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Magh Mela 2024 : मलयेशिया-थाइलैंड में रहकर जड़ों से जुड़े, मौन डुबकी लगाने पहुंचे अप्रवासी
Fri, 09 Feb 2024 07:47 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 09 Feb 2024 07:47 PM IST
सार
गोरखपुर से दो दशक पहले बैंकाक गए बृजेश तिवारी अब वहीं के होकर रह गए हैं। उनके पिता रामेश्वर राम तिवारी और मां चंद्रकली तिवारी दोनों सेक्टर तीन में काली मार्ग पर कल्पवास कर रहे हैं।
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मौनी अमावस्या पर स्नान करने पहुंचे श्रद्धालु।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मौनी अमावस्या स्नान पर्व की डुबकी सात समंदर पार रहकर अपनी जड़ों से जुड़ने का जरिया बन गई है। वतन से दूर मलयेशिया, थाईलैंड और नेपाल में रहने वाले भी इस माघ मेले में मौन डुबकी लगाने पहुंचे हैं। वह अपनी संस्कृति और परंपरा से जुड़कर धन्य हो उठे हैं।
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गोरखपुर से दो दशक पहले बैंकाक गए बृजेश तिवारी अब वहीं के होकर रह गए हैं। उनके पिता रामेश्वर राम तिवारी और मां चंद्रकली तिवारी दोनों सेक्टर तीन में काली मार्ग पर कल्पवास कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को बृजेश भी बैंकाक से यहां डुबकी लगाने के पहुंचे। अमर उजाला से अपने भावों को साझा करते हुए वह भावुक हो जाते हैं। स्वर्णभूमि एयरपोर्ट से लगे लुमकाव के पास रजाई-गद्दे के होल सेल कारोबारी बृजेश यहां से संगम का जल और मिट्टी भी लेकर वहां जाएंगे।
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वह बताते हैं कि संगम पर मौन डुबकी का उन्हें इंतजार था। वह पिछले वर्ष ही यहां आने वाले थे, लेकिन संयोग न बन पाने की वजह से वह अवसर नहीं मिल सका था। वह कहते हैं कि संगम के अमृत जल के स्पर्श की कामना लेकर वह यहां आए हैं। उन्हें विश्वास है कि मां गंगा उनके जीवन के हर कष्ट और व्याधियों को हर लेंगी। इसी तरह मलयेशिया में कारोबार करने वाले कृपाशंकर शुक्ल भी मौन डुबकी लगाने के लिए पहुंचे हैं।
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उन्होंने प्रयागवाल सभा के महामंत्री रितुराज मिश्र से संपर्क कर पहले ही टेंट आरक्षित करा लिया था। वह मौनी अमावस्या पर एक रात कल्पवास के बाद सुबह डुबकी लगाकर हवन भी करेंगे। इसी तरह नेपाल के कपिलवस्तु से नवल किशोर पांडेय अपनी पत्नी और बच्चों के सात मौनी अमावस्या स्नान के लिए पहुंचे हैं। उनका मानना है कि संगम पर गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती की बूंदें नहीं साक्षात अमृत है, जो जीवन को कपट और क्लेश से मुक्त कर देता है। इनके अलावा नेपाल के ही लुंबिनी से आए धर्मात्मा त्रिपाठी भी शुक्रवार को मौन डुबकी लगाकर जीवन को धन्य बनाने आए हैं।
संगम पर लघु भारत की झलक
मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर देश के हर हिस्से से लोग पहुंच रहे हैं। कहीं कश्मीरी टोपी की झलक मिल रही है तो कहीं राजस्थानी घाघरा की छाप लोगों का ध्यान खींच रही है। पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर से आए सुशांतो भट्टाचार्य अपनी मां को संगम स्नान कराने आए हैं। वह सेक्टर पांच में ठहरे हुए हैं। इसी तरह बंगलूरू की बी. आकांक्षा अपनी नृत्यांगना पुत्री अशिमा को लेकर मौनी अमावस्या नहाने के लिए आई हैं। आकांक्षा संगम में डुबकी लगाने के बाद अयोध्या भी जाएंगी।