कुंभ 2019: जूना अखाड़े की रोक के बावजूद नागा साधुओं नें किया जमकर हथियारों का प्रदर्शन
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तीसरे शाही स्नानपर्व वसंत पंचमी पर अखाड़ों का जोश एवं वैभव जमकर नजर आया। अस्त्रों के प्रदर्शन पर भले ही रोक रही लेकिन स्नानपर्व के दौरान प्रतिबंधों पर आस्था और
उत्साह भारी रहा। नागाओं ने अखाड़े की छावनी से लेकर संगम में डुबकी लगाने तक अपना प्रदर्शन जारी रखा। व्यवस्था देख रखे अखाड़े के कोतवालों से इतर नागाओं ने स्वयं छड़ियां और तलवार लेकर पूरे रास्ते तरह-तरह के करतब दिखाए। उन्होंने स्वतंत्र रूप से तलवार भांजने के साथ ही आपस में भी तलवारों के संग प्रदर्शन किया। घोड़ों पर बैठे नागाओं ने नगाड़े भी बजाए लेकिन तलवारों के संग करतब करते हुए चकित, मुग्ध भी करते रहे।
भालादेव को देवता के रूप में संग शोभायात्रा की शान रहे। न सिर्फ नागा संन्यासियों बल्कि बैरागी अखाड़ों ने भी अपने जुलूस में ऐसे ही करतब दिखाए। किसी खालसाधारी संत ने चरखी नचाकर इंद्रधनुषी आभा बिखेरी को कोई हाथों में तलवार लेकर अखाड़े में जमकर तलवारबाजी का प्रदर्शन किया। निर्वानी अनी के श्रीमहंत धर्मदास कहते हैं, तरह-तरह के भाले अखाड़ों के देवता हैं तो लंबी-लंबी तलवारों से की गई कलाबाजी अखाड़ों की शान है। जुलूस के दौरान कई जगहों पर लाठियों का भी जमकर प्रदर्शन हुआ, जिसे देखकर लोग दांतों तले ऊंगली दबाते रहे।
डुबकी के बाद भभूत की होली
नागाओं ने डुबकी लगाने के पहले शरीर पर भभूत मले तो डुबकी लगाने के बाद तो बस दिगंबरों के बीच भभूत की होली ही हुई। डुबकी केबाद सभी ने अपने संग लाए पैकेट से भभूत निकालकर परंपरा के मुताबिक शृंगार किया। वहीं दूसरे नागाओं के शरीर पर भी भभूत का लेप किया, जहां भभूत लगाना उनके लिए संभव नहीं था।