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High Court : पीड़िता की आपत्तिजनक तस्वीरें पेश करने पर वकील पर जुर्माना, आरोपी की जमानत अर्जी खारिज
Sun, 26 Apr 2026 02:34 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 26 Apr 2026 02:34 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के मामले में आरोपी फैयाज कुरैशी की जमानत याचिका खारिज कर दी। वहीं, पीड़िता की आपत्तिजनक तस्वीरें हलफनामे संग संलग्न करने पर बचाव पक्ष के वकील पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया है।
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कोर्ट का आदेश।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के मामले में आरोपी फैयाज कुरैशी की जमानत याचिका खारिज कर दी। वहीं, पीड़िता की आपत्तिजनक तस्वीरें हलफनामे संग संलग्न करने पर बचाव पक्ष के वकील पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की एकल पीठ ने दिया है। झांसी निवासी फैज कुरैसी पर कोतवाली थाने में दुष्कर्म सहित अन्य आरोप में प्राथमिकी दर्ज है। आरोपी जून 2025 से जेल में बंद है। उसने जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दायर की।
आरोपी के वकील ने दलील दी थी कि पीड़िता मर्जी से साथ थी और लगभग 11 माह से जेल में बंद है। इसलिए उसे जमानत दी जानी चाहिए। हालांकि, सरकारी वकील और शिकायतकर्ता के वकील ने इस आधार पर जमानत का विरोध किया कि आरोपी की ओर से दाखिल किए गए दस्तावेज स्वयं उसकी संलिप्तता और पीड़िता के प्रति संवेदनहीनता को दर्शाते हैं।
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कोर्ट ने कहा कि वकील की ओर से रिकॉर्ड में पीड़िता की ऐसी तस्वीरें पेश करना अपराध की स्वीकारोक्ति के समान है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि मुकदमे की सुनवाई बिना किसी देरी के जल्द पूरी की जाए। वहीं, वकील पर लगाया गया जुर्माना 10 दिन के अंदर हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के खाते में जमा करने का आदेश दिया गया है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की एकल पीठ ने दिया है। झांसी निवासी फैज कुरैसी पर कोतवाली थाने में दुष्कर्म सहित अन्य आरोप में प्राथमिकी दर्ज है। आरोपी जून 2025 से जेल में बंद है। उसने जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दायर की।
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आरोपी के वकील ने दलील दी थी कि पीड़िता मर्जी से साथ थी और लगभग 11 माह से जेल में बंद है। इसलिए उसे जमानत दी जानी चाहिए। हालांकि, सरकारी वकील और शिकायतकर्ता के वकील ने इस आधार पर जमानत का विरोध किया कि आरोपी की ओर से दाखिल किए गए दस्तावेज स्वयं उसकी संलिप्तता और पीड़िता के प्रति संवेदनहीनता को दर्शाते हैं।
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कोर्ट ने कहा कि वकील की ओर से रिकॉर्ड में पीड़िता की ऐसी तस्वीरें पेश करना अपराध की स्वीकारोक्ति के समान है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि मुकदमे की सुनवाई बिना किसी देरी के जल्द पूरी की जाए। वहीं, वकील पर लगाया गया जुर्माना 10 दिन के अंदर हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के खाते में जमा करने का आदेश दिया गया है।