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Prayagraj : तेंदुआ एचआरआई के निदेशक की कार के आगे कूदा, मची रही खलबली, वन विभाग ने चलाया सर्च आपरेशन

Sat, 16 May 2026 08:20 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 16 May 2026 08:20 PM IST
सार

छतनाग वार्ड में गंगातट के किनारे स्थापित हरिशचंद्र शोध संस्थान में एक बार फिर तेंदुए के होने को लेकर खलबली मची हुई है। जंगली जानवर तेंदुआ पिछले आठ महीने से एचआरआई के घने जंगल में अपना डेरा जमाए हुए है।

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Leopard jumps in front of HRI director's car, causing panic; forest department launches search operation
तेंदुआ। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

छतनाग वार्ड में गंगातट के किनारे स्थापित हरिशचंद्र शोध संस्थान में एक बार फिर तेंदुए के होने को लेकर खलबली मची हुई है। जंगली जानवर तेंदुआ पिछले आठ महीने से एचआरआई के घने जंगल में अपना डेरा जमाए हुए है। वह कभी कभार लोगों के सामने आ जाता है तो उसके होने की आशंका से वैज्ञानिकों और शोधार्थियों में डर समा जा रहा है। दो दिन पहले आधी रात को तकरीबन साढ़े ग्यारह बजे तेंदुआ संस्थान के निदेशक उज्जवल सेन की कार के सामने कूद गया। इससे एक बार तो निदेशक उज्जवल सेन भी सहम गए थे।

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एचआरई निदेशक उज्जवल सेन 14 मई की रात तकरीबन साढ़े ग्यारह बजे कार्यालय से काम खत्म करने के बाद कार से बंगले की ओर लौट रहे थे। तभी तेंदुआ अचानक उनकी गाड़ी के सामने आ गया। इससे निदेशक उज्जवल सेन एक बार सहम गए। इस दौरान उन्होंने तेंदुए को अपने मोबाइल कैमरे में कैद करने की भी कोशिश की। इसी बीच दूसरे दिन दूसरे दिन एक सुरक्षा गार्ड ने भी तेंदुए को देखा।
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सूचना पर पिछले दो दिनों से वन विभाग की टीम यहां सर्च आपरेशन चला रही है लेकिन अब तक तेंदुआ कहीं नजर नहीं आया है। पर वैज्ञानिकों और शोधार्थियों में डर समाया हुआ है। निदेशक उज्जवल सेन ने संवाद न्यूज एजेंसी को बताया कि अचानक कार के सामने आया जानवर तेंदुआ ही है। उनका यह भी कहना है कि जब तक वो उसे अपने मोबाइल के कैमरे में कैद कर पाते वह परिसर के घने जंगलों की ओर भाग निकला।

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घटना की जानकारी दूसरे दिन वन विभाग को दी गई तो सर्च आपरेशन चलाया गया लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लग सका। फूलपुर के वन क्षेत्राधिकारी लक्ष्मीकांत दुबे ने बताया कि सर्च आपरेशन चलाया जा रहा है। पर अब तक तेंदुए के पैरों के निशान भी परिसर के भीतर नहीं मिले हैं। ऐहितायत के तौर पर एचआरआई के वैज्ञानिकोंं और शोधार्थियों को रात के वक्त अपने कमरों से बाहर निकलने के लिए मना किया गया है।

12 अक्टूबर 2025 को एचआरई में पहली बार देखा गया था तेंदुआ, पांच नाइट विजन कैमरे और पिंजड़े भी हैं लगे

छतनाग वार्ड में गंगा के किनारे स्थित हरिश्चंद्र शोध संस्थान में पहली बार 12 अक्टूबर 2025 को तेंदुए को देखा गया था। इसके बाद वन विभाग ने तेंदुए को दबोचने के लिए वन विभाग ने एचआरआई परिसर में पांच नाइट विजन कैमरे और चार पिंजड़े लगाए। पर अब तक तेंदुआ न तो किसी भी नाइट विजन कैमरे में देखा गया और न ही पिंजड़े में उसे कैद किया जा सका है। शनिवार को वन क्षेत्राधिकारी लक्ष्मीकांत दुबे एवं उप वन क्षेत्राधिकारी सत्येंद्र चौधरी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। घंटों सर्च आपरेशन चलाया गया लेकिन कोई सुराग नहीं लग सका।

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