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एलटी ग्रेड सहायक अध्यापक भर्ती : चयनित ओवरएज अभ्यर्थियों का रिजल्ट जारी करने का निर्देश
Wed, 11 Aug 2021 09:51 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 11 Aug 2021 09:51 PM IST
सार
कोर्ट का कहना था कि याचीगण 2016 का विज्ञापन जारी होने के समय अर्ह थे और चूंकि एक बार चयन प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी, इसलिए उनको आयु सीमा में छूट पाने का अधिकार है।
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allahabad high court
- फोटो : social media
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी माध्यमिक विद्यालयों में एलटी ग्रेड सहायक अध्यापक भर्ती 2018 में चयनित ऐसे अभ्यर्थियों का परीक्षा परिणाम जारी करने का निर्देश दिया है जो विज्ञापन जारी होते समय ओवरएज हो चुके थे। हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश से इन अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल करने का आदेश दिया था। मगर याचिका पर अंतिम निर्णय न होने के कारण इनका परिणाम आयोग ने जारी नहीं किया था। दिव्य प्रकाश मिश्र, रामकृष्ण शुक्ला सहित दर्जनों याचिकाओं पर न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने सुनवाई की।
याचीगण का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश पांडेय, नवीन कुमार शर्मा आदि का कहना था कि सहायक अध्यापक एलटी ग्रेड का विज्ञापन 19 दिसंबर 2016 को जारी किया गया। कुल 5342 पदों पर नियुक्ति होनी थी। पद हेतु आवेदन करने की न्यूनतम आयु सीमा 21 वर्ष और अधिकतम 40 वर्ष थी। विज्ञापन जारी होते समय याचीगण अर्ह थे। मगर बाद में नियम बदलते हुए सरकार ने भर्ती परीक्षा लोक सेवा आयोग से कराने का निर्णय लिया और 2016 का विज्ञापन रद्द कर दिया गया। इसके बाद 15 मार्च 2018 को नया विज्ञापन जारी किया गया, जिससे कई अभ्यर्थी 40 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा को पार कर गए और आवेदन के लिए ओवरएज हो गए।
याचिका में तर्क दिया गया कि चूंकि रिक्तियां सृजित होते समय और चयन प्रक्रिया प्रारंभ होते समय याचीगण अर्ह थे। मगर विज्ञापन निरस्त करने के कारण वह चयन में शामिल नहीं हो सके, इसलिए नए विज्ञापन में उनको आयु सीमा में छूट दी जाए। ऐसा न करने से याचीगण के नियुक्ति पाने और समानता के अधिकार का हनन होगा। कोर्ट ने अंतरिम आदेश के तहत याचीगण को आवेदन करने और चयन प्रक्रिया में शामिल होने की छूट दी थी। इसमें शामिल होने वाले कई ओवरएज अभ्यर्थी चयनित भी हो गए लेकिन उनका परिणाम जारी नहीं किया गया था।
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क्या कहा कोर्ट ने
कोर्ट का कहना था कि याचीगण 2016 का विज्ञापन जारी होने के समय अर्ह थे और चूंकि एक बार चयन प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी, इसलिए उनको आयु सीमा में छूट पाने का अधिकार है। कोर्ट ने चयनित ओवरएज अभ्यर्थियों का परिणाम जारी करने और यदि वे अन्य योग्यताएं पूरी करते हैं तो उनको नियुक्ति देने का निर्देश दिया। यह भी स्पष्ट किया कि यह सिर्फ मौजूदा मामले के लिए है तथा इसे भविष्य के लिए नजीर न माना जाए।
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याचीगण का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश पांडेय, नवीन कुमार शर्मा आदि का कहना था कि सहायक अध्यापक एलटी ग्रेड का विज्ञापन 19 दिसंबर 2016 को जारी किया गया। कुल 5342 पदों पर नियुक्ति होनी थी। पद हेतु आवेदन करने की न्यूनतम आयु सीमा 21 वर्ष और अधिकतम 40 वर्ष थी। विज्ञापन जारी होते समय याचीगण अर्ह थे। मगर बाद में नियम बदलते हुए सरकार ने भर्ती परीक्षा लोक सेवा आयोग से कराने का निर्णय लिया और 2016 का विज्ञापन रद्द कर दिया गया। इसके बाद 15 मार्च 2018 को नया विज्ञापन जारी किया गया, जिससे कई अभ्यर्थी 40 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा को पार कर गए और आवेदन के लिए ओवरएज हो गए।
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याचिका में तर्क दिया गया कि चूंकि रिक्तियां सृजित होते समय और चयन प्रक्रिया प्रारंभ होते समय याचीगण अर्ह थे। मगर विज्ञापन निरस्त करने के कारण वह चयन में शामिल नहीं हो सके, इसलिए नए विज्ञापन में उनको आयु सीमा में छूट दी जाए। ऐसा न करने से याचीगण के नियुक्ति पाने और समानता के अधिकार का हनन होगा। कोर्ट ने अंतरिम आदेश के तहत याचीगण को आवेदन करने और चयन प्रक्रिया में शामिल होने की छूट दी थी। इसमें शामिल होने वाले कई ओवरएज अभ्यर्थी चयनित भी हो गए लेकिन उनका परिणाम जारी नहीं किया गया था।
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क्या कहा कोर्ट ने
कोर्ट का कहना था कि याचीगण 2016 का विज्ञापन जारी होने के समय अर्ह थे और चूंकि एक बार चयन प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी, इसलिए उनको आयु सीमा में छूट पाने का अधिकार है। कोर्ट ने चयनित ओवरएज अभ्यर्थियों का परिणाम जारी करने और यदि वे अन्य योग्यताएं पूरी करते हैं तो उनको नियुक्ति देने का निर्देश दिया। यह भी स्पष्ट किया कि यह सिर्फ मौजूदा मामले के लिए है तथा इसे भविष्य के लिए नजीर न माना जाए।