फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   land does not become a pond just because it is filled with water,

हाईकोर्ट ने कहा : पानी भरा होने से कोई जमीन तालाब नहीं हो जाती, राजस्व दस्तावेज में तालाब दर्ज होना आवश्यक है

Fri, 08 Mar 2024 02:11 PM IST
विनोद सिंह अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 08 Mar 2024 02:11 PM IST
सार

अलीगढ़ के एटा चुंगी स्थित कमालपुर बाईपास पर चार अलग-अलग खसरा संख्या में 56 हजार गज जमीन है। राजस्व विभाग की खतौनी व खसरा में यह ट्रस्ट के नाम संक्रमणीय भूमिधर दर्ज है। कई दशकों से इस भूखंड पर आसपास का पानी भरता आ रहा है।

विज्ञापन
land does not become a pond just because it is filled with water,
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : Amar ujala

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टीकाराम चैरिटेबल ट्रस्ट की जमीन को तालाब करार देने के मंडलायुक्त के आदेश को रद्द कर दिया है। कहा, मामले में हींचलाल तिवारी केस लागू नहीं होगा। क्योंकि, यह जमीन तालाब के रूप में दर्ज नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्र, न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने टीकाराम चैरिटेबल ट्रस्ट की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।

विज्ञापन


अलीगढ़ के एटा चुंगी स्थित कमालपुर बाईपास पर चार अलग-अलग खसरा संख्या में 56 हजार गज जमीन है। राजस्व विभाग की खतौनी व खसरा में यह ट्रस्ट के नाम संक्रमणीय भूमिधर दर्ज है। कई दशकों से इस भूखंड पर आसपास का पानी भरता आ रहा है। पिछले दिनों ट्रस्ट की ओर से इस पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। पानी को बाहर निकाला जा रहा था। नाला भी बन रहा था। लेकिन,प्रकरण में सीएम पोर्टल पर एक शिकायत दर्ज हुई।

विज्ञापन

आरोप है कि भूखंड पर पोखर का स्वरूप बदलकर कब्जा किया जा रहा है। मंडलायुक्त ने जिला प्रशासन, नगर निगम व एडीए से अलग-अलग रिपोर्ट तलब की। दो दिसंबर को एडीएम सिटी अमित कुमार भट्ट, एसपी सिटी मृगांक शेखर पाठक समेत अन्य पुलिस-प्रशासन अधिकारियों ने भी मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य रुकवा दिया। साथ ही ट्रस्ट के लोगों से जमीन से जुड़े अभिलेख तलब किए।

ट्रस्ट पदाधिकारियों का तर्क था कि उनकी निजी जमीन है। न्यायालय के आदेश के बाद ही निर्माण कार्य किया जा रहा है। नगर निगम, तहसील समेत अन्य सभी विभागों से एनओसी भी ली गई है। अब सभी विभागों ने मंडलायुक्त को भूखंड से जुड़ी अभिलेख सौंप दिए हैं। इसमें सामने आया कि भूखंड पर ट्रस्ट का स्वामित्व है,लेकिन एडीए की महायोजना में इस भूखंड का भूउपयोग जलमग्न दर्शाया है। ऐसे में अब इस जमीन पर निर्माण कार्य किया जाना संभव नहीं हैं। मंडलायुक्त ने इस रिपोर्ट को शासन में भेज दिया है। अब मंडलायुक्त के इसी आदेश के खिलाफ ट्रस्ट के पदाधिकारी न्यायालय गए थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed