई न कोई दवा कभी किसी कमी के नाम पर तो कभी जनरेशन के नाम पर बदल दी जाती हैं या बंद कर दी जाती हैं। लेकिन सवाल तो यह है कि तब तक कितने लोग इन दवाओं को खा चुके होंगे। क्या होगा उन लोगों का। विश्व में आज भी फर्जी सर्जरी के आंकड़े बहुत ज्यादा हैं। इन्हें कम करना है।
देखिए, स्मृतियां नष्ट हो सकती हैं। अगर व्यक्ति अच्छा सोचने लगे, तो उसके विचार बदल जाएंगे और स्मृतियां नष्ट हो जाएंगी। मेडिकल साइंस पूर्ण तो है नहीं। अच्छा आप बताइए, आयुर्वेद की कोई ऐसी दवा का नाम जानते हैं, जो बंद करनी पड़ी हो या कहा गया हो कि इसका जनरेशन बदल गया है। नहीं, न। एलोपैथी में आए दिन ऐसा हो रहा है। कोई न कोई दवा कभी किसी कमी के नाम पर तो कभी जनरेशन के नाम पर बदल दी जाती हैं या बंद कर दी जाती हैं। लेकिन सवाल तो यह है कि तब तक कितने लोग इन दवाओं को खा चुके होंगे। क्या होगा उन लोगों का। विश्व में आज भी फर्जी सर्जरी के आंकड़े बहुत ज्यादा हैं। इन्हें कम करना है।