Magh Mela 2024 : रामानुजनगर बसाने के लिए आचार्यवाड़ा के संतों में बांटी गई सौ बीघा भूमि, आज से लगेंगे शिविर
माघ मेले मे भूमि बांटे जाने के बाद संतों ने सेक्टर पांच में ओल्डजीटी चौराहे के पास से मेला प्रशासन का कार्यालय हटाने के लिए एक बार फिर आवाज उठाई। आचार्यवाड़ा के संतों ने चेताया कि अगर कार्यालय इस बार भी उसी जगह बनाया गया तो आंलोदन छेड़ दिया जाएगा।
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संगम की रेती पर रामानुजनगर बसाने के लिए आचार्यबाड़ा के संतों के बीच सौ बीघा बीघा मंगलवार को बांटी गई। मेला प्रशासन से आचार्यवाड़ा के पदाधिकारियों ने 150 बीघा भूमि मांगी थी। इससे पहले प्रस्तावित रामानुजनगर में सोमवार की शाम चार बजे आचार्यवाड़ा के संतों ने सविधि मंत्रोच्चार के साथ भूमि पूजन किया था।
माघ मेले में भूमि बांटे जाने के बाद संतों ने सेक्टर पांच में ओल्डजीटी चौराहे के पास से मेला प्रशासन का कार्यालय हटाने के लिए एक बार फिर आवाज उठाई। आचार्यवाड़ा के संतों ने चेताया कि अगर कार्यालय इस बार भी उसी जगह बनाया गया तो आंलोदन छेड़ दिया जाएगा। समिति के कोषाध्यक्ष जगद्गुरु स्वामी घनश्यामाचार्य की तरफ से माघ मेला में आचार्यबाड़ा के शिविरों की पानी, बिजली सहित मूलभूत सुविधाओं के अलावा नई संस्थाओं अधिक भूमि आवंटित करने के लिए मेला प्रशासन से कहा गया। शिविरों को प्रशासन की ओर से मिलने वाली सुविधाओं में किसी भी तरह की हीलाहवाली न करने का आग्रह किया गया।
संतों ने कई दिक्कतों को गिनाया। उनका कहना था कि रेलवेे लाइन के किनारे से तीन गाटा भूमि दी जानी चाहिए। इसके अलावा भूमि को समतल बनाने के साथ ही गड्ढामुक्त किया जाना चाहिए, ताकि शिविर लगाने में संतों को किसी तरह की दिक्कतों का सामना न करना पड़े। भूमि आवंटन में जगद्गुरु वैंकटेशाचार्य, विष्णु प्रपन्नाचार्य, स्वामी श्रीनिवासाचार्य, स्वामी परांकुशाचार्य, स्वामी सुदर्शनाचार्य, स्वामी राम प्रपन्नाचार्य, स्वामी श्रीधराचार्य, महंत कुलशेखराचार्य,स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य समेत कई संत शामिल थे।
बसने लगे हैं संतों के शिविर
संगम की रेती पर भूमि आवंटन के बाद संतों के शिविर बसने लगे हैं। खाक चौक में महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा के अलावा मोरपंखी वाले बाबा और राममंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास के शिविर के लिए टिन घेरा तैयार कर लिया गया। उधर, दंडीवाड़ा में भी कई संतों के अन्नक्षेत्र और शिविर लगने आरंभ हो गए हैं। जबकि, बिजली-पेयजल की सुविधाएं अभी पूरी तरह से नहीं पहुंच पाई हैं।