यज्ञ कराने से दूर होती हैं ये बड़ी बीमारियां, नहीं जानते होंगे आप
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हवन-यज्ञ से वातावरण शुद्ध होने की बात तो सभी को पता है। इसके जरिए बीमारियां भी दूर की जा सकती हैं। यह जानकर आपको आश्चर्य हो सकता है। कुंभ नगरी में लगे श्रीपीठम आश्रम के पीठाधीश्वर योगीराज रमेश महाराज का दावा है कि यज्ञ-हवन में डाली जाने वाली सामग्रियां वातावरण के साथ मानव जीन्स को भी प्रभावित करती हैं। जिन घरों में नियमित रूप से यज्ञ-हवन होता है, वहां बीमारियां कम होती हैं। कोई बीमारी लंबे से समय से परेशान कर रही हो तो अलग-अलग सामग्रियों से किए गए यज्ञ से इलाज में लाभ मिलता है। बीमारियों को जल्द ठीक किया जा सकता है।
यज्ञ की लकड़ी का भी सही हो चयन
रमेश महाराज बताते हैं कि आम धारणा है कि हवन-यज्ञ में आम की लकड़ी सर्वश्रेष्ठ होती है। यह धारणा सही नहीं है। 27 नक्षत्र होते हैं और इनसे जुड़े 27 ही वृक्ष होते हैं। जो व्यक्ति जिस नक्षत्र में जन्मा है, उसे हवन-यज्ञ में अपने नक्षत्र से जुड़े वृक्ष की लकड़ी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। जिन व्यक्तियों को अपने जन्म का नक्षत्र नहीं पता है, उन्हें हवन-यज्ञ में गाय के कंडे का प्रयोग करना चाहिए।
दूर होती हैं ये बीमारियां
- पेट की बीमारी- चव्य, दालचीनी, तालीस पत्र, आलू बुखारा, पीपरी
- अनिद्रा- पीपलामूल, भारगी
- सांस के रोग- धाय के फूल, पोस्ते के डोडे, बबूल की छाल, बड़ी इलायची और मालकगिनी
- आंखों के रोग- कपूर, लौंग, चंदन, रसोल, हल्दी, लोध।
- वात संबंधी रोग- एलोवेरा की जड़, बालछड़, सहजन की छाल, मेथी के बीज, पुनर्नवा, तेजपत्र, धमासा, असगंध, विदारी कंद
- रक्त संबंधी रोग- धमासा, सारवा, कुड़े की छाल, अडूसा, सरफोंका, मजीठ, कुटकी, रास्ना, हरड़, बाकुची, जवासा
- चर्म रोग- शीतल चीनी, चोपचीनी, नीम के फूल, चमेली के पत्ते, दारूहल्दी, कपूर, मेथी के बीज, पद्माख
- तनाव- बेर की गुठली का गूदा, मौलसिरी की छाल, पीपल की कोंपलें, इमली के बीजों का गूदा, गिलोथ, शंखपुष्पी, जटामांसी, शतावरी, ब्राह्मी