हाईकोर्ट ने कहा : पानी भरा होने से कोई जमीन तालाब नहीं हो जाती, राजस्व दस्तावेज में तालाब दर्ज होना आवश्यक है
अलीगढ़ के एटा चुंगी स्थित कमालपुर बाईपास पर चार अलग-अलग खसरा संख्या में 56 हजार गज जमीन है। राजस्व विभाग की खतौनी व खसरा में यह ट्रस्ट के नाम संक्रमणीय भूमिधर दर्ज है। कई दशकों से इस भूखंड पर आसपास का पानी भरता आ रहा है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टीकाराम चैरिटेबल ट्रस्ट की जमीन को तालाब करार देने के मंडलायुक्त के आदेश को रद्द कर दिया है। कहा, मामले में हींचलाल तिवारी केस लागू नहीं होगा। क्योंकि, यह जमीन तालाब के रूप में दर्ज नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्र, न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने टीकाराम चैरिटेबल ट्रस्ट की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
अलीगढ़ के एटा चुंगी स्थित कमालपुर बाईपास पर चार अलग-अलग खसरा संख्या में 56 हजार गज जमीन है। राजस्व विभाग की खतौनी व खसरा में यह ट्रस्ट के नाम संक्रमणीय भूमिधर दर्ज है। कई दशकों से इस भूखंड पर आसपास का पानी भरता आ रहा है। पिछले दिनों ट्रस्ट की ओर से इस पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। पानी को बाहर निकाला जा रहा था। नाला भी बन रहा था। लेकिन,प्रकरण में सीएम पोर्टल पर एक शिकायत दर्ज हुई।
आरोप है कि भूखंड पर पोखर का स्वरूप बदलकर कब्जा किया जा रहा है। मंडलायुक्त ने जिला प्रशासन, नगर निगम व एडीए से अलग-अलग रिपोर्ट तलब की। दो दिसंबर को एडीएम सिटी अमित कुमार भट्ट, एसपी सिटी मृगांक शेखर पाठक समेत अन्य पुलिस-प्रशासन अधिकारियों ने भी मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य रुकवा दिया। साथ ही ट्रस्ट के लोगों से जमीन से जुड़े अभिलेख तलब किए।
ट्रस्ट पदाधिकारियों का तर्क था कि उनकी निजी जमीन है। न्यायालय के आदेश के बाद ही निर्माण कार्य किया जा रहा है। नगर निगम, तहसील समेत अन्य सभी विभागों से एनओसी भी ली गई है। अब सभी विभागों ने मंडलायुक्त को भूखंड से जुड़ी अभिलेख सौंप दिए हैं। इसमें सामने आया कि भूखंड पर ट्रस्ट का स्वामित्व है,लेकिन एडीए की महायोजना में इस भूखंड का भूउपयोग जलमग्न दर्शाया है। ऐसे में अब इस जमीन पर निर्माण कार्य किया जाना संभव नहीं हैं। मंडलायुक्त ने इस रिपोर्ट को शासन में भेज दिया है। अब मंडलायुक्त के इसी आदेश के खिलाफ ट्रस्ट के पदाधिकारी न्यायालय गए थे।