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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Mahakumbh Incident: Dead body not included among living people found, wandering in mortuary-hospital for six d

Mahakumbh Incident : मर्चरी से लेकर अस्पताल तक अपनों को खोज रहे परिजन, मौनी अमावस्या हादसे के बाद से हैं लापता

Thu, 06 Feb 2025 02:14 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज)
अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज) Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 06 Feb 2025 02:14 AM IST
सार

मध्य प्रदेश के सागर के रहने वाले अशोक पटेल इतना करते हुए फूट-फूट कर रोने लगे। वह उन उन लोगों में से हैं, जो मौनी अमावस्या के बाद से एक पल भी चैन की सांस नहीं ले सके हैं। हादसे वाली रात से गायक पिता की तलाश में वह पिछले सात दिनों से अस्पताल से मर्चरी और मर्चरी से अस्पताल का चक्कर काट रहे हैं।

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Mahakumbh Incident: Dead body not included among living people found, wandering in mortuary-hospital for six d
संगम घाट पर भगदड़ के बाद मौके पर पडे़ जूते चप्पल। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

छह दिन होय गै पिता को खोजत। वय जिंदा हैं याव मर गएओ, यऊ बताय वाला कोउ नाय। पुलिसवालन अस्पताल भेजत हैं अऊ डाक्टर मुरदाघर। इब कबव अस्पताल में जिंदन तो कतव मुरदाघर में मुरदन के बीच। इके बावजूद अब तक हमाए पिता का कोई पता नाय। कहां जाएं, का करयं।

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मध्य प्रदेश के सागर के रहने वाले अशोक पटेल इतना करते हुए फूट-फूट कर रोने लगे। वह उन उन लोगों में से हैं, जो मौनी अमावस्या के बाद से एक पल भी चैन की सांस नहीं ले सके हैं। हादसे वाली रात से गायक पिता की तलाश में वह पिछले सात दिनों से अस्पताल से मर्चरी और मर्चरी से अस्पताल का चक्कर काट रहे हैं। हर बीतते दिन के साथ अब पिता के मिलने की उम्मीदें के साथ उनकी खुद की हिम्मत भी जवाब देने लगी हैं। फिलहाल बची खुची हिम्मत के सहारे वह उन्हें तलाशने में दिन रात एक किए हुए हैं।

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साथ गए लोग आए लेकिन नहीं लौटे पिता

अशोक मूल रूप से मध्य प्रदेश के सागर जिले के गुंजोरा गांव के रहने वाले हैं। उनके 60 वर्षीय पिता तिजई पटेल मौनी अमावस्या पर गांव की ही 10-15 लोगों के साथ स्नान के लिए संगम पहुंचे थे। अशोक बताते हैं अगले दिन साथ गए गांव के लोग लौट आए लेकिन उनके पिता नहीं आए। पूछने पर बताया की मौनी अमावस्या की रात संगम में हुए हादसे के बाद से वह लापता हो गए। बहुत खोजा लेकिन उनका कुछ पता नहीं चला। इसके बाद वह खुद एक रिश्तेदार के साथ यहां आकर पिता को तलाश करने में जुट गए। छह दिन बीत चुके हैं लेकिन अब तक कुछ पता नहीं चल पाया। अशोक कहते हैं उन्हें कुछ नहीं चाहिए। बस उनके पिता सही सलामत मिल जाएं। शासन प्रशासन से हाथ जोड़कर यही मिन्नत करते हैं कि पिता को ढूंढने में उनकी मदद की जाए।

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