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कुंभ 2019: विहिप के पहले दिन की धर्मसंसद में आमंत्रण के बावजूद नही गए ये प्रमुख सन्त

Fri, 01 Feb 2019 02:28 PM IST
kapil kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: kapil kumar Updated Fri, 01 Feb 2019 02:28 PM IST
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kumbh mela 2019 vhp dharma sansad first day these sant did not attend Despite invitation
dharma sansad

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत की मौजूदगी में बृहस्पतिवार को शुरू विश्व हिंदू परिषद के दो दिनी धर्म संसद से कई संतों ने दूरी बना ली है। आमंत्रण के बावजूद शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद के अलावा अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और महामंत्री तथा जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद धर्म संसद में शामिल नहीं हुए। इससे राम मंदिर मुद्दे पर हिंदुत्व की राजनीति को धार देने में जुटी केंद्र और प्रदेश सरकार को झटका लगा है।

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एक अलग धर्म ससंद में शंकराचार्च स्वामी स्वरूपानंद ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की घोषणा करते हुए 21 फरवरी को शिलान्यास की घोषणा की है। इसमें शामिल संतों ने विहिप की ओर से आयोजित धर्म संसद से पहले ही दूरी बना ली है। ऐसे में राम मंदिर को संतों का आंदोलन बनाने की कोशिश के तहत विहिप के नेताओं के अलावा सरकार के नुमाइंदों ने भी अन्य महात्माओं से संपर्क साधा। इसी क्रम में स्वामी निश्चलानंद के अलावा अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष स्वामी नरेंद्र गिरी तथा महामंत्री स्वामी हरि गिरि को भी धर्म संसद का आमंत्रण भेजा गया।
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इनके अलावा आचार्य महामंडेश्वर अवधेशानंद को भी आमंत्रण भेजा गया था लेकिन, ये संत सम्मेलन में शामिल नहीं हुए। हालांकि विहिप के नेता दावा कर रहे हैं कि राम मंदिर पर चर्चा शुक्रवार को होगी और उसमें स्वामी अवधेशानंद शामिल होंगे। वहीं अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष स्वामी नरेंद्र गिरि का कहना है कि साधु समाज का किसी राजनीतिक दल से संबंध नहीं होता है। आरएसएस, विहिप, भाजपा के आ जाने से अन्य दल राम मंदिर निर्माण के विरोध में आ गए हैं। 
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उन्होंने स्वामी स्वरूपानंद के धर्म संसद में हुए निर्णय का समर्थन किया लेकिन, उनका कहना था कि वह अलग से मंदिर निर्माण की पहल करेंगे। चार मार्च को कुंभ स्नान पर्व समाप्त होने के बाद वे अयोध्या कूच करेंगे।शंकराचार्य अधोक्षजानंद सरस्वती ने बताया कि उन्हें भी करीब 10 दिन पहले धर्म संसद के लिए आमंत्रण पत्र आया था। कहा कि वह धर्म संसद में नहीं जाना चाहते हैं, इसकी वजह बताने से इंकार कर दिया।

इसी तरह प्रखर महाराज ने बताया कि उनके पास भी विहिप के पदाधिकारी आमंत्रण पत्र लेकर आए थे लेकिन, वह धर्म संसद में शामिल नहीं हुए। उनका कहना है कि वह नहीं जाना चाहते हैं। महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रनंद गिरी ने बताया कि पिछली बार उन्हें कुंभ में विहिप की धर्म संसद के लिए आमंत्रण पत्र भेजा गया था। वह इसमें शामिल भी हुए थे लेकिन, इस बार उन्हें बुलावा नहीं आया। उनका कहना है कि विहिप अवसरवादी लोगों के हाथ में खेल रही है, इसी वजह से वह संतों का गुट बनाकर काम कर रही है।

विश्व हिंदू परिषद की तरफ से आयोजित धर्म संसद में आने के लिए कई संतों को आमंत्रण पत्र भेजा गया, फिर वे इसमें शामिल होने नहीं गए। कुछ इसकी वजह बता रहे है, तो कुछ के पास इसकी कोई वजह नहीं है। शंकराचार्य अधोक्षजानंद सरस्वती ने बताया कि उन्हें करीब 10 दिन पहले धर्म संसद के लिए आमंत्रण पत्र आया था। कहा कि वह धर्म संसद में नहीं जाना चाहते हैं, इसकी वजह बताने से इंकार कर दिया।

इसी तरह प्रखर महाराज ने बताया कि उनके पास भी विहिप के पदाधिकारी आमंत्रण पत्र लेकर आए थे लेकिन, वह धर्म संसद में शामिल नहीं हुए। उनका कहना है कि वह नहीं जाना चाहते हैं महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रनंद गिरी ने बताया कि पिछली बार उन्हें कुंभ में विहिप की धर्म संसद के लिए आमंत्रण पत्र भेजा गया था।

वह इसमें शामिल होने गए भी थे लेकिन, इस बार उन्हें बुलाया नहीं आया। उनका कहना है कि विहिप अवसरवादी लोगों के हाथ में खेल रही है, इसी वजह से वह संतों गुट बनाकर काम कर रही है। रामानंदाचार्य हंसदेवाचार्य ने बताया कि उन्हें निमंत्रण मिला था, वह गए भी थे। उनका कहा है कि संतों को राम मंदिर के मुद्दे पर एक जुट होकर आवाज उठानी चाहिए। इसके लिए धर्म संसद में उपस्थिति रहेगी तो अच्छा रहेगा।

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