फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Lalapur Women's Hospital has been awaiting treatment facilities for 19 years

Prayagraj News: 19 सालों से इलाज की राह देख रहा लालापुर का महिला अस्पताल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 15 Oct 2026 01:45 AM IST
विज्ञापन
Lalapur Women's Hospital has been awaiting treatment facilities for 19 years
लालापुर के अमिलिया तरहार गांव स्थित महिला अस्पताल - फोटो : ArchivE
सरकारी धन की बर्बादी और प्रशासनिक उदासीनता का इससे बड़ा उदाहरण क्या होगा कि 19 साल पहले 30 लाख की लागत से खड़ा किया गया महिला अस्पताल इलाज की राह तक रहा है। गांव में अस्पताल होते हुए भी महिलाओं को 20 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।
विज्ञापन

ग्रामीणों की जमीन लेने से पहले वादा किया गया था कि अस्पताल बनेगा तो गांव का नाम होगा, रोजगार मिलेगा और महिलाओं को इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। वर्ष 2007 में अस्पताल की दीवारें तो खड़ी हो गईं लेकिन यह अस्पताल चालू न हो सका। यह अस्पताल लगभग 30 लाख की लागत से बनकर तैयार हुआ था।
विज्ञापन

अस्पताल निर्माण के लिए अपनी जमीन दान करने वाले श्रीनाथ और श्रीनारायण अब पछताते हैं। उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने नौकरी और काम दिलाने का झांसा देकर हमसे जमीन ले ली। आज न तो अस्पताल चालू हुआ और न ही हमें कोई ढंग का काम मिला। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी के चौखट पर दर्जनों बार अर्जियां लगाईं।
विज्ञापन
विज्ञापन

करीब एक वर्ष पहले जब तत्कालीन सीएमओ और शंकरगढ़ सीएचसी अधीक्षक ने अमिलिया तरहार पहुंचकर अस्पताल का निरीक्षण किया, तो उम्मीद फिर से जगी। निरीक्षण के कुछ ही दिनों बाद जब अस्पताल परिसर की साफ-सफाई हुई और दीवारों पर ताजा रंग-रोगन (पेंटिंग) हुआ, तो ग्रामीणों को लगा कि अब सालों का इंतजार खत्म होने वाला है। लेकिन, वह पेंटिंग भी महज एक दिखावा साबित हुई। सफाई के कुछ दिनों बाद अस्पताल की इमारतों पर फिर से ताले लटक गए और आज भी वहां सन्नाटा पसरा है।
20 किलोमीटर दूर मिलता है इलाज
अस्पताल के चालू न होने की सबसे बड़ी कीमत क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं और महिला मरीजों को चुकानी पड़ रही है। आपातकालीन स्थिति में तरहार क्षेत्र के ग्रामीणों को 20 किलोमीटर दूर शंकरगढ़ या जसरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ता है। कई बार सही समय पर इलाज न मिलने से स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है।

वर्जन
चार बेड का महिला चिकित्सालय है। जहां पर कर्मचारी उपलब्ध न होने की वजह से इसे शुरू नहीं किया जा सका है। फिलहाल, शासन को हाल ही में पत्र लिखकर भेजा गया है। उम्मीद है कि जल्द ही कर्मचारी उपलब्ध हो जाएंगी। इसलिए अस्पताल की मरम्मत कराई गई है।
डॉ. एके तिवारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, प्रयागराज
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed