Kumbh 2019: शंकराचार्य स्वरूपानंद ने रामाग्रह यात्रा और शिलान्यास कार्यक्रम किया स्थगित, यह थी वजह
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जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने पुलवामा की घटना के बाद देश की बदली परिस्थितियों के मद्देनजर पूर्व में प्रस्तावित अयोध्या राम जन्मभूमि रामाग्रह यात्रा और शिलान्यास का कार्यक्रम स्थगित कर दिया है। अखाड़ा परिषद् के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने पत्र लिखकर और मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने उन्हें फोन करके इस आशय का अनुरोध किया था।
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि, 'पुलवामा की घटना के बाद देश की बदली परिस्थितियों के मद्देनजर हम अपनी पूर्व प्रस्तावित और परमधर्मसंसद 1008 द्वारा उद्घोषित अयोध्या श्री रामजन्मभूमि रामाग्रह यात्रा और शिलान्यास का कार्यक्रम स्थगित करते हैं।'
इससे पहले बेहतर स्वास्थ्य न होने के बावजूद उन्होंने अपने निर्णय पर अडिग रहते हुए पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अयोध्या में 21 फरवरी को ही इष्टिका (ईंट) शिला पूजन करने के लिए 17 फरवरी को रामाग्रह यात्रा पर निकलने की घोषणा की थी। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में श्रीराम जन्मभूमि रामाग्रह यात्रा के संयोजक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बताया कि रविवार को एक बार फिर जब खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर यात्रा स्थगित करने या स्वरूप में बदलाव करने की प्रार्थना उन्होंने अस्वीकार कर दी तो स्वामी सदानंद सरस्वती, ब्रह्मचारी सुबुद्धानंद, डॉ.श्री प्रकाश मिश्र आदि ने टीवी पर चल रही पुलवामा घटना और उसके बाद देश की परिस्थितियों की ओर उनका ध्यान दिलाया।
'कश्मीर की आतंकवादी गतिविधियों से देश में युद्ध जैसा वातावरण बन गया है'
इसके बाद वह मान गए। कुछ देर बाद वाराणसी के जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने भी उनसे यही अनुरोध किया तो बोले, हम देश के साथ हैं। यद्यपि श्रीरामजन्मभूमि के संदर्भ में लिया गया निर्णय सामयिक और आवश्यक है लेकिन देश में उत्पन्न आकस्मिक परिस्थितियों के मद्देनजर यात्रा को कुछ समय स्थगित करना जरूरी हो गया है। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा, आंदोलन इसलिए जरूरी है क्योंकि मौजूदा केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय से अनुरोध किया है कि अधिग्रहित भूमि में से विवादित भूमि उनके मूल मालिकों को वापस की जाए ताकि मंदिर निर्माण आरंभ हो सके और उच्चतम न्यायालय ने केंद्र की इस अर्जी को मूल वाद से जोड़ दिया है । ऐसे में उस भूमि के सदा के लिए हिंदुओं के हाथ से निकल जाने का खतरा पैदा हो गया है, जहां रामलला विराजमान हैं। इसी तरह राम का पुतला बनाए जाने की योजना भी शास्त्रीय, सनातन धर्म और सनातनधर्मियों की भावना के विपरीत है।
बोले, आज कश्मीर की आतंकवादी गतिविधियों से देश में युद्ध जैसा वातावरण बन गया है । यह समय एकजुट होकर आतंकवादियों और उनके पीछे खड़े लोगों के विरुद्ध अपनी दृढ़ता का परिचय देने का है। हम देशवासियों की भावनाओं के साथ हैं। ऐसे समय में रामाग्रह यात्रा और शिलान्यास कार्यक्रम से राष्ट्र का ध्यान भटक सकता है । हम नहीं चाहेंगे कि हमारा कोई भी कार्यक्त्रस्म राष्ट्रहित में बाधा डाले। इसीलिए रामाग्रह यात्रा और शिलान्यास कार्यक्रम कुछ समय के लिए स्थगित है। नया मुहूर्त निकालकर भविष्य में कार्यक्रम को पूरा किया जाएगा।
रामलला के दर्शन कर घरों को लौट जाएं
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा है कि जो लोग अभियान के लिए घरों से निकल कर प्रयाग पहुंच चुके हैं, वह संगम स्नान करके संभव हो तो अयोध्या में श्रीरामलला के दर्शन करते हुए अपने-अपने घरों को लौट जाएं।