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Mahakumbh : एआई, रिस्ट बैंड व जीपीएस लोकेशन से होगी श्रद्धालुओं की गिनती, मेला प्रशासन ने तैयार किया खाका

Wed, 11 Dec 2024 12:52 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 11 Dec 2024 12:52 PM IST
सार

मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने बताया कि श्रद्धालुओं की गिनती के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। श्रद्धालुओं को ट्रैक करने के लिए मेला क्षेत्र के अंदर 200 स्थानों पर लगभग 744 अस्थायी सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। वहीं, शहर में 268 स्थानों पर 1107 स्थायी सीसीटीवी कैमरे लगे हैं।

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Mahakumbh: Counting of devotees will be done through AI, wristband and GPS location
प्रयागराज महाकुंभ। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

महाकुंभ में 45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। इतनी बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या का सही आकलन किया जा सके, इसके लिए तीन तकनीकों के माध्यम से हर एक श्रद्धालु की गिनती होगी। मेला प्रशासन ने इसके लिए खाका तैयार कर लिया है।

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मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने बताया कि श्रद्धालुओं की गिनती के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। श्रद्धालुओं को ट्रैक करने के लिए मेला क्षेत्र के अंदर 200 स्थानों पर लगभग 744 अस्थायी सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। वहीं, शहर में 268 स्थानों पर 1107 स्थायी सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। यही नहीं, 100 से अधिक पार्किंग स्थलों पर 720 सीसीटीवी कैमरे इंस्टॉल किए गए हैं। आई ट्रिपल सी और पुलिस लाइन कंट्रोल रूम के अतिरिक्त अरैल और झूंसी क्षेत्र में भी व्यूइंग सेंटर्स बनाए गए हैं। मैनेजमेंट रियल टाइम अलर्ट जनरेट करेगा, जिसके माध्यम से संबंधित अधिकारियों को श्रद्धालुओं की काउंटिंग और ट्रैकिंग करना आसान होगा।
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श्रद्धालु की बार-बार गिनती न हो, इसके लिए टर्न अराउंड साइकिल महत्वपूर्ण होगा। इसको ट्रैक करने के लिए कोचरंस फॉर्मूला तकनीक का उपयोग किया जाएगा। मुख्य पर्वों के अलावा अन्य दिनों में अनुमानित जनसंख्या 20 लाख और पर्वों पर 10 करोड़ लेते हुए सैंपल गिने जाते हैं।

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इन तीन विधियों से होगी गिनती

पहली विधि एट्रिब्यूट आधारित खोज होगी, इसमें पर्सन एट्रिब्यूट सर्च कैमरों के आधार पर ट्रैकिंग की जाएगी। दूसरी आरएफआईडी रिस्ट बैंड पर आधारित होगी। इसमें प्रमुख स्नान पर्वों के साथ महाकुंभ में प्रत्येक दिन आने वाले श्रद्धालुओं को रिस्ट बैंड प्रदान किए जाएंगे। पता चलेगा कि तीर्थयात्री ने मेला क्षेत्र में कितना समय बिताया, कितनी देर वह अंदर रहा और कितनी देर बाहर रहा। तीसरी विधि मोबाइल एप के द्वारा ट्रैकिंग की होगी, जिसमें तीर्थ यात्रियों की सहमति पर मोबाइल एप के जीपीएस के जरिये उनकी लोकेशन ट्रैक की जा सकेगी।

तड़के तीन से शाम सात बजे तक एक्टिव रहेगा सिस्टम

महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं की गिनती के लिए कैमरे हर मिनट डाटा अपडेट करेंगे। पूरा फोकस घाट पर आने वाले श्रद्धालुओं पर होगा। यह सिस्टम तड़के तीन बजे से शाम सात बजे तक पूरी तरह एक्टिव रहेगा। यही स्नान का प्रमुख समय माना गया है। इससे पहले माघ मेला के दौरान भी इन विधियों का उपयोग किया गया था। इसके माध्यम से लोगों की संख्या का 95 फीसदी तक सटीक अनुमान लगाया जा सकता है।

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