फैसला : पीसीबी हॉस्टल में रोहित शुक्ला हत्याकांड में तीन को आजीवन कारावास, चार आरोपी बरी, 15 अप्रैल 2019 में ह
15 अप्रैल 2019 को इलाहाबाद विश्वविद्यालय का पीसीबी छात्रावास गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल गया था। छात्रनेता रोहित शुक्ला उर्फ बेटू की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले के आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर गैंगस्टर भी लगाया था। अदालत ने आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। साक्ष्यों के अभाव में चार आरोपी बरी कर दिए गए।
विस्तार
जिला अदालत ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पीसीबी हॉस्टल में 2019 में हुए रोहित शुक्ला की हत्या के मामले में आदर्श त्रिपाठी, नवनीत यादव उर्फ अभिषेक यादव व सौरभ विश्वकर्मा को दोषी पाते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सुबूतों के अभाव में चार आरोपियों को बरी कर दिया। यह आदेश सत्र न्यायाधीश भरत सिंह यादव ने सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता टीएन दीक्षित और बचाव पक्ष के अधिवक्ता को सुनने के बाद दिया।
अभियोजन के मुताबिक आदर्श त्रिपाठी ने 15 अप्रैल 2019 को रोहित शुक्ला को पीसीबी हॉस्टल बुलाया। बातचीत के दौरान अपने दोस्तों के साथ मिलकर रोहित को गोली मार दी। मामले में आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 302 में आदर्श त्रिपाठी, हिमांशु सिंह, हरिओम त्रिपाठी, नवनीत यादव उर्फ अभिषेक यादव, प्रशांत उपाध्याय व सौरभ विश्वकर्मा के खिलाफ कर्नलगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। विवेचना के दौरान जसविंदर सिंह का नाम भी सामने आया था।
सुनवाई में अभियोजन पक्ष की ओर से नौ और बचाव पक्ष की ओर से 14 गवाह पेश किए गए। अदालत ने सुनवाई के बाद हरिओम त्रिपाठी, हिमांशु सिंह, प्रशांत उपाध्याय और जसविंदर सिंह को सुबूतों के अभाव में बरी कर दिया। जबकि, बाकी तीनों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सुनवाई के दौरान दोषी अदालत में मौजूद रहे। अदालत ने आदर्श पर 15 हजार बाकी दोनों दोषियों पर 10-10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। जुर्माने की रकम से 15 हजार रुपये मृतक के पिता को देने का आदेश दिया।
पिता बोले- कोर्ट ने इंसाफ किया, फैसले से संतुष्ट
रोहित शुक्ला हत्याकांड में तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा के फैसले का पीड़ित परिवार ने स्वागत किया है। पिता राकेश शुक्ला का कहना है कि कोर्ट ने इंसाफ किया है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ती है तो वह इस मामले में हाईकोर्ट भी जाएंगे। फिलहाल कोर्ट ने बेटे के हत्यारों को जो सजा दी है, उससे वह संतुष्ट हैं। बताया कि बेटा रोहित इंटर तक एमपीवीएम से पढ़ा था और टॉपर था। उसने सिंबियोसिस कॉलेज पूणे से एमबीए किया था। इसके बाद एलएलबी की पढ़ाई कर रहा था और जिस वक्त यह घटना हुई, उसका अंतिम सेमेस्टर चल रहा था।
घटना के बाद आई वसूली के लिए गैंगवार की थ्योरी को उन्हाेंने सिरे से खारिज किया। कहा कि उन्होंने खुद रोहित के लिए ट्रक खरीदा था और वह ट्रांसपोर्ट के व्यवसाय में लगा हुआ था। उसे पैसे की कोई कमी नहीं थी, ऐसे में वसूली की बात बिल्कुल गलत है। उनका आरोप है कि आदर्श अपराध की दुनिया में नाम कमाना चाहता था ताकि इलाहाबाद विश्वविद्यालय व पूरे जिले में उसका नाम हो जाए। इसके लिए ही उसने उनके बेटे को गोलियों से भून दिया। बताया कि हत्याकांड के बाद वह अल्लापुर में किराये का मकान छोड़कर बारा के लोहगरा में अपने पैतृक घर आकर रहने लगे। पत्नी शीला शुक्ला मौजूदा समय में प्रधान हैं और छोटा बेटा पीयूष व्यवसाय करता है।