Magh Mela 2023 : गंगा को मिली अस्पताल से छूुट्टी, एंबुलेंस का करना पड़ा घंटों इंतजार
माघ मेले के त्रिवेणी अस्पताल में जन्मी पहली नवजात बालिका गंगा को शनिवार को छूुट्टी दे दी गई। इस दौरान अस्पताल केडॉक्टरों और कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से बच्ची केपरिजनों को घंटों एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ा।
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माघ मेले के त्रिवेणी अस्पताल में जन्मी पहली नवजात बालिका गंगा को शनिवार को छूुट्टी दे दी गई। इस दौरान अस्पताल केडॉक्टरों और कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से बच्ची केपरिजनों को घंटों एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ा।
नवजात गंगा की मां आरती ने बताया कि दोपहर 12 बजे तक अस्पताल से छुट्टी मिल गई, लेकिन एंबुलेंस के अभाव में घंटों इंतजार करना पड़ा। उमा गुप्ता ने बताया कि छुट्टी मिलने के बाद उन्होंने नवजात के साथ गंगा स्नान और लेटे हनुमान का दर्शन किया।
उमा ने बताया कि मेला क्षेत्र के कई अधिकारी गंगा को देखने अस्पताल आए थे और उसके लालन-पालन केलिए कुछ आर्थिक मदद का भी आश्वासन दिया है। अस्पताल की अधीक्षक डॉ.अंकिता पांडेय ने जरूरी कागजात जमा कराए हैं और हरसंभव सहायता देने के लिए आधिकारियों से बातचीत भी की है।
दरअसल, शनिवार को मकर संक्रांति स्नान पर्व पर मेला क्षेत्र के संगम नोज पर त्रिवेणी अस्पताल के एंबुलेंस चालक और डॉक्टर से कुछ लोगों से झड़प हो गई। जिस वजह से सभी डॉक्टरों और कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार कर दिया। इसके बाद मेलाअधिकारी, सीएमओ, समेत आला आधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया।
संगम स्नान के समय महिला को हुई प्रसव पीड़ा,त्रिवेणी अस्पताल में उपचार के बाद रेफर
मकर संक्रांति स्नान पर्व के मौके पर संगम पर प्रसव पीड़ा होने पर एक महिला श्रद्धालु को एंबुलेंस से त्रिवेणी अस्पताल भर्ती में कराया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उसे स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल रेफर कर दिया गया है।
शंकरगढ़ से गंगा स्नान करने आई महिला श्रद्धालु सुमन को सुबह साढ़े छह बजे संगम नोज के पास प्रसव पीड़ा होने लगी। इसकी जानकारी मिलने पर भीड़ लग गई। कुछ देर बाद सिविल डिफेंस के वालेंटियर्स ने एंबुलेंस की मदद से उसे त्रिवेणी अस्पताल में भर्ती कराया।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. अंकिता पांडेय ने बताया कि महिला को प्रसव पीड़ा होने पर इलाज के लिए लाया गया था। जांच में पता चला कि गर्भ में शिशु अभी पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाया है। शिशु को पूरी तरह से विकसित होने में करीब 20 दिन का वक्त बाकी है। इस लिहाज से महिला की सेहत को ध्यान में रखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद उसे एसआरएन रेफर किया गया।