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कुंभ 2019: संगम की रेती पर परमधर्मसंसद, राम मंदिर पर आलोचना प्रस्ताव पारित
Mon, 28 Jan 2019 11:49 PM IST
देव कश्यप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: देव कश्यप
Updated Mon, 28 Jan 2019 11:49 PM IST
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द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती
- फोटो : अमर उजाला
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ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा है कि, प्रधानमंत्री मोदी ने मुझे गंगा ने बुलाया है कहकर हिंदुओं की सहानुभूति बटोर ली, लेकिन गंगा को छोड़कर भारत को स्वच्छ बनाने का काम शुरू कर दिया गया है।
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संगम की रेती पर परमधर्मसंसद के परम धर्माधीश स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने यह भी कहा कि देवालय से पहले शौचालय का नारा दिया गया। यदि हर घर में शौचालय बनेगा तो सफाई के लिए अधिक पानी की आवश्यकता होगी। यह मलजल नही में ही डाला जाएगा, न भी डाला जाए तो भूमिगत जल में चला जाएगा जहां से पीने का पानी निकालते हैं। इससे भारत और गंगा स्वच्छता के नाम पर सरकार की मंशा को समझना होगा। एक संत के मुख्यमंत्री बनने से आस जगी थी कि गोरक्षा होगी लेेकिन वैध कत्लखाने तो बेरोकटोक जारी है।
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इससे पहले परमधर्मसंसद में राम मंदिर पर देरी के लिए सरकार की आलोचना की गई। चिर प्रतीक्षित राम जन्मभूमि पर साध्वी पूर्णांबा ने आलोचना प्रस्ताव का निवेदन किया, जो ध्वनिमत से पारित हो गया। इसी तरह मातृसदन के अध्यक्ष स्वामी शिवानन्द जी की ओर से प्रस्तुत पंच प्रयाग रक्षा विधानक, गुजरात के बनासकाठा के धर्मांसद किशोर भाई दवे की ओर से गो रक्षा विधानक, स्पेन के आल्वरो एन्तेरिया की ओर से तीर्थ मर्यादा रक्षा विधानक और महाराष्ट्र के ब्रह्मचारी निरंजनानन्द की ओर से प्रस्तुत कुम्भ मर्यादा रक्षा विधानक भी चर्चा के बाद सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। पूरक काल में काशी विद्वत् परिषद् न्यास के अध्यक्ष श्रीप्रकाश मिश्र, काशी हिन्दू विश्वविद्यलाय के शत्रुघ्न त्रिपाठी आदि ने विविध विषयों को सदन के पटल पर रखा। संचालन प्रवर धर्माधीश स्वामिश्री अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने किया।
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