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महास्नान: हर तरफ श्रद्धालुओं का रेला, हर डगर गूंजता रहा हर-हर गंगे, जय श्रीराम

Tue, 05 Feb 2019 11:18 AM IST
kapil kumar मुनेंद्र बाजपेयी, अमर उजाला, प्रयागराज
मुनेंद्र बाजपेयी, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: kapil kumar Updated Tue, 05 Feb 2019 11:18 AM IST
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Kumbh mela 2019 mauni amavasya Dusra shahi snan Devotees holy dip in sangam
mauni amavasya

 कुंभ के मौनी अमावस्या पर्व पर सोमवार को अमृत पुण्य पाने के लिए आस्था का जनसमुंद्र उमड़ा। देश-दुनिया के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाई। चार ग्रहों की युति और सोमवती अमावस्या का संयोग मोक्षदायी मानकर रविवार देर रात शुरू हुआ भीड़ का रेला 24 घंटे बना रहा। कोसों पैदल चलकर संगम तट पहुंचे श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ डुबकी लगाने के साथ मनोकामना पूर्ति के लिए मानस की चौपाई - गंग सकल मद मंगल मूला, सब सुख करनि हरनि सब चूला..का उच्चारण भी किया। 

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अखाड़ों और कुछ साधु संतों को छोड़ दें तो न जाति का बंधन था और न ही वर्ण का, संगम तीरे सब बराबर चले, उमंग में सबकी संगम में एक डुबकी लगाने की आस रही। संगम तट को जाने वाले रास्ते ठसाठस रहे। मेला क्षेत्र में लोग चींटियों की चाल से चले। आस्था का ऐसा सैलाब कि न किसी को रात मेें ठंड का भान हुआ न ही दिन में कड़ी धूप ने विचलित किया। 
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कुंभ में संगम स्नान का ज्वार बड़े बुजुर्गों के साथ महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगों को भी कुंभ मेले तक खींच लाया। रात में खुले आसमान के नीचे सड़क किनारे, संगम नोज समेत अन्य घाटों पर लाखों लोग खुले में सोते रहे। भीड़ ऐसी कि लोगों का मेला ही शहर की सड़कों पर चलना मुश्किल रहा। स्नान करने जाते और डुबकी लगाकर लौटते साधु-संतों के साथ श्रद्धालु हर-हर गंगे, गंगा मइया की जय और जयश्री राम का जयघोष लगाते रहे।

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बिलासपुर के सीताराम दास को व्हील चेयर पर संगम स्नान कराने लाए भक्त

Kumbh mela 2019 mauni amavasya Dusra shahi snan Devotees holy dip in sangam
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 मौनी अमावस्या पर अमृत पुण्य स्नान के लिए देश विदेश से आए संतों, श्रद्धालुओं और गृहस्थों के साथ युवाओं की टोलियों का रुख कुंभ क्षेत्र की ओर रहा। जो घर में रहे वह अतिथियों की सेवा में व्यवस्त रहे, अन्य स्वयंसेवी बनकर स्नानार्थियों को रास्ता बताते रहे या फिर दर दस कदम पर चल रहे भंडारे के सेवादार बनकर लोगों को भोजन के साथ चाय पिलाते रहे। बहुतेरे ऐसे भी रहे जो अपनों से बिछुड़े लोगों को उनसे मिलाने को प्रयत्नशील रहे। शहरियों की इस आत्मियता ने साबित कर दिया कि प्रयागराज के लोग अतिथि का मान रखने में पीछे नहीं हैं। 

संत सीताराम दास के न हाथ हैं और न ही पैर, सिर्फ सिर और धड़ ही दिखता है। बामुश्किल डेढ़ फीट के संत के शिष्य कई हजार हैं। आठवीं बार प्रयाग का कुंभ स्नान करने आए, उन्हें उनके शिष्य व्हील चेयर पर लेकर आए हैं। 

संगम नोज पर व्हील चेयर पर संत सीताराम दास को ले जा रहे भक्त ने अपना नाम नहीं बताया। वह बोले, निराकार भाव से शिष्यों के लिए कुछ भी बोलने वाले गुरु का हर कथन  सत्य साबित होता है। बिलासपुर के जलागढ़ में त्रिवेणी धाम के महंत सीताराम की महिमा उनके भक्त नाम के अनुरुप बताते हैं। उनके साथ रहे भक्तों ने बताया कि उन्हें किसी ने बुलाया नहीं, वे स्वयं गुरुजी को लेकर कुंभ स्नान कराने आए हैं। संत सीताराम दास ने बताया कि हर बार वह शिष्यों की मंगलकामना और राष्ट्रहित की कामना से डुबकी लगाने आते हैं। 
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