स्वामी महेश्वरानंद का अमर उजाला के साथ विशेष साक्षात्कार, बोले- कुंभ को न बनाया जाए पर्यटन का केंद्र
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आस्ट्रिया समेत यूरोप के तमाम देशों में योग की अलख जगा रहे महानिर्वाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी महेश्वरानंद ने कुंभ को पर्यटन का केंद्र बनाए जाने की मुखालफत की है। उनका मानना है कि यह विश्व का सबसे बड़ा आध्यात्मिक एवं धार्मिक मेला है। इसी वजह से तमाम देशों के लोग कुंभ की ओर खिंचे चले आते हैं। इसके स्वरूप से खिलवाड़ करने की जरूरत नहीं है। इसका प्रचार पर्यटन केंद्र के रूप में न किया जाए। इससे अच्छा संदेश नहीं जाएगा। अमर उजाला के वरिष्ठ संवाददाता राहुल शर्मा से हुई बातचीत के दौरान उन्होंने तमाम मामलों में अपनी बेबाकी से राय रखी-
प्रश्न - क्या कुंभ का स्वरूप बदल रहा है।
जवाब - कुंभ की इस बार काफी ब्रांडिंग की गई। मेरा मुख्य आश्रम आस्ट्रिया की राजधानी वियना में है। वहां भी कुंभ की इस बार काफी चर्चा सुनने को मिली। काफी भक्त वहां से मेरे साथ भी आए। वे सभी सनातन धर्म के अनुयायी हैं। वे यहां अध्यात्म की खोज में आए हैं। निश्चित ही इस बार ब्रांडिंग कुछ ऐसी हुई कि एक बारगी यही लगा कि यह कोई अध्यात्म का मेला नहीं, बल्कि पर्यटकों का मेला है। मेरी निजी राय यही है कि इसके स्वरूप से किसी भी तरह की छेड़छाड़ न की जाए। दुनिया कुंभ को जैसे अब तक जानती आई है वैसे ही आगे भी होना चाहिए।
बिना वीजा के गए थे फ्रांस
प्रश्न - आपको यूरोप का योग गुरु कहा जाता है।
जवाब - मुस्कराते हुए स्वामी महेश्वरानंद ने कहा कि यह बात सही है कि यूरोप के तमाम देशों में हजारों योग शिविर लगाए हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी मैं श्रेय देता हूं कि उनकी वजह से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस अब मनाया जा रहा है। पूरे विश्व में मेरे कुल 35 हजार योग शिविर हैं। हालांकि इसमें से एक भी आश्रम मेरे नाम का नहीं है। सभी जगह मेरे भक्त और समर्थक ही शिविर की देखरेख में जुटे हुए हैं। निश्चित ही विश्व के सभी प्रमुख देशों में अब योग का क्रेज बढ़ा है। आने वाले दिनों में इसका और ज्यादा विस्तार होगा।
प्रश्न - सुना है कि आप बिना वीजा के फ्रांस गए थे।
जवाब - यह बात सही है।1970 में मैं पहली बार भारत से इंग्लैंड गया था। आज मेरी उम्र 73 वर्ष है, उस समय में युवा था। तब भूलवश फ्रांस जा रही एक ट्रेन में बैठ गया था। मेरे पास इंग्लैंड का ही वीजा था। फ्रांस पहुंचने के बाद मुझे वापस इंग्लैंड भेजा गया। निश्चित ही वह दृश्य मैं कभी भूल नहीं सकता। इसी के एक वर्ष बाद मैं पहली बार आस्ट्रिया गया। शुरूआत में वहां मन नहीं लगा, लेकिन धीरे-धीरे लोगों के संपर्क में आने और योग का विस्तार होने के बाद वहीं मैंने एक छोटा आश्रम बना लिया। अब उस आश्रम का काफी विस्तार हो चुका है।
प्रश्न - यूरोप के देशों में पीएम मोदी का क्या क्रेज है।
जवाब - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यूरोप के तमाम देशों में खासा क्रेज है। पीएम बनने के बाद वे यूरोप के तमाम देशों में जा चुके हैं। वहां रहने वाले भारतीय समुदाय के लोगों के साथ गोरे लोगों में भी उनकी खासी लोकप्रियता है। अपने अनुभव के आधार पर कह सकता हूं कि मोदी पूरे विश्व के शीर्ष नेताओं में शुमार हैं। लंबे समय बाद भारत में ऐसा कोई नेता आया है कि जिसका लगातार कद बढ़ता जा रहा है।