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लालू के गणित में अब तक उलझे यात्री

Mon, 25 Apr 2016 01:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Mon, 25 Apr 2016 01:20 AM IST
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Lalu still embroiled in mathematics passenger
video wall screen on metro
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव भले ही अब रेलमंत्री न हो लेकिन उनके गणित ने अब तक यात्रियों को परेशान किए रखा है। यूपीए गर्वनमेंट में अपने रेलमंत्री के कार्यकाल के दौरान लालू प्रसाद यादव ने रेलवे की आय बढ़ाने के लिए दर्जनों एक्सप्रेस ट्रेनों को सुपरफास्ट का दर्जा दे दिया। ताकि उसमें सफर करने वाले यात्रियों से सुपरफास्ट का अतिरिक्त किराया वसूला जा सके। यह नियम पिछले कई साल से लागू है लेकिन अधिकांश ट्रेनों की चाल अब भी पैसेंजर सरीखी ही है। सुपरफास्ट ट्रेनों के ढेरों स्टॉपेज होने के साथ ही वे 200 किलोमीटर तक की मामूली दूरी तय करने में पांच से छह घंटे का वक्त लगा दे रही हैं। यात्रियों  की नाराजगी इस बात को लेकर है कि जब ट्रेनों की चाल पैसेंजर ट्रेनों जैसी है तो वे किराया सुपरफास्ट का क्यों दें। इस बारे में रेलवे अफसर भी किसी तरह का बयान देने से बच रहे हैं। 
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रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल के दौरान कई एक्सप्रेस ट्रेनों को सुपरफास्ट का दर्जा दे दिया गया था। इनमें इलाहाबाद आने वाली भी कई ट्रेनें शामिल रहीं। इसमें स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस, चंबल एक्सप्रेस, गंगा-कावेरी एक्सप्रेस, रत्नागिरि एक्सप्रेस आदि ट्रेनें प्रमुख रूप से शामिल रहीं। इन सभी ट्रेनों को सुपरफास्ट ट्रेनों का दर्जा देकर रेलवे ने यात्रियों से सुपरफास्ट चार्ज वसूलना शुरू कर दिया। सुपरफास्ट चार्ज लेने के बावजूद भी इन ट्रेनों की चाल में कोई फर्क नहीं आया। सुपरफास्ट दर्जें की अधिकांश ट्रेनें मुगलसराय-इलाहाबाद-कानपुर-गाजियाबाद रेलखंड पर 200 किलोमीटर की दूरी तय करने में भी घंटों का वक्त लगा दे रही हैं। जबकि यह दूरी ढाई से तीन घंटे में पूरी हो जानी चाहिए।

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रविवार की ही बात करें तो कानपुर से इलाहाबाद आने वाली सुपरफास्ट ट्रेन संख्या 22441 इंटरसिटी को यहां आने में पांच घंटे से ज्यादा का वक्त लग गया। सुपरफास्ट ट्रेनों की इस चाल से यात्री खासे परेशान हैं। ज्यादा किराया देने के बाद भी यात्री अपने गंतव्य तक समय से नहीं पहुंच पा रहे हैं। कानपुर रूट के दैनिक यात्री राजीव श्रीवास्तव, प्रवीण शुक्ला, सिद्धेश मिश्र आदि का कहना है कि जब कानपुर तक की मामूली दूरी तय करने में सुपरफास्ट ट्रेनें पांच घंटे तक का वक्त लगा दे रही हैं तो रेलवे उनसे सुपरफास्ट चार्ज क्यों वसूल रहा है। 

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‘एक्सप्रेस ट्रेनों से सुपरफास्ट चार्ज वापस लिए जाने का निर्णय उत्तर मध्य रेलवे प्रशासन नहीं ले सकता है। इस बारे में रेल मंत्रालय ही कार्रवाई कर सकता है। ’
00 बिजय कुमार, सीपीआरओ, एनसीआर। 

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