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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Magh Mela will be settled in 600 hectares on the sands of Sangam, area decreased by 40 hectares than last time

Magh Mela Prayagra : संगम की रेती पर छह सौ हेक्टेयर में बसेगा माघ मेला, पिछली बार अपेक्षा 40 हेक्टेयर घटा रकबा

Mon, 21 Nov 2022 10:21 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 21 Nov 2022 10:21 PM IST
सार

भूमि का रकबा कम पड़ने की वजह से सेक्टर दो में बसाई जाने वाली कई संस्थाओं को दूसरी जगहों पर शिफ्ट करने के अलावा कोई चारा नहीं है। ऐसे में साधु-संतों को गंगा पार झूंसी की ओर बसाया जाएगा।

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Magh Mela will be settled in 600 hectares on the sands of Sangam, area decreased by 40 hectares than last time
Prayagraj News : माघ मेला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गंगा की कटान और दलदल की वजह से इस बार माघ मेले का रकबा पिछली बार की तुलना में इस बार 40 हेेक्टेयर घट गया है। पिछली बार 640 हेक्टेयर में मेला बसाया गया था। जबकि, इस बार छह सौ हेक्टेयर भूमि ही उपलब्ध हो सकी है। भूमि का रकबा कम पड़ने की वजह से सेक्टर दो में बसाई जाने वाली कई संस्थाओं को दूसरी जगहों पर शिफ्ट करने के अलावा कोई चारा नहीं है। ऐसे में साधु-संतों को गंगा पार झूंसी की ओर बसाया जाएगा।

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इस पार बसने वाली कई बड़ी आध्यात्मिक संस्थाओं की भूमि इस बार गंगा की कटान में समा गई है। सर्वे के बाद मेले का ले आउट तैयार कर लिया गया है। इस बार छह सौ हेक्टेयर भूमि पर माघ मेला बसाया जाएगा। संगम की रेती पर संतों-भक्तों के समागम के रूप में माघ मेला बसाने के लिए भूमि समतलीकरण के साथ ही मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए मेला प्रशासन ने पसीना बहाना शुरू कर दिया है।

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गंगा की कटान की वजह से इस बार सेक्टर, तीन, चार और पांच में अधिक भूमि आवंटित की जाएगी। ऐसे में बड़ी आध्यात्मिक, सांस्कृतिक संस्थाओं को गंगा पार भेजा जाएगा। इसके लिए भूमि समतलीकरण तेज कर दिया गया है। राजस्व टीम की ओर से कराए गए सर्वे के आधार पर माघ मेले का ले आउट तैयार कर लिया गया है।

इस बार पांच सेक्टर में छह सौ हेक्टेयर भूमि पर माघ मेला बसाया जाएगा। इसके लिए मूलभूत सुविधाओं के लिए प्रयास तेज कर दिए गए हैं। हालांकि छह जनवरी को ही माघ मेले का पहला स्नान है। ऐसे में महीने भर ही समय अब तैयारियों के लिए शेष रह गया है। जिस तरह काम हो रहा है, उससे कहा जा रहा है कि समय रहते इंतजामों को पूरा कर पाना मेला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी।

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भूमि आवंटन दिसबंर के पहले हफ्ते में
माघ मेले के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया दिसंबर के पहले हफ्ते में शुरू होने की उम्मीद है। समूहों में बसने वाली आध्यात्मिक संस्थाओं में दंडीबाड़ा, आचार्यबाड़ा के अलावा खाक चौक को सबसे पहले भूमि आवंटित की जाएगी। इसके बाद तीर्थपुरोहितों की संस्था प्रयागवाल सभा के लिए भूमि आवंटन किया जाएगा।


माघ मेले की तैयारियां समय रहते पूरी कर ली जाएंगी। कटान की वजह से सर्वे में इस बार पिछले वर्ष की तुलना में भूमि कुछ कम मिली है। भूमि सर्वे के साथ ही मूलभूत सुविधाओं के लिए काम कराए जा रहे हैं। माघ मेले का स्वरूप तय कर लिया गया है। - संत कुमार, एसडीएम, मेला।

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