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अदालत में झूठ बोलना माफिया उमेश सिंह को पड़ा महंगा, पांच लाख रुपये हर्जाना लगा
Tue, 15 Dec 2020 08:18 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 15 Dec 2020 08:18 PM IST
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मऊ के माफिया उमेश सिंह को हाईकोर्ट में अपना आपराधिक छिपा कर न्याय मांगना भारी पड़ गया। उस पर दर्ज मुकदमों की फेहरिस्त देखने के बाद कोर्ट ने उमेश सिंह की याचिका पांच लाख रुपये हर्जाने के साथ खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि अदालत में न्याय मांगने के लिए स्वच्छ ह्दय के साथ आना चाहिए। याची को अपनी बात साफगोई के साथ रखनी चाहिए थी। न कि तथ्य छिपाकर अदालत को गुमराह करने की कोशिश। उमेश सिंह की याचिका पर न्यायमूर्ति पंकज नकवी तथा न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई की।
जिलाधिकारी मऊ ने 21अक्तूबर 20 व 29 अक्तूबर 20 के आदेश से याची के खिलाफ गिरोहबंद अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए 300 टन कोयला सहित अन्य संपत्ति जब्त कर ली। जिसे यह कहते हुए चुनौती दी गई कि उसके खिलाफ केवल एक ही आपराधिक केस होने पर गिरोहबंद अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। उसे झूठा फंसाया गया है। डीएम के आदेशों को रद्द किया जाए।
सरकारी वकील ने इस पर आपत्ति करते हुए पूरक हलफनामे के जरिये याची का आपराधिक इतिहास प्रस्तुत किया। उस पर कई मुकदमे दर्ज हैं जिनका जिक्र याची ने नहीं किया था। सरकारी वकील का कहना था कि याची ने जानबूझकर झूठ बोला है। जब कि उसका आपराधिक इतिहास है। हत्या षड़यंत्र जैसे गंभीर अपराध में जेल भी जा चुका है ।
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और स्वयं को निर्दोष बता कर खुद को पीड़ित साबित करने की कोशिश कर रहा है। कोर्ट ने कहा कि याची ने जानबूझकर एक केस में झूठा फंसाने का बयान दिया और याचिका में सही तथ्यों का खुलासा नहीं किया। ऐसे में दंडित होना जरूरी है। कोर्ट ने पांच लाख हर्जाना लगाया है और कहा है कि यह राशि हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति में 30 दिन में जमा की जाए। यदि जमा नहीं की जाती तो महानिबंधक भूमि राजस्व की भांति वसूली करे।
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जिलाधिकारी मऊ ने 21अक्तूबर 20 व 29 अक्तूबर 20 के आदेश से याची के खिलाफ गिरोहबंद अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए 300 टन कोयला सहित अन्य संपत्ति जब्त कर ली। जिसे यह कहते हुए चुनौती दी गई कि उसके खिलाफ केवल एक ही आपराधिक केस होने पर गिरोहबंद अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। उसे झूठा फंसाया गया है। डीएम के आदेशों को रद्द किया जाए।
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सरकारी वकील ने इस पर आपत्ति करते हुए पूरक हलफनामे के जरिये याची का आपराधिक इतिहास प्रस्तुत किया। उस पर कई मुकदमे दर्ज हैं जिनका जिक्र याची ने नहीं किया था। सरकारी वकील का कहना था कि याची ने जानबूझकर झूठ बोला है। जब कि उसका आपराधिक इतिहास है। हत्या षड़यंत्र जैसे गंभीर अपराध में जेल भी जा चुका है ।
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और स्वयं को निर्दोष बता कर खुद को पीड़ित साबित करने की कोशिश कर रहा है। कोर्ट ने कहा कि याची ने जानबूझकर एक केस में झूठा फंसाने का बयान दिया और याचिका में सही तथ्यों का खुलासा नहीं किया। ऐसे में दंडित होना जरूरी है। कोर्ट ने पांच लाख हर्जाना लगाया है और कहा है कि यह राशि हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति में 30 दिन में जमा की जाए। यदि जमा नहीं की जाती तो महानिबंधक भूमि राजस्व की भांति वसूली करे।