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कुंभ 2019: संस्कृतियों के संगम में लग रहा स्वाद का तड़का, अखाड़ों में हर दिन तैयार हो रहा नया मेन्यू

Sat, 26 Jan 2019 03:09 PM IST
shubham सुरभि गुप्ता, अमर उजाला, प्रयागराज
सुरभि गुप्ता, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: shubham Updated Sat, 26 Jan 2019 03:09 PM IST
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daily ready new menu food in akhada Maha kumbh Mela 2019
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तंबुओं की नगरी में इन दिनों लोक संस्कृतियों और कलाओं की ही नहीं स्वाद का भी संगम हो रहा है। अलग-अलग अखाड़ों में साधु-संतों का रहन सहन जितना दिव्य है उतना ही समृद्ध उनका रसोईघर भी है। जिनमें महंतों की देख रेख में रसोइये हर दिन तरह-तरह के लजीज व्यंजन तैयार करते हैं।

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ढोकले से लेकर मिस्सी रोटी तक
अखाड़ों में प्रतिदिन सुबह के नाश्ते से लेकर रात के खाने तक का मेन्यू तैयार होता है। यहां आपको दक्षिण भारतीय मारवाड़ी, पूर्वांचली, गुजराती, पंजाबी व्यंजनों का स्वाद चखने को मिलेगा। इनमें ब्रेड पकौड़ा, ढोकला, जलेबी, पोहा, सेव, चना, कढ़ी चावल, राजमा चावल, गाजर का हलवा, मूंग दाल हलवा, मिक्स वेजीटेबल, रसगुल्ला, बालूशाही, इमरती, मिक्स दाल, पुलाव, पूरी, मिस्सी रोटी, तवा रोटी, मक्के की रोटी, सरसोें का साग, दाल मखनी, तंदूरी रोटी समेत बहुत से व्यंजन शामिल हैं। श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के महाराज रामदास ने बताया कि जिस दिन जिस महंत की भड़ारा करने की जिम्मेदारी होती है, वह अपनी पसंद का मेन्यू तय करते हैं। महंत अलग-अलग प्रांतों से हैं, इसलिए यह विविधता खाने में भी दिखती है।
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सुबह चार बजेे जग जाती है रसोई
अखाड़ों की रसोईघर में सुबह चार बजे चूल्हा जल जाता है। इसके बाद से ही शुरू हो जाता है नाश्ता और फिर खाना बनने का सिलसिला जो रात तक चलता रहता है। अखिल भारतीय श्री पंच निर्मोही अनी अखाड़ा के अन्न क्षेत्र के व्यवस्थापक अरविंद मिश्रा ने बताया कि सुबह चार बजे ही रसोई जग जाती है। कारीगर शिफ्ट के हिसाब से काम करते हैं।

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एक वक्त के लंगर पर 10 से 12 लाख खर्च

अखाड़ों में एक वक्त के खाने में लाखों रुपये का खर्च आता है। एक वक्त में तकरीबन तीन से पांच हजार लोगों के लिए लंगर बनता है। जिसकी लागत 10 से 12 लाख रुपये तक पहुंचती है। श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन के अन्नक्षेत्र व्यवस्थापक महेश मुनि के मुताबिक उनके यहां हरियाणा से रसाइये आए हैं।

हरिद्वार कुंभ के लिए अभी से 40 प्रतिशत बुकिंग
हरिद्वार में होने वाले आगामी कुंभ के लिए अखाड़ों में अभी से 40 प्रतिशत तक बुकिंग हो चुकी है। श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के महंत रमण मुनि ने बताया कि हमारा ध्येय है कि लंगर से कोई भी बिना प्रसाद पाए न जाए। महंतों में सेवा भाव इतना है कि उनमें लंगर कराने की होड़ लगी रहती है। इसके बाद भी कई महंत लंगर कराने से वंचित रह जाते हैं। इस बार भी ऐसा हुआ है। प्रयागराज में कुंभ भर के लिए लंगर की सभी तारीखें फुल हैं। यही नहीं, हरिद्वार में होने वाले अगामी कुंभ के लिए भी 40 प्रतिशत बुकिंग हो चुकी है।
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