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सरकारी अस्पतालों में महिला डाक्टरों की कमी
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Wed, 18 Feb 2015 11:57 PM IST
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उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में महिला चिकित्सकों की जबरदस्त कमी है, इसकी वजह से महिला मरीजों को उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। इसे लेकर दाखिल की गई एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही चीफ जस्टिस डॉ. डीवाई चंद्रचूड और जस्टिस सुनीत कुमार की खंडपीठ ने प्रदेश सरकार से जानकारी मांगी है कि याचिका के तथ्यों के अनुसार प्रदेश में महिला चिकित्सकों की क्या स्थिति है। कपिल वस्तु वेलफेयर सोसाइटी की याचिका पर अधिवक्ता अनिल बिसेन और अग्निहोत्री कुमार ने पक्ष रखा।
याचिका में कहा गया है कि प्रदेश के प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में महिला चिकित्सकों की बेहद कमी है। कुछ जिलों में मात्र एक या दो महिला चिकित्सक ही हैं। याची संस्था ने 21 जिलों से आंकड़े जुटाए हैं। इनमें कुल सरकारी डॉक्टरों की संख्या 1261 है। इसमें से मात्र 140 महिला चिकित्सक हैं। याचिका में कहा गया कि महिलाओं की आबादी कुल आबादी की लगभग पचास फीसदी है मगर उनके लिए महिला डॉक्टरों की संख्या नहीं के बराबर है। खंडपीठ ने प्रदेश सरकार को 11 मार्च तक जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
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याचिका में कहा गया है कि प्रदेश के प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में महिला चिकित्सकों की बेहद कमी है। कुछ जिलों में मात्र एक या दो महिला चिकित्सक ही हैं। याची संस्था ने 21 जिलों से आंकड़े जुटाए हैं। इनमें कुल सरकारी डॉक्टरों की संख्या 1261 है। इसमें से मात्र 140 महिला चिकित्सक हैं। याचिका में कहा गया कि महिलाओं की आबादी कुल आबादी की लगभग पचास फीसदी है मगर उनके लिए महिला डॉक्टरों की संख्या नहीं के बराबर है। खंडपीठ ने प्रदेश सरकार को 11 मार्च तक जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
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