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कुंभ 2019: फैशन का चोला उतार रंगवाया गेरुआ, अब ये विदेशी संत बनेंगे महामंडलेश्वर

Fri, 01 Feb 2019 05:17 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: देव कश्यप Updated Fri, 01 Feb 2019 05:17 PM IST
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kumbh 2109: nirmohi akhada make foreigner sant Mahamandaleshvar

प्रयागराज में चल रहा कुम्भ मेला रोज नए आयामों को अपने साथ जोड़ता जा रहा है। साधना, आराधना और मोक्ष की चाह में सिर्फ अपने देश के ही नही बल्कि विदेशों से भी लोग खींचे चले आ रहे हैं। इन दिनों संगम पर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ रहा है। ये सनातन धर्म की खूबसूरती ही है कि सात समुन्दर पार से आए लोग भी इसे न सिर्फ सहर्ष स्वीकार कर रहे बल्कि सनातनी धर्म का पताका अपने-अपने देश में भी फहरा रहे हैं।

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जापान, अमेरिका और इजराइल से आए लोग 10-12 वर्षों से अपने धर्म को त्यागकर सनातन धर्म के अनुसार जीवन जी रहे हैं। वह रोज भगवान की पूजा व कर्मकाण्ड भी कर रहे हैं। निर्मोही अखाड़ा उनकी आस्था, श्रद्धा और समर्पण को देखते हुए उन्हें इसी 8 फरवरी को महामंडलेश्वर की उपाधि प्रदान करेगा। जगद्गुरु साई मां के इन 10 विदेशी शिष्यों को कुंभ मेले में ही ये उपाधि दी जाएगी।

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साई मां के इन विदेशी शिष्यों नें जब सनातन धर्म स्वीकार किया था तब उन्होंने अपना धर्म और नाम वहीं छोड़ दिया था। उन्हें अपने पुराने नाम की कोई परवाह नही है। वह स्वयं चाहते हैं कि उन्हें सनातनी धर्म द्वारा रखे नामों से जाना जाए। अमेरिका के त्यागानंद, श्रीदेवी दासी, अनंत अनंतादास, जीवानंद दास, परमेश्वरानन्द, अच्युतानंद और ललिताश्री दासी, इजराइल के दयानंद, जापान की राजेश्वरी दासी और पेरिस के जयेंद्र दास को शक्तिधाम में ही ब्रह्मचर्य की शिक्षा दी जा चुकी है।

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जगद्गुरु साई मां के प्रति अगाध श्रद्धा रखने वाले ये लोग अपने देशों में सनातन धर्म का प्रचार कर रहे शक्तिधाम की तरह वह भी अपने-अपने देश में ध्यान, ज्ञान और अध्यात्म का शिविर लगाते हैं। जापान की राजेश्वरी दासी कहती हैं कि हमारे देश में लोगों को बाहरी दुनिया के बारे में तो खूब पता है पर स्वयं के बारे में आभाव है। अमेरिका के स्वामी परमेश्वरानंद बताते हैं कि एक समय उनके माता-पिता का देहान्त हो गया था, नौकरी भी चली गयी थी, अवसाद स्वयं पर भारी पड़ रहा था तो सनातन धर्म की तरफ झुकाव हुआ, इस धर्म ने आत्मज्ञान कराया। अमेरिका की ही ललिताश्री सनातन धर्म की गहराई की बात करती है।

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