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Magh Mela : 11 वर्ष बाद मकर संक्रांति पर षटतिला एकादशी का महासंयोग, 14 जनवरी को स्नान का पुण्यकाल
Tue, 13 Jan 2026 06:36 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 13 Jan 2026 06:36 AM IST
सार
इस वर्ष मकर संक्रांति का पर्व ज्योतिषीय दृष्टिकोण से अत्यंत विशेष है। 14 जनवरी को 11 वर्षों के बाद मकर संक्रांति के साथ षटतिला एकादशी का महासंयोग बन रहा है। इससे पहले यह दुर्लभ योग वर्ष 2015 में बना था।
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माघ मेले में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इस वर्ष मकर संक्रांति का पर्व ज्योतिषीय दृष्टिकोण से अत्यंत विशेष है। 14 जनवरी को 11 वर्षों के बाद मकर संक्रांति के साथ षटतिला एकादशी का महासंयोग बन रहा है। इससे पहले यह दुर्लभ योग वर्ष 2015 में बना था। ऐसी मान्यता है कि यह महासंयोग सभी बिगड़े कार्यों को बनाने वाला और अविवाहित जातकों के लिए वरदान सिद्ध होने वाला है।
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ज्योतिषाचार्य कस्तूरी रॉय चौधरी कहती हैं कि मकर संक्रांति के दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस दिन गंगा, यमुना जैसी पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है।
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ऐसी मान्यता है कि इस दिन स्नान से मनुष्य के सभी पापों का शमन होता है और कार्मिक क्रियाएं सुव्यवस्थित होती हैं। 14 जनवरी को स्नान का शुभ मुहूर्त (पुण्यकाल) दोपहर 3:13 बजे से शाम 4:58 बजे तक रहेगा। षटतिला एकादशी भगवान विष्णु के प्रिय दिनों में से एक है।
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ज्योतिष गणना के अनुसार, एकादशी तिथि 13 जनवरी को दोपहर 3:17 बजे से शुरू होकर 14 जनवरी को शाम 5:52 बजे तक रहेगी। इसके अलावा 15 जनवरी को भी स्नान का पुण्यकाल है। इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग का भी दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस वर्ष 14 और 15 जनवरी दोनों दिन मकर संक्रांति मनाई जाएगी। 14 जनवरी को सूर्य का मकर राशि में प्रवेश होगा, और चंद्रमा वृश्चिक राशि में संचार करेंगे।
महासंयोग के दिन करने चाहिए कुछ विशेष कार्य
ज्योतिषाचार्य चौधरी के अनुसार, संक्रांति के दिन सुबह जल्दी उठकर नहाने के पानी में थोड़ी हल्दी डालनी चाहिए। भगवान विष्णु के मंदिर जाकर तिल और गुड़ का भोग लगाएं और तिल की रेवड़ियों को प्रसाद के रूप में वितरित करें। इस दिन श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करना बेहद शुभ होगा। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः का 108 बार जाप करना चाहिए।