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देश छोड़कर आईं लेने संन्यास की दीक्षा
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद।
Updated Fri, 06 Jan 2017 01:19 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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भारतीय सनातन संस्कृति के प्रति अगाध प्रेम और आस्था ने ऐसा प्रभाव डाला कि कनाडा की नन समेत भारत की दो बेटियाें ने संन्यास की राह पकड़ ली। माघ मेला के त्रिवेणी मार्ग स्थित क्रियायोग संस्थान में बृहस्पतिवार को कनाडा मूल की लिंडा डेवलिन सहित दो भारतीय बेटियों सौम्या और वर्षा ने संन्यास की दीक्षा ली। संस्थान के शिविर में संस्थापक योगगुरु स्वामी योगी सत्यम ने इन्हें दीक्षा के साथ सन्यास के संस्कार दिए। अब ये तीनों आजीवन सन्यासी जीवन व्यतीत करते हुए संन्यास धर्म का पालन करेंगी।
माघ मेला क्षेत्र शिविर में परमहंस योगानंद के जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम में भारत और कनाडा मूल के साधकों के बीच तीनों ने संन्यास ग्रहण किया। दीक्षा के बाद तीनों ने ही क्रियायोग ध्यान को और सीखने, पढ़ने के साथ ही इसके प्रचार-प्रसार के लिए आजीवन समर्पित रहने का संकल्प भी लिया। ये तीनों बीते कई वर्षों से संस्थान से जुड़कर भारतीय सनातन संस्कृति को और करीब से जानने में जुटी थीं। कार्यक्रम का संयोजन-संचालन राधा माता सत्यम ने किया।
मैं कनाडा मूल की हूं और वहां एक चर्च में नन थीं। बीते एक दशक से क्रियायोग संस्थान के साथ जुड़कर साधना कर रही थी। इस दौरान कनाडा से आती-जाती रही। वर्ष की शुरुआत में मैंने सन्यास का निर्णय लिया। सन्यास की दीक्षा के साथ ही अब मेरा नामकरण स्वामी महेश्वरी माता सत्यम हो गया है। अब इसी नाम से जानी जाऊंगीं।
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0 स्वामी महेश्वरी माता सत्यम
(पूर्व नाम: लिंडा डेवलिन)
मैं मूल रूप से दिल्ली की रहने वाली हूं। मेरे माता-पिता कई वर्षों से क्रिया योग संस्थान से जुड़े हुए हैं। बीते एक वर्ष से क्रियायोग का प्रशिक्षण ले रही थी। क्रियायोग के प्रति आस्था और अनुराग के कारण ही सन्यास लेने का निर्णय लिया। सन्यास की दीक्षा के बाद मेरा नया नाम स्वामी महालक्ष्मी माता सत्यम हो गया है। अब आजीवन इसी नाम से संन्यास के पालन के साथ क्रियायोग का प्रचार करूंगी।
0 स्वामी महालक्ष्मी माता सत्यम
(पूर्व नाम: सौम्या)
मूल रूप से दिल्ली की रहने वाली हूं। मेरे अभिभावक कई वर्षों से संस्थान से जुड़े हुए हैं। बीते एक वर्ष से भारतीय सनातन संस्कृति के मूल सहित क्रियायोग का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हूं। इस दौरान मुझे इसके प्रति जुड़ाव और आस्था बढ़ी तो संन्यास की निर्णय ले लिया। संन्यास के बाद अब मुझे स्वामी प्रज्ञामाता सत्यम के नाम से जाना जाएगा।
0 स्वामी प्रज्ञामाता सत्यम
(पूर्व नाम: प्रज्ञा)
00
माघ मेला स्थित क्रियायोग शिविर में क्रियायोग ध्यान का कार्यक्रम प्रतिदिन दोपहर तीन से शाम छह बजे तक चलेगा। इसमें शास्त्रों की आध्यात्मिक विवेचना के साथ ही इसके प्रयोगात्मक स्वरूप को स्पष्ट किया जाएगा। झूंसी स्थित क्रियायोग आश्रम एवं अनुसंधान संस्थान के साधना हाल में भी सुबह साढ़े छह से आठ बजे तक योग शिविर चलेगा।
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माघ मेला क्षेत्र शिविर में परमहंस योगानंद के जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम में भारत और कनाडा मूल के साधकों के बीच तीनों ने संन्यास ग्रहण किया। दीक्षा के बाद तीनों ने ही क्रियायोग ध्यान को और सीखने, पढ़ने के साथ ही इसके प्रचार-प्रसार के लिए आजीवन समर्पित रहने का संकल्प भी लिया। ये तीनों बीते कई वर्षों से संस्थान से जुड़कर भारतीय सनातन संस्कृति को और करीब से जानने में जुटी थीं। कार्यक्रम का संयोजन-संचालन राधा माता सत्यम ने किया।
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मैं कनाडा मूल की हूं और वहां एक चर्च में नन थीं। बीते एक दशक से क्रियायोग संस्थान के साथ जुड़कर साधना कर रही थी। इस दौरान कनाडा से आती-जाती रही। वर्ष की शुरुआत में मैंने सन्यास का निर्णय लिया। सन्यास की दीक्षा के साथ ही अब मेरा नामकरण स्वामी महेश्वरी माता सत्यम हो गया है। अब इसी नाम से जानी जाऊंगीं।
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0 स्वामी महेश्वरी माता सत्यम
(पूर्व नाम: लिंडा डेवलिन)
मैं मूल रूप से दिल्ली की रहने वाली हूं। मेरे माता-पिता कई वर्षों से क्रिया योग संस्थान से जुड़े हुए हैं। बीते एक वर्ष से क्रियायोग का प्रशिक्षण ले रही थी। क्रियायोग के प्रति आस्था और अनुराग के कारण ही सन्यास लेने का निर्णय लिया। सन्यास की दीक्षा के बाद मेरा नया नाम स्वामी महालक्ष्मी माता सत्यम हो गया है। अब आजीवन इसी नाम से संन्यास के पालन के साथ क्रियायोग का प्रचार करूंगी।
0 स्वामी महालक्ष्मी माता सत्यम
(पूर्व नाम: सौम्या)
मूल रूप से दिल्ली की रहने वाली हूं। मेरे अभिभावक कई वर्षों से संस्थान से जुड़े हुए हैं। बीते एक वर्ष से भारतीय सनातन संस्कृति के मूल सहित क्रियायोग का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हूं। इस दौरान मुझे इसके प्रति जुड़ाव और आस्था बढ़ी तो संन्यास की निर्णय ले लिया। संन्यास के बाद अब मुझे स्वामी प्रज्ञामाता सत्यम के नाम से जाना जाएगा।
0 स्वामी प्रज्ञामाता सत्यम
(पूर्व नाम: प्रज्ञा)
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माघ मेला स्थित क्रियायोग शिविर में क्रियायोग ध्यान का कार्यक्रम प्रतिदिन दोपहर तीन से शाम छह बजे तक चलेगा। इसमें शास्त्रों की आध्यात्मिक विवेचना के साथ ही इसके प्रयोगात्मक स्वरूप को स्पष्ट किया जाएगा। झूंसी स्थित क्रियायोग आश्रम एवं अनुसंधान संस्थान के साधना हाल में भी सुबह साढ़े छह से आठ बजे तक योग शिविर चलेगा।