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अर्द्धकुंभ के लिए मेलाधिकारी, एसएसपी तत्काल नियुक्त हों
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 11 Sep 2017 01:27 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की रविवार को मठ बाघम्बरी में हुई बैठक में फर्जी संतों की लिस्ट जारी करने के साथ ही अर्द्ध कुंभ की तैयारियों को लेकर 15 प्रस्ताव पारित किए गए। इस दौरान परिषद ने शासन से मांग की कि इलाहाबाद का नाम प्रयागराज किया जाए, जिससे शहर की पुरानी पहचान दोबारा लौट सके। संतों ने इसे सरकारी अभिलेखों में दर्ज कराने की भी मांग की है।
परिषद की बैठक में सदस्यों ने कहा कि अर्द्ध कुंभ में दुनिया भर से करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु आएंगे। उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो इसके लिए प्रशासन को अपनी तैयारियों तेज कर देनी चाहिए। आयोजन को लेकर होने वाले स्थायी निर्माण भी शुरू हो जाने चाहिए। अर्द्ध कुंभ की सुचारु व्यवस्था के लिए मेलाधिकारी, एसएसपी की तत्काल नियुक्ति हो। मेला क्षेत्र से नजदीक पार्किंग बनो और वहां से मेले में पहुंचाने के लिए मुफ्त व्यवस्था कराई जाए। इस दौरान कहा गया कि जो अखाड़े अलग से निर्माण कराना चाहें, उसकी भी अनुमति दी जाए। पेशवाई के मार्ग में हुए अवैध निर्माण को हटाया जाए। मेले के दौरान प्रदेश भर में टोल टैक्स माफ करने, साधु-संतों, महामंडलेश्वरों एवं आचार्य महामंडलेश्वरों को खाद्य सामग्री चीनी, चावल आदि तुरंत मुहैया कराने का भी प्रस्ताव रखा गया। सोशल मीडिया पर साधु-संतों एवं गणमान्य नेताओं पर हो रही टिप्पणियों पर अंकुश लगाने, सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ ही यमुना किनारे अकबर के किले को सेना के अधिकार से अविलंब खाली कराने को कहा गया। परिषद ने अर्द्ध कुंभ से पहले प्रयागराज में एयरपोर्ट का निर्माण पूरा करने को भी कहा।
बैठक की अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने अध्यक्षता की। संचालन महामंत्री और जूना अखाड़े के श्रीमहंत हरि गिरि ने किया। बैठक में श्रीमहंत गोविंदानंद ब्रह्मचारी, महंत सोमेश्वरानंद ब्रह्मचारी अग्नि अखाड़ा, श्रीमहंत आशीष गिरि निरंजनी अखाड़ा, श्रीमहंत रामसेवक गिरि सचिव महानिर्वाणी श्रीमहंत प्रेम गिरि, श्रीमहंत विद्यानंद सरस्वती जूना अखाड़ा, महंत शंकरानंद सरस्वती, श्रीमहंत लक्ष्मण भारती आनंद अखाड़ा, श्रीमहंत सत्य गिरि, महंत अवधूत गिरि आवाहन अखाड़ा, श्रीमहंत धर्मदास, नंदरामदास निर्वाणी, श्रीकृष्ण दास, वैष्णव दास दिगंबर अनी, महंत राजेंद्र दास निर्मोही अनी, महंत अग्रदास, व्यास मुनि बड़ा उदासीन, महंत भगतराम, महंत जगतार मुनि नया उदासीन, महंत रामसेवक अटल अखाड़ा, महंत देवेंद्र सिंह शास्त्री निर्मल अखाड़ा उपस्थित थे।
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अखाड़ा परिषद द्वारा जारी फर्जी संतों की लिस्ट में अपना नाम देख अखिल भारतीय दंडी संन्यासी प्रबंधन समिति के प्रवक्ता आचार्य कुशमुनि ने विरोध जताया है। कहा कि अखाड़ा परिषद को उन्हें फर्जी बताने को कोई अधिकार नहीं है। वह ऋषि परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। उनकी मानहनि हुई है। इसके लिए वह अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने सबसे फर्जी शंकराचार्यों पर कार्रवाई की। अप्रैल माह में जूना अखाड़े के मौजगिरि आश्रम में अखाड़ा परिषद की बैठक हुई। इसमें परिषद के सदस्यों ने भूमापीठाधीश्वर स्वामी अच्युतानंद की ओर से स्वयं को शंकराचार्य घोषित करने की निंदा करते हुए सर्वसम्मति से उसे अमान्य करार दे दिया। साथ ही उनके अभिषेक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए और इलाहाबाद आगमन पर अखाड़ों के बारे में अमर्यादित बयान देने के लिए काशी सुमेरूपीठाधीश्वर स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती से लिखित माफी मांगने को कहा गया। रविवार को मठ बाघम्बरी में हुई बैठक में अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि अर्द्धकुंभ मेले में किसी भी फर्जी शंकराचार्य को संगम की रेती पर प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा, वह चाहे तो संत, कल्पवासी के रूप में अपनी धार्मिक आस्थाओं का निर्वाह कर सकता है। महामंत्री महंत हरि गिरि ने कहा कि आदि शंकराचार्य की ओर से स्थापित देश में कुल चार ही पीठ हैं और सभी पीठों पर सनातन धर्म की मान्यता और परंपरा के अनुसार शंकराचार्य विराजमान हैं। अखाड़ा परिषद उन्हीं का स्वागत करेगी।
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परिषद की बैठक में सदस्यों ने कहा कि अर्द्ध कुंभ में दुनिया भर से करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु आएंगे। उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो इसके लिए प्रशासन को अपनी तैयारियों तेज कर देनी चाहिए। आयोजन को लेकर होने वाले स्थायी निर्माण भी शुरू हो जाने चाहिए। अर्द्ध कुंभ की सुचारु व्यवस्था के लिए मेलाधिकारी, एसएसपी की तत्काल नियुक्ति हो। मेला क्षेत्र से नजदीक पार्किंग बनो और वहां से मेले में पहुंचाने के लिए मुफ्त व्यवस्था कराई जाए। इस दौरान कहा गया कि जो अखाड़े अलग से निर्माण कराना चाहें, उसकी भी अनुमति दी जाए। पेशवाई के मार्ग में हुए अवैध निर्माण को हटाया जाए। मेले के दौरान प्रदेश भर में टोल टैक्स माफ करने, साधु-संतों, महामंडलेश्वरों एवं आचार्य महामंडलेश्वरों को खाद्य सामग्री चीनी, चावल आदि तुरंत मुहैया कराने का भी प्रस्ताव रखा गया। सोशल मीडिया पर साधु-संतों एवं गणमान्य नेताओं पर हो रही टिप्पणियों पर अंकुश लगाने, सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ ही यमुना किनारे अकबर के किले को सेना के अधिकार से अविलंब खाली कराने को कहा गया। परिषद ने अर्द्ध कुंभ से पहले प्रयागराज में एयरपोर्ट का निर्माण पूरा करने को भी कहा।
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बैठक की अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने अध्यक्षता की। संचालन महामंत्री और जूना अखाड़े के श्रीमहंत हरि गिरि ने किया। बैठक में श्रीमहंत गोविंदानंद ब्रह्मचारी, महंत सोमेश्वरानंद ब्रह्मचारी अग्नि अखाड़ा, श्रीमहंत आशीष गिरि निरंजनी अखाड़ा, श्रीमहंत रामसेवक गिरि सचिव महानिर्वाणी श्रीमहंत प्रेम गिरि, श्रीमहंत विद्यानंद सरस्वती जूना अखाड़ा, महंत शंकरानंद सरस्वती, श्रीमहंत लक्ष्मण भारती आनंद अखाड़ा, श्रीमहंत सत्य गिरि, महंत अवधूत गिरि आवाहन अखाड़ा, श्रीमहंत धर्मदास, नंदरामदास निर्वाणी, श्रीकृष्ण दास, वैष्णव दास दिगंबर अनी, महंत राजेंद्र दास निर्मोही अनी, महंत अग्रदास, व्यास मुनि बड़ा उदासीन, महंत भगतराम, महंत जगतार मुनि नया उदासीन, महंत रामसेवक अटल अखाड़ा, महंत देवेंद्र सिंह शास्त्री निर्मल अखाड़ा उपस्थित थे।
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अखाड़ा परिषद द्वारा जारी फर्जी संतों की लिस्ट में अपना नाम देख अखिल भारतीय दंडी संन्यासी प्रबंधन समिति के प्रवक्ता आचार्य कुशमुनि ने विरोध जताया है। कहा कि अखाड़ा परिषद को उन्हें फर्जी बताने को कोई अधिकार नहीं है। वह ऋषि परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। उनकी मानहनि हुई है। इसके लिए वह अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने सबसे फर्जी शंकराचार्यों पर कार्रवाई की। अप्रैल माह में जूना अखाड़े के मौजगिरि आश्रम में अखाड़ा परिषद की बैठक हुई। इसमें परिषद के सदस्यों ने भूमापीठाधीश्वर स्वामी अच्युतानंद की ओर से स्वयं को शंकराचार्य घोषित करने की निंदा करते हुए सर्वसम्मति से उसे अमान्य करार दे दिया। साथ ही उनके अभिषेक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए और इलाहाबाद आगमन पर अखाड़ों के बारे में अमर्यादित बयान देने के लिए काशी सुमेरूपीठाधीश्वर स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती से लिखित माफी मांगने को कहा गया। रविवार को मठ बाघम्बरी में हुई बैठक में अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि अर्द्धकुंभ मेले में किसी भी फर्जी शंकराचार्य को संगम की रेती पर प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा, वह चाहे तो संत, कल्पवासी के रूप में अपनी धार्मिक आस्थाओं का निर्वाह कर सकता है। महामंत्री महंत हरि गिरि ने कहा कि आदि शंकराचार्य की ओर से स्थापित देश में कुल चार ही पीठ हैं और सभी पीठों पर सनातन धर्म की मान्यता और परंपरा के अनुसार शंकराचार्य विराजमान हैं। अखाड़ा परिषद उन्हीं का स्वागत करेगी।